जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यूएचडी मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने अपने इलाके से जुड़ा एक पुराना संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि बीते समय में ग्रामीण आबादी के मन में पक्की सड़कों को लेकर एक अजीब सा डर बैठा हुआ करता था। उस दौर में लोगों की सबसे बड़ी पूंजी उनका पशुधन हुआ करती थी और उन्हें लगता था कि यदि उनके गांव के नजदीक से कोई मुख्य मार्ग निकल गया, तो चोरों के लिए वहां तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस आशंका के चलते लोग गाय, भैंस, बकरी और ऊंट जैसे मवेशियों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे और सड़क निर्माण का विरोध किया करते थे।
मंत्री ने रींगस के पास स्थित अपनी ग्राम पंचायत महरौली और अपने पैतृक गांव भानी का उदाहरण देते हुए विस्तार से यह पुरानी घटना समझाई। उन्होंने बताया कि जयपुर से बीकानेर जाने वाली सड़क की योजना इस प्रकार बनाई गई थी कि वह महरौली और भानी के पश्चिमी हिस्से से होकर गुजरे। हालांकि, उस समय के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों ने इसका कड़ा विरोध किया था। उनका मानना था कि इस मार्ग के बनने से बाहरी लोगों का दखल बढ़ेगा और उनके मवेशी खतरे में आ जाएंगे। स्थानीय प्रतिनिधियों ने इस संबंध में काफी दौड़भाग की, जिसके परिणामस्वरूप अंततः उस सड़क को रींगस की तरफ डायवर्ट कर दिया गया।
वक्त के साथ बदली लोगों की सोच और प्राथमिकताएं
झाबर सिंह खर्रा ने इस पुराने वाकये के माध्यम से यह रेखांकित किया कि किस प्रकार बदलती परिस्थितियों के साथ आम जनता की जरूरतें और सोच भी पूरी तरह बदल जाती हैं। जहां एक समय लोग अपने गांवों के पास सड़क आने से डरते थे और उसे अपने पशुओं के लिए बड़ा खतरा मानते थे, वहीं आज का परिदृश्य पूरी तरह उलट चुका है। वर्तमान समय में किसान और ग्रामीण खुद यह मांग करते हैं कि उनके गांवों तक पक्की सड़कें पहुंचाई जाएं। ऐसा होने से उन्हें स्थानीय बाजारों तक आने-जाने में सहूलियत मिलती है और आवागमन आसान हो जाता है।
योजना के बिना हुआ अनियंत्रित शहरीकरण
विकास की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए मंत्री खर्रा ने यह भी कहा कि देश में स्वतंत्रता के बाद से जिस प्रकार शहरीकरण और बसाहट का क्रम चला, उसमें दूरदर्शी योजना का अभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है। समय के साथ धानियों से छोटे गांव बने, गांवों से कस्बे विकसित हुए, और फिर वे कस्बे नगर तथा महानगरों में तब्दील हो गए। लेकिन इस पूरे विकास क्रम में इस बात का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया कि भविष्य की जरूरतों के मुताबिक सुनियोजित विस्तार कैसे किया जाए।
जल निकासी और बंद होते जलमार्गों की समस्या
अनियोजित विकास का परिणाम यह हुआ कि आज शहरों के सामने कई गंभीर समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं। मंत्री ने विशेष तौर पर इस बात का जिक्र किया कि जलप्रवाह के प्राकृतिक रास्तों का अवरुद्ध होना आज के शहरी इलाकों की सबसे बड़ी कठिनाइयों में से एक है। जिन मार्गों से होकर बारिश या अतिरिक्त पानी की निकासी होनी चाहिए थी, उन पर लोगों का ध्यान नहीं गया और धीरे-धीरे वे रास्ते पूरी तरह बंद हो गए। इसका सीधा और बुरा असर हमारी सड़कों पर पड़ा, जिससे सड़कें समय से पहले टूटने लगीं और कई जगहों पर जलभराव तथा कीचड़ जैसी दिक्कतें पैदा होने लगीं।
निजी वाहनों की संख्या बढ़ने से बढ़ा यातायात का दबाव
देश में निजीकरण के दौर की शुरुआत होने के बाद से सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की संख्या में भारी उछाल आया है। आज के समय में सड़कों पर पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा गाड़ियां मौजूद हैं, जिसके कारण शहरी क्षेत्रों में भीषण ट्रैफिक जाम एक आम समस्या बन चुका है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब केवल नई सड़कें बना देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है कि इस बढ़ते यातायात और लोगों की आवाजाही को सुचारू रूप से कैसे प्रबंधित किया जाए।
यागम और परिवहन दबाव को कम करने के लिए मेट्रो का विस्तार
यातायात की इस समस्या से निपटने के लिए सरकार की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि भीड़भाड़ कम करना उनकी सरकार के प्रमुख कार्यों में शामिल रहा है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए जयपुर मेट्रो का विस्तार किया जा रहा है, जिसे इस दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। मेट्रो सेवाओं के विस्तार से सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव काफी हद तक कम होगा और आम नागरिकों के लिए शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक सफर करना अधिक सुगम हो जाएगा।
फ्लाईओवर और सड़क चौड़ीकरण के जरिए सुधार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे विकास कार्यों का हवाला देते हुए मंत्री ने बताया कि जिन इलाकों में ट्रैफिक का दबाव अत्यधिक है, वहां पर यातायात को सुगम बनाने के लिए बड़े पैमाने पर फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा, जिन संकरे मार्गों पर वाहनों की आवाजाही में परेशानी होती है, वहां सड़कों को चौड़ा करने का काम भी तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण के इन अभियानों में राज्य सरकार के साथ-साथ माननीय न्यायालय के निर्देश भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

















