भारतीय वायुसेना ने सरहद के उस पार छिपे दुश्मनों की गलतफहमी को पूरी तरह से मिटा दिया है जो अपनी दूरी को सबसे मजबूत सुरक्षा कवच मानकर बैठे थे। रक्षा मंत्रालय की हालिया सालाना रिपोर्ट में देश के सबसे बड़े हवाई अभियान से जुड़ा एक बड़ा खुलासा सामने आया है। ऑपरेशन सिंदूर के नाम से चलाए गए इस सैन्य अभियान में वायुसेना के S-400 सुदर्शन डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के एक स्पेशल-मिशन विमान को ठीक 314 किलोमीटर की हैरान कर देने वाली दूरी पर निशाना बनाकर ढेर कर दिया। सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के इतिहास में यह अब तक का सबसे लंबा और सटीक प्रहार दर्ज किया गया है।
लंबी दूरी की रक्षा क्षमता का प्रदर्शन
इस आधिकारिक रिपोर्ट में इस सैन्य कार्रवाई को भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता और तैयारी का बड़ा सबूत बताया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि इस हमले ने दुश्मन के उस भ्रम को तोड़ दिया जिसमें वे सोचते थे कि इतनी अधिक दूरी उन्हें भारतीय सुरक्षा घेरे से बचा लेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रडार ने बेहद खामोशी के साथ खतरे का पीछा किया और लंबी रेंज वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल को उसकी मारक सीमा के बिल्कुल आखिरी छोर पर मौजूद लक्ष्य की तरफ दागा गया। इस ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि बहुत अधिक फासले पर उड़ने वाले लक्ष्य भी भारतीय वायुसेना के एयर-डिफेंस तंत्र की पकड़ से बाहर नहीं हैं।
प्रधानमंत्री का दौरा और वीरता पुरस्कार
तेरह सितंबर को सार्वजनिक की गई इस रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि इसके बाद बारह मई, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदमपुर एयरफोर्स स्टेशन का व्यक्तिगत दौरा किया और इस जटिल ऑपरेशन में हिस्सा लेने वाले सभी वायु योद्धाओं की पीठ थपथपाई। इसके साथ ही, इस अभियान के दौरान अपने अदम्य साहस का परिचय देने वाले वायुसेना कर्मियों को पंद्रह अगस्त, 2025 को कुल 219 प्रेसिडेंशियल गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने की बात भी इसमें कही गई है। यह पूरी सैन्य कार्रवाई सात से दस मई, 2025 के बीच चले चार दिनों के तीव्र संघर्ष के दौरान एक वृहद और समन्वित हवाई रक्षा प्रयास का अहम हिस्सा थी।
स्वदेशी नेटवर्क और निगरानी तंत्र
देश के आकाश की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली वायुसेना ने अपने स्वदेशी इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम यानी IACCS के जरिए पूरी प्रक्रिया में केंद्रीयकृत नियंत्रण और आपसी तालमेल का शानदार इस्तेमाल किया। इस रिपोर्ट के अनुसार, IACCS ने सैन्य और नागरिक निगरानी सेंसर्स को आपस में जोड़ते हुए और तमाम संबंधित पक्षों को एक साझा वायु स्थिति की तस्वीर उपलब्ध कराते हुए समन्वित हवाई रक्षा अभियानों की रीढ़ की हड्डी के रूप में काम किया। इन ऑपरेशन्स को देश के कई हिस्सों में वायुसेना के नेटवर्क्ड टैक्टिकल नोड्स के माध्यम से संचालित किया गया था।
नागरिक विमानों की सुरक्षा का ध्यान
इन नोड्स ने हवा में मंडरा रहे लक्ष्यों की पहचान करने और उनका सटीक वर्गीकरण करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, वहां तैनात प्रशिक्षित ऑपरेटरों ने यह पूरी तरह सुनिश्चित किया कि संघर्ष के इस माहौल में भी किसी भी नागरिक विमान को कोई नुकसान न पहुंचे। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि टकराव के उस दौर में पाकिस्तान ने अपना सिविल एयरस्पेस खुला रखा था और उस दौरान नागरिक उड़ानों का संचालन भी जारी रखा गया था। इसके विपरीत, भारत का रुख अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला था ताकि किसी भी मुसाफिर विमान को कोई खतरा पैदा न हो। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान वायुसेना ने चकलाला, रहीम यार खान, सुक्कुर, मुरीद, सरगोधा, जैकोबाबाद और भोलाड़ी जैसी जगहों पर स्थित पाकिस्तानी एयर-डिफेंस रडार, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और सैन्य बुनियादी ढांचे को भी अपने हमलों का निशाना बनाया था।


















