राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के दूसरे चरण के तहत कोटा और उदयपुर नगर निगमों सहित कई अन्य निकायों में मतदान की प्रक्रिया 11 सितंबर को पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न करा ली गई। पूरे राज्य के भीतर कुल 309 नगरीय निकायों के अंतर्गत आने वाले 10,245 वार्डों में पार्षदों के चुनाव के लिए सियासी सरगर्मी बनी हुई है।
सुबह धीमी शुरुआत के बाद उमड़ी भीड़
कोटा और उदयपुर दोनों ही प्रमुख शहरों में सुबह ठीक 8:00 बजे जब मतदान शुरू हुआ तो शुरुआती घंटे में वोटिंग की रफ्तार काफी धीमी दर्ज की गई। हालांकि जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, वैसे-वैसे मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलने लगीं। कोटा के नयापुरा और जेडीबी कॉलेज रोड पर स्थित मतदान बूथों पर टिकट वितरण को लेकर स्थानीय स्तर पर कुछ असंतोष जरूर देखा गया, लेकिन इसके बावजूद जनता के बीच वोट डालने को लेकर जबरदस्त उत्साह बना रहा। इसके साथ ही उदयपुर के शहरी इलाकों के साथ ग्रामीण सीमाओं से सटे हुए वार्डों में भी लोगों ने इस लोकतांत्रिक उत्सव में बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
युवाओं और महिलाओं ने दिखाया खासा उत्साह
दिन में ठीक 12:00 बजे तक मतदान के आंकड़ों में अच्छी खासी तेजी दर्ज की जाने लगी। कोटा की शहरी सीटों पर पहली बार वोट डाल रहे युवा मतदाताओं और महिलाओं की भारी सक्रियता ने पूरे चुनावी समीकरण को बेहद दिलचस्प मोड़ पर ला दिया है। इन इलाकों में स्थानीय स्तर की परेशानियां, साफ़-सफाई की व्यवस्था और शहर का बुनियादी विकास जैसे मुद्दे सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में रहे। दूसरी तरफ, उदयपुर के आदिवासी इलाकों से जुड़े क्षेत्रों और अंदरूनी वार्डों में भी मतदान की रफ्तार काफी तेज बनी रही, जिससे कुल वोटिंग प्रतिशत ऊपर की तरफ बढ़ता हुआ साफ तौर पर दिखाई दिया।
बागी उम्मीदवारों ने बढ़ाई राजनीतिक दलों की मुश्किलें
शाम के 4:00 बजे तक मिले रुझानों के अनुसार, कोटा के 10 से ज्यादा वार्डों में बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराते हुए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी का पूरा सियासी गणित बिगाड़ दिया है। इसकी वजह से कई सीटों पर अब सीधी लड़ाई के बजाय त्रिकोणीय मुकाबले जैसे हालात पैदा हो गए हैं। कोटा के इस पूरे सियासी घटनाक्रम में पूर्व यूडीएच मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल का प्रभाव भी काफी अहम माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, उदयपुर में भीतरघात और क्रॉस-वोटिंग जैसी आशंकाओं से निपटने के लिए दोनों ही मुख्य दलों के दिग्गज नेता लगातार बूथ वार वोटिंग रिपोर्ट का जायजा लेते हुए नजर आए।
ईवीएम सीलिंग और स्ट्रॉन्ग रूम की कड़ी सुरक्षा
शाम को ठीक 6:00 बजे तय समय सीमा समाप्त होने के साथ ही कोटा और उदयपुर के सभी वार्डों में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई। वोटिंग खत्म होते ही तमाम मतदान दलों ने उम्मीदवारों के चुनावी एजेंटों की उपस्थिति में ईवीएम मशीनों को सील किया और उन्हें पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुँचा दिया। मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता अपनी जीत और हार के समीकरणों को जोड़ने-तोड़ने के गणित में पूरी तरह व्यस्त हो चुके हैं।
रिजल्ट से पहले बाड़बंदी और निर्दलीयों पर नजर
आगामी 14 सितंबर को घोषित होने वाले चुनाव परिणामों से ठीक पहले राजनीतिक दलों के भीतर जोड़-तोड़ और क्रॉस-वोटिंग के खतरे को रोकने की कवायद शुरू कर दी गई है। कोटा और उदयपुर से संभावित विजेता उम्मीदवारों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजने यानी बाड़बंदी का दौर अब तेजी से शुरू हो चुका है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो कई वार्डों के परिणामों में निर्दलीय प्रत्याशी किंगमेकर की भूमिका अदा कर सकते हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के रणनीतिकार निर्दलीय उम्मीदवारों से संपर्क साधने में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

















