हाल ही में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने के आरोप के बाद सोशल मीडिया पर कई ऐसी तस्वीरें वायरल हुईं जिनमें शरीर के भीतर लोहे की छोटी-छोटी गोलियां धंसी हुई साफ नजर आ रही थीं। इस घटना के बाद से एक तरफ छात्रों और सीजेपी समर्थकों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है, तो दूसरी तरफ इसे एक कम घातक हथियार के रूप में पेश किया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पैलेट गन कितनी घातक है और इसके छर्रे शरीर के अंदर घुसने से किस तरह का नुकसान पहुंचाते हैं।
भारत में पैलेट गन का पिछला इतिहास और आंकड़े
इस हथियार के खतरे को समझने के लिए इसके पुराने इतिहास पर नजर डालना जरूरी है। भारत में साल 2016 के दौरान जम्मू-कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद भड़के हिंसक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए पहली बार बड़े पैमाने पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था। तब जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने उग्र भीड़ को तितर-बितर करने और उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए इन बंदूकों का रुख किया था। उस दौरान सैकड़ों लोगों को पैलेट गन के कारण गंभीर शारीरिक नुकसान का सामना करना पड़ा था।
उस दौर में जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से विधानसभा में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 8 जुलाई 2016 से 27 फरवरी 2017 के बीच लगभग 6,221 लोग पैलेट गन के छर्रों से घायल हुए थे। इन घायलों में से 728 ऐसे लोग थे जिनकी आंखों में सीधे छर्रे लगे थे और इस वजह से 54 लोगों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई थी। उस समय श्रीनगर के नेत्र चिकित्सालयों समेत कई बड़े अस्पतालों में सैकड़ों मरीजों की आंखों से धातु के छोटे छर्रे बाहर निकालने के लिए बेहद जटिल और क्रिटिकल सर्जरी करनी पड़ी थीं। कई पीड़ितों की एक तो कुछ की दोनों आंखों को भारी और अपूरणीय क्षति उठानी पड़ी थी।
शरीर के विभिन्न अंगों पर पैलेट गन के छर्रों का असर
यह समझना बेहद जरूरी है कि पैलेट गन के छर्रों का प्रभाव केवल आंखों तक ही सीमित नहीं रहता है, बल्कि यह शरीर के दूसरे अंगों को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। पैलेट गन से बाहर निकलने वाले छर्रे बेहद छोटे धातु के गोल कण होते हैं जो त्वचा को चीरकर तुरंत भीतर घुस जाते हैं और मांसपेशियों के अंदर जाकर फंस जाते हैं। किसी भी व्यक्ति को पैलेट लगने पर चोट की गंभीरता इस एक मुख्य बात पर निर्भर करती है कि छर्रा शरीर के किस हिस्से पर जाकर लगा है और उसे कितनी कम या ज्यादा दूरी से फायर किया गया था।
त्वचा पर चोट लगने की स्थिति में आमतौर पर गंभीर खरोंच, सूजन, तेज दर्द, त्वचा के अंदर धातु के छर्रों का धंस जाना और लगातार खून बहना जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। वहीं आंख पर वार होने पर सबसे भयानक खतरा मंडराता है, जिससे आंख का कॉर्निया और रेटिना बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, रोशनी पूरी तरह जा सकती है, आंख के भीतर अंदरूनी रक्तस्राव हो सकता है और स्थायी रूप से दृष्टि कम होने या हमेशा के लिए छिन जाने का खतरा रहता है, जिसके लिए कई मामलों में तत्काल सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।
यदि छर्रे चेहरे पर लगते हैं तो नाक, होंठ या जबड़े की हड्डियों को गहरा नुकसान पहुंचता है और चेहरे पर हमेशा के लिए निशान छूट जाते हैं। इसके अलावा छाती या पेट जैसे संवेदनशील हिस्सों पर लगने पर बहुत गहरे घाव बन जाते हैं। यदि गोली बहुत नजदीक से चलाई गई हो तो फेफड़े या अन्य अंदरूनी अंग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं, और यदि छर्रा शरीर के भीतर ही रह जाए या घाव की सही ढंग से साफ-सफाई व देखभाल न की जाए तो वहां गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है।
चोट लगने पर क्या एहतियात बरतनी चाहिए
अगर किसी व्यक्ति को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़े, तो कुछ जरूरी प्राथमिक सावधानियां बरतना बेहद आवश्यक हो जाता है। सबसे पहले घाव को किसी साफ कपड़े से मजबूती से दबाकर खून के बहाव को रोकने का प्रयास करना चाहिए। यदि छर्रा आंख, चेहरे, गर्दन, छाती या पेट जैसे संवेदनशील अंगों में लगा है, तो बिना एक पल गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए। शरीर के भीतर गहराई तक धंसे हुए छर्रे को कभी भी खुद अपने हाथों से निकालने की भूल नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा यदि आंख में चोट आई है तो उसे बिल्कुल न रगड़ें और फौरन किसी योग्य नेत्र विशेषज्ञ या आपातकालीन चिकित्सा सहायता की मदद लें। इन तमाम पहलुओं को देखते हुए पैलेट गन के छर्रों को किसी भी कीमत पर कमतर या मामूली नहीं आंका जा सकता है, क्योंकि यह शरीर में कहां लगा है, यही इसके नुकसान की गहराई और गंभीरता को तय करता है।



















