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पाली के सर्राफा बाजार में सौ साल से महक रही है रानी जलेबी की अनूठी मिठासराजस्थान
16 सित॰ 2026, 7:36 pm (8 दिन पहले)· 1

पाली के सर्राफा बाजार में सौ साल से महक रही है रानी जलेबी की अनूठी मिठास

राजस्थान के पाली में स्थित 100 साल पुरानी प्रहलाद जी की जलेबी दुकान अपने लाजवाब स्वाद और कुरकुरेपन के लिए रानी जलेबी के नाम से प्रसिद्ध है।

मारवाड़ के ऐतिहासिक क्षेत्र में खान-पान के कई खजाने छिपे हुए हैं, लेकिन पाली की व्यस्त गलियों में तैरती मीठी महक का मुकाबला शायद ही कोई कर सके। ऐतिहासिक सर्राफा बाजार में कदम रखते ही आगंतुकों का स्वागत चाशनी की एक ऐसी खुशबू से होता है, जिसे अनदेखा करना नामुमकिन है। यह खुशबू प्रहलाद जी की जलेबी की दुकान से आती है, जो सौ से भी अधिक वर्षों से लोगों का मुंह मीठा करा रही है। स्थानीय लोग इसे प्यार से रानी जलेबी भी कहते हैं। यह मिठाई अपनी पतली बनावट, गजब के करारेपन और भीतर तक भरी गर्म चाशनी के लिए दूर-दूर तक मशहूर है।

आज के इस आधुनिक दौर में जहां लोगों की पसंद और पुरानी दुकानें बहुत जल्दी बदल जाती हैं, वहीं यह ऐतिहासिक प्रतिष्ठान अपने स्वाद की निरंतरता की मिसाल पेश कर रहा है। इसके संस्थापक, जिन्हें लोग आदर से दादोसा कहकर याद करते हैं, द्वारा स्थापित की गई शुद्धता और स्वाद की परंपरा आज भी पूरी तरह बरकरार है। आज भी कढ़ाई से छनकर निकलने वाली इन सुनहरी जलेबियों का स्वाद और मिठास वैसी ही है, जिसने एक सदी पहले यहां के लोगों का दिल जीता था। यह स्वाद आज भी शहर के अतीत को उसके वर्तमान से जोड़े हुए है।

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राजस्थान का ऐतिहासिक शहर पाली अपने चमचमाते कपड़ा बाजारों, आभूषणों की दुकानों और पारंपरिक शिल्पकला के लिए देश भर में जाना जाता है। हालांकि, यहां की अनूठी खान-पान संस्कृति भी इसकी पहचान का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश के कोने-कोने से भोजन प्रेमियों को आकर्षित करती है। इस लजीज सफर के केंद्र में स्थित है सर्राफा बाजार, जो इस शहर का दिल माना जाता है। कपड़े और गहने खरीदने के लिए इस बाजार में हर समय खरीदारों की भीड़ रहती है, लेकिन इन संकरी गलियों में छनती गरमा-गरम जलेबियों की खुशबू ही यहां के माहौल को असली पहचान देती है।

ऐतिहासिक स्वाद की दुकान तक पहुंचने का रास्ता

इस ऐतिहासिक मिठाई की दुकान तक पहुंचना बेहद आसान है, भले ही कोई व्यक्ति पहली बार इस शहर में आ रहा हो। यह दुकान सर्राफा बाजार के मुख्य चौक में स्थित है। बाहर से आने वाले यात्री पाली के पुराना बस स्टैंड से सीधे सर्राफा बाजार के लिए सवारी ले सकते हैं या पैदल भी मुख्य चौक तक पहुंच सकते हैं। स्थानीय लोगों के दिलों में इस दुकान की ऐसी जगह है कि कोई भी राहगीर या दुकानदार आपको पल भर में यहां का सही रास्ता बता देगा, जिससे नए पर्यटकों को भी कोई असुविधा नहीं होती।

इसे रानी जलेबी क्यों कहते हैं?

स्थानीय समाज द्वारा इसे दिया गया रानी जलेबी का नाम इसकी खास विशेषताओं को दर्शाता है। अन्य जगहों पर मिलने वाली मोटी जलेबियों के उलट, यह जलेबी बेहद पतली और कुरकुरी होती है, जिससे यह अपने अंदर पर्याप्त मात्रा में चाशनी सोख लेती है। बड़ी लोहे की कड़ाही में सुनहरी जलेबियों को उबलते तेल में छनते देखना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है, जिसे देखने के लिए दिन भर लोगों का तांता लगा रहता है।

शुद्धता और पारंपरिक तैयारी के प्रति इस अटूट प्रतिबद्धता ने इस दुकान को हर उम्र के लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बना दिया है। सुबह की शुरुआत से लेकर देर शाम तक दुकान के बाहर ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। लोग बड़ी ही सब्र के साथ लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। इंतजार के बाद भी ग्राहकों के चेहरों पर दिखने वाली मुस्कान इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि दादोसा के हाथों से शुरू हुआ यह स्वाद आज भी पाली की सबसे अनूठी और मीठी पहचान बना हुआ है।

सवाल-जवाब

प्रहलाद जी की जलेबी दुकान कहां स्थित है?
यह दुकान राजस्थान के पाली शहर में ऐतिहासिक सर्राफा बाजार के मुख्य चौक में स्थित है।
लोग इस जलेबी को किस अन्य नाम से जानते हैं?
स्थानीय लोग इसकी पतली बनावट और बेहतरीन कुरकुरेपन के कारण इसे प्यार से 'रानी जलेबी' भी कहते हैं।
यह जलेबी की दुकान कितनी पुरानी है?
यह प्रसिद्ध दुकान सौ साल से भी अधिक पुरानी है और आज भी अपनी शुद्धता के लिए जानी जाती है।
दुकान तक पहुंचने का सबसे आसान रास्ता क्या है?
बाहरी पर्यटक पाली के पुराना बस स्टैंड से सीधे सर्राफा बाजार पहुंचकर मुख्य चौक की तरफ आ सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

एक अपराध और कानून-व्यवस्था पत्रकार के रूप में, मैं इस ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षा और व्यवस्था के नज़रिए से देखता हूँ। पाली का यह व्यस्त सर्राफा बाजार, जहाँ 'रानी जलेबी' जैसी प्रसिद्ध दुकान पर भारी भीड़ उमड़ती है, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। संकरी गलियों वाले बाजारों में आभूषणों की दुकानें और खाद्य प्रतिष्ठान एक साथ होने से जेबकटी, चोरी और आपातकालीन स्थिति में निकासी जैसी चुनौतियाँ खड़ी होती हैं। प्रशासन और स्थानीय पुलिस को ऐसे व्यस्त विरासत स्थलों पर गश्त और सीसीटीवी निगरानी पुख्ता रखनी चाहिए ताकि पर्यटकों और व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

करण की बात को आगे बढ़ाते हुए, इस ऐतिहासिक विरासत को केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सुदृढ़ प्रशासनिक नीति की भी आवश्यकता है। ऐसे पुराने बाजारों के लिए 'हेरिटेज टूरिज्म' और शहरी बुनियादी ढांचा नीति तैयार की जानी चाहिए। इन संकरी गलियों में पैदल मार्ग विकसित करने और स्वच्छता प्रबंधन को मजबूत करने से पर्यटकों को सुविधा होगी। स्थानीय प्रशासन द्वारा किया गया ऐसा बुनियादी ढांचागत सुधार इस सदी पुरानी सांस्कृतिक धरोहर को बचाए रखने और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा।

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