सुपर अल नीनो की दस्तक से भारत में भीषण गर्मी का खतरा, अगले छह महीनों में हजारों अतिरिक्त मौतों की आशंकागूगल पिक्स टूल हुआ पेश, टेक्स्ट प्रॉम्प्ट और एआई एडिटिंग से कैनवा व फोटोशॉप को मिलेगी टक्करवनडे में कैरेबियाई दबदबे का अंत, टीम इंडिया ने 142 भिड़ंतों में रचा जीत का नया इतिहासअंबाला नागरिक अस्पताल की डॉक्टर से जानिए युवाओं में बढ़ते मुंहासों के मुख्य कारण और इनके सटीक उपचारकिकविट से किंशासा जा रहा विमान केंगे में क्रैश, दो सैन्य अधिकारियों समेत 14 लोगों की दर्दनाक मौतबिना ज्यादा तेल के बनाएं गुजराती स्टाइल दूधी ना मुठिया, सेहत और स्वाद का बेहतरीन कॉम्बिनेशनपूर्णिया में जोधपुरी मसालों वाली जलेबी की धूम, हर शाम ठेले पर बिकती है 50 किलो मिठाईराजस्थान में चंदवाजी के निम्स अस्पताल में लगी भीषण आग, टोंक में खाद के लिए रात से कतारों में खड़े रहे अन्नदातासंयुक्त राष्ट्र में भारत का करारा जवाब, लादेन की याद दिलाते हुए पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को किया बेनकाबथाने से जब्त गाड़ी रेड में ले गई पुलिस, हादसे में महिला की जान जाने पर हाईकोर्ट ने डीजीपी को सौंपी जांच
पाली के सोजत में पानी के टांके में गिरा दुर्लभ पैंगोलिन, सुरक्षित रेस्क्यू कर वन विभाग को सौंपा गयाराजस्थान
21 सित॰ 2026, 6:24 am (5 दिन पहले)· 0

पाली के सोजत में पानी के टांके में गिरा दुर्लभ पैंगोलिन, सुरक्षित रेस्क्यू कर वन विभाग को सौंपा गया

पाली जिले के सोजत में पानी के टांके में फंसे विलुप्तप्राय पैंगोलिन को सूझबूझ से सुरक्षित निकाला गया। पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाने वाले इस दुर्लभ जीव को वापस प्राकृतिक आवास में भेजने की तैयारी है।

राजस्थान के पाली जिले में सोजत कस्बे की एक रिहायशी कॉलोनी में उस समय अफरातफरी मच गई जब स्थानीय निवासियों ने पानी के भूमिगत टांके में एक अजीबोगरीब जीव को फंसा हुआ देखा। नजदीक जाकर देखने पर पता चला कि यह विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुका अत्यंत दुर्लभ पैंगोलिन है, जिसे मारवाड़ की स्थानीय बोली में चींटीखोर के नाम से जाना जाता है। आवासीय इलाके में बने पानी के टैंक में इस संकोची वन्यजीव के गिरने की खबर फैलते ही आसपास के लोगों का भारी जमावड़ा लग गया। हालात की नजाकत को समझते हुए लोगों ने तुरंत वन्यजीव बचाव दल और स्नेक कैचर अजय कुमार को मौके पर बुलाया।

सोजत के टांके से सतर्कतापूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन

सूचना मिलते ही स्नेक कैचर अजय कुमार बिना किसी देरी के घटनास्थल पर पहुंचे। टांके की गहराई और उसमें गिरे वन्यजीव की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए रेस्क्यू अभियान बेहद सावधानी से शुरू किया गया। काफी देर चली मशक्कत के बाद अजय कुमार ने अपनी तकनीकी दक्षता और सतर्कता का परिचय देते हुए इस मूक बेजुबान को बिना किसी चोट या नुकसान के सुरक्षित बाहर निकाल लिया। टांके से बाहर आने के बाद यह दुर्लभ स्तनपायी पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। स्थानीय स्तर पर सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया पूरी होते ही वन विभाग के अधिकारियों को मौके पर सूचित किया गया और इस अनमोल जीव को उनके सुपुर्द कर दिया गया, ताकि चिकित्सीय मुआयने के बाद इसे इसके प्राकृतिक जंगलों में छोड़ा जा सके।

ये भी पढ़ें

बिना दांतों वाला अनोखा स्तनपायी: मारवाड़ का चींटीखोर

पैंगोलिन शारीरिक बनावट और आदतों के मामले में प्रकृति की सबसे अनोखी कृतियों में गिना जाता है। सामान्य तौर पर वयस्क पैंगोलिन की शारीरिक लंबाई लगभग 2 फीट होती है और इसका कुल वजन 8 से 10 किलोग्राम के बीच रहता है। इसकी समूची पीठ और बाहरी शरीर बेहद सख्त, नुकीले शल्कों से ढका होता है, जो किसी भी शिकारी जानवर के हमले के वक्त ढाल का काम करते हैं। इस जीव की सबसे हैरान करने वाली जैविक विशेषता यह है कि इसके मुंह में एक भी दांत नहीं होता है। भोजन ग्रहण करने के लिए कुदरत ने इसे लगभग 40 सेंटीमीटर लंबी, पतली और चिपचिपी जीभ प्रदान की है। यह जीभ इतनी विलक्षण होती है कि इसकी लंबाई इसके समूचे शरीर की लंबाई से लगभग दोगुनी तक पहुंच जाती है। इसी विशेष जीभ के सहारे यह दीमक और चींटियों के 40 सेंटीमीटर तक गहरे भूमिगत बिलों में सीधे प्रवेश कर कीटों को अपना आहार बनाता है।

पर्यावरण और उपजाऊ मिट्टी का मूक रक्षक

पारिस्थितिकी तंत्र के संदर्भ में पैंगोलिन को जंगलों और खेतों का खामोश रक्षक माना जाता है। अपनी खुराक के लिए यह रोजाना भारी तादाद में चींटियों और दीमकों को चट कर जाता है। दीमक का यह प्राकृतिक नियंत्रण फसलों, पेड़-पौधों और हरित आवरण को समय से पहले नष्ट होने से बचाता है। इसके अलावा जमीन की गहराई में दीमक के बिलों को कुरेदने और उन्हें नष्ट करने से भूमि की प्राकृतिक उपजाऊ शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इस सतत प्रक्रिया से मिट्टी के भीतर हवा का आवागमन बेहतर होता है और जमीन में स्वाभाविक वातन बना रहता है, जिसके कारण पर्यावरणविद इसे इकोसिस्टम का साइलेंट वर्कर भी कहते हैं।

जवाई के बाद पाली में दूसरी दुर्लभ मौजूदगी

भारत भर में पैंगोलिन की आबादी तेजी से घटती जा रही है और पूरे देश में इस समय इनकी कुल अनुमानित संख्या मात्र 6000 के आसपास सिमट कर रह गई है। गंभीर संकट का सामना कर रही इस प्रजाति का मारवाड़ क्षेत्र के सूखे धरातल पर दिखाई देना वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक सुखद संकेत है। इससे पहले पाली जिले के विख्यात जवाई क्षेत्र में करीब दो साल पूर्व एक पैंगोलिन की उपस्थिति दर्ज की गई थी। अब सोजत शहर में टांके से इसका सुरक्षित निकलना इस बात की तस्दीक करता है कि इलाके में जैव विविधता अभी भी सांस ले रही है, जिसे बचाने के लिए सघन सामुदायिक जागरूकता बेहद जरूरी है।

सवाल-जवाब

सोजत में पानी के टांके में कौन सा जीव फंसा मिला था?
सोजत शहर की एक कॉलोनी के पानी के टांके में दुर्लभ पैंगोलिन फंसा हुआ मिला था, जिसे स्थानीय बोली में मारवाड़ का चींटीखोर कहा जाता है।
इस जीव को टांके से बाहर किसने और कैसे निकाला?
स्नेक कैचर अजय कुमार ने सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत और सूझबूझ के साथ इस जीव को बिना चोट पहुंचाए सुरक्षित बाहर निकाला।
पैंगोलिन का शारीरिक आकार और वजन कितना होता है?
वयस्क पैंगोलिन की लंबाई करीब 2 फीट होती है और इसका शारीरिक वजन लगभग 8 से 10 किलोग्राम के बीच रहता है।
पैंगोलिन के मुंह और जीभ की क्या अनोखी विशेषता होती है?
पैंगोलिन के मुंह में दांत नहीं होते हैं और इसकी जीभ लगभग 40 सेंटीमीटर लंबी होती है, जो शरीर की लंबाई से करीब दोगुनी मानी जाती है।
यह जीव पर्यावरण और मिट्टी को किस प्रकार लाभ पहुंचाता है?
यह भारी संख्या में दीमक और चींटियों को खाकर फसलों को बचाता है तथा जमीन में बिल खोदने से मिट्टी का प्राकृतिक वातन कर उसकी उपजाऊ शक्ति बढ़ाता है।
भारत में वर्तमान में पैंगोलिन की अनुमानित संख्या कितनी बची है?
देशभर में पैंगोलिन अब एक अत्यंत दुर्लभ प्रजाति बन चुका है और भारत में इसकी संख्या महज 6000 के करीब ही बची है।
पाली जिले में इससे पहले पैंगोलिन कब और कहां देखा गया था?
पाली जिले में करीब दो साल पहले जवाई क्षेत्र के अंतर्गत एक पैंगोलिन को देखा गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·5 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि किस तरह मानव बस्तियों का विस्तार वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को प्रभावित कर रहा है। पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पैंगोलिन जैसे संकटग्रस्त जीवों के लिए आवासीय क्षेत्रों में ऐसे खुले जलस्रोत गंभीर खतरा बन सकते हैं। स्थानीय स्तर पर हुआ त्वरित बचाव कार्य सराहनीय है, लेकिन वन्यजीव संरक्षण के दीर्घकालिक उपायों के तहत ऐसे खुले टैंकों को सुरक्षित रूप से ढकना अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

पाली के सोजत में पैंगोलिन का मिलना यह रेखांकित करता है कि कृषि और आवासीय विस्तार से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहे हैं। अवैध वन्यजीव व्यापार में दुनिया के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले इस स्तनपायी के संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर इस तरह की त्वरित और संवेदनशील बचाव प्रतिक्रियाएं बेहद आवश्यक हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि वन्यजीवों के संरक्षण में स्थानीय स्तर पर नागरिकों और बचाव दलों की भूमिका कितनी अहम है। हालांकि, इंसानी बस्तियों में ऐसे दुर्लभ जीवों का बार-बार आना गंभीर नीतिगत सवाल खड़े करता है। भूमि उपयोग के बदलते स्वरूप और अनियंत्रित विस्तार के कारण वन्यजीव गलियारे प्रभावित हो रहे हैं। इसके लिए वन और ग्रामीण विकास विभागों को संयुक्त रूप से दीर्घकालिक रणनीतिक उपाय करने होंगे ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके और ऐसे संकटग्रस्त जीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

यह घटना आवासीय बस्तियों में वन्यजीवों की बढ़ती घुसपैठ और उनके प्राकृतिक आवासों के लगातार सिमटते दायरे को उजागर करती है। पैंगोलिन जैसे अति संवेदनशील और तस्करी के लिहाज से संवेदनशील जीव का रिहायशी इलाके में मिलना गंभीर चिंता का विषय है। वन विभाग को केवल पुनर्वास तक सीमित न रहकर इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि क्या यह इलाका वन्यजीव गलियारे के दायरे में आता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह रेखांकित करना आवश्यक है कि पैंगोलिन दुनिया भर में सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले स्तनधारियों में शुमार है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके शल्कों और मांस की अवैध मांग के कारण यह गंभीर खतरे में है। आवासीय इलाके में इसका मिलना इस बात की ओर भी संकेत करता है कि वन्यजीवों पर केवल मानवीय बस्तियों के विस्तार का ही संकट नहीं है, बल्कि अवैध वन्यजीव व्यापार के सिंडिकेट भी सक्रिय हो सकते हैं। वन विभाग और पुलिस को त्वरित रेस्क्यू के बाद इस एंगल से भी जांच करनी चाहिए कि क्या इस दुर्लभ जीव को पकड़ने या तस्करी की किसी साजिश के तहत यहां लाया गया था।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp