राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में सरकारी भूमि से जुड़े दो दशक पुराने फर्जी पट्टा मामले में निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चार दिनों की पुलिस रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद अपराध जांच विभाग की अपराध शाखा (सीआईडी-सीबी) ने उन्हें शुक्रवार को अदालत में पेश किया। जांच एजेंसी ने पूछताछ का दायरा बढ़ाने के लिए अदालत से अतिरिक्त रिमांड की मांग की थी, लेकिन हनुमानगढ़ की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने इस अर्जी को खारिज करते हुए विधायक को सीधे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दे दिया।
चार दिन की रिमांड पूरी होने के बाद कानूनी प्रक्रिया
फर्जी पट्टा मामले में सीआईडी-सीबी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद गणेशराज बंसल को चार दिनों के लिए पुलिस हिरासत में सौंपा गया था। रिमांड अवधि पूरी होने के उपरांत शुक्रवार की सुबह जांच दल उन्हें लेकर कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने निकला। अदालत में पेशी की कड़ी में सुबह करीब छह बजे उन्हें संगरिया की एमजेएम अदालत ले जाया गया था। वहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद जांच दल विधायक को कुछ समय के लिए संगरिया थाने लेकर पहुंचा। इसके पश्चात उन्हें हनुमानगढ़ की सीजेएम अदालत में प्रस्तुत किया गया, जहां एजेंसी की आगे की रिमांड अर्जी नामंजूर हो गई और उन्हें जेल का रास्ता देखना पड़ा।
सीआईडी-सीबी की अतिरिक्त हिरासत की अर्जी नामंजूर
सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी सीआईडी-सीबी ने तर्क दिया कि मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए विधायक से और पूछताछ की दरकार है। इसी आधार पर रिमांड अवधि में विस्तार की गुहार लगाई गई। हालांकि अदालत ने जांच पक्ष की दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और आगे की पुलिस हिरासत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत के इस निर्णय के साथ ही चार दिनों तक चली पुलिस पूछताछ का दौर खत्म हो गया और अब विधायक को न्यायिक अभिरक्षा में रहना होगा। दूसरी तरफ, जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि प्रकरण में कानूनी अनुसंधान का कार्य निरंतर जारी रहेगा।
साल 2003 के फर्जी पट्टा प्रकरण की पृष्ठभूमि
यह पूरा कानूनी विवाद वर्ष 2003 का है, जो करीब तेईस साल पुराना बताया जा रहा है। मामले के मुख्य आरोपों के अनुसार सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से पट्टे जारी किए गए और प्रशासनिक नियमों की अनदेखी कर गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। इस पुराने प्रकरण की विस्तृत छानबीन सीआईडी-सीबी को सौंपी गई थी। जांच के दौरान विधायक गणेशराज बंसल की संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें हिरासत में लिया गया था। इस प्रकरण में केवल विधायक ही नामजद नहीं हैं, बल्कि उनकी पत्नी संतोष बंसल सहित कई अन्य व्यक्तियों के नाम भी जांच के दायरे में शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार पूरे मामले में किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही है, इसका अंतिम निर्धारण जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव हो सकेगा।
नगर परिषद सभापति चुनाव और स्थानीय सियासी समीकरण
गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी की समयावधि ने स्थानीय राजनीति में भारी हलचल पैदा कर दी थी, क्योंकि यह कार्रवाई ठीक उस वक्त हुई जब हनुमानगढ़ नगर परिषद के सभापति पद का चुनाव होना तय था। नगर परिषद के सियासी ढांचे में विधायक समर्थित निर्दलीय पार्षदों का दबदबा बेहद मजबूत माना जा रहा था। कुल 60 वार्डों वाले नगर निकाय में विधायक समर्थक 34 निर्दलीय पार्षदों ने जीत दर्ज की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी के 15 और कांग्रेस पार्टी के 10 पार्षद जीतकर आए थे।
इतने बड़े बहुमत के बीच सभापति चुनाव की दहलीज पर विधायक की गिरफ्तारी से स्थानीय स्तर पर सियासी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे। उस दौरान विधायक समर्थकों ने विरोध दर्ज कराते हुए प्रदर्शन भी किया था। अब अदालत द्वारा उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के फैसले के बाद क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चाएं गरमा गई हैं। फिलहाल गणेशराज बंसल जेल में रहेंगे और जांच एजेंसी दस्तावेजों तथा तथ्यों के आधार पर अपनी आगामी कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाएगी।
























