संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा दिए गए वक्तव्य पर भारत ने अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। महासभा में जवाब देने के अपने अधिकार यानी राइट टू रिप्लाई का प्रयोग करते हुए भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पड़ोसी मुल्क की कथनी और करनी के अंतर को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेताया कि किसी असत्य को बार-बार दोहराने मात्र से वह कभी सच्चाई में तब्दील नहीं हो सकता।
आतंकवाद की पनाहगाह होने का प्रमाण
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान के आतंक समर्थक इतिहास का उल्लेख करते हुए दुनिया को 9/11 हमलों के मुख्य षड्यंत्रकारी ओसामा बिन लादेन की याद दिलाई। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर कुख्यात आतंकी सरगना लादेन पाकिस्तान के भीतर एबटाबाद में सुरक्षित छिपा बैठा मिला था। भारत ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान को आतंकी संगठनों को मिलने वाला खुला संरक्षण अब पूरी तरह बंद करना चाहिए। इसके साथ ही उसे अपनी भूमि से संचालित होने वाले हर प्रकार के आतंकी ढांचों और गतिविधियों पर निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर पर दो टूक संदेश
पाकिस्तानी नेतृत्व द्वारा मंच से जम्मू-कश्मीर का प्रलाप दोहराए जाने पर पेटल गहलोत ने दो टूक कहा कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बना रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के अधिकारों और वहां के गंभीर हालातों की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा। उन्होंने दो टूक संदेश दिया कि अगर सीमा पार से आतंकी साजिशें बदस्तूर जारी रहीं, तो भारत अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और आत्मरक्षा के पूर्ण अधिकार का प्रयोग करेगा। छल, कपट और दोमुंहा व्यवहार न तो पाकिस्तान के अपने भविष्य के अनुकूल है और न ही दुनिया के हित में है।



















