चेहरे पर कभी-कभार एक या दो पिंपल्स का नजर आना बेहद सामान्य माना जाता है, लेकिन जब मुंहासे बार-बार निकलने लगें और ठीक होने का नाम न लें, तो इसे केवल एक साधारण त्वचा रोग मानकर अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। आज के समय में बहुत से लड़के और लड़कियां कम उम्र में ही इस समस्या से गंभीर रूप से परेशान हो जाते हैं। असल में, ये जिद्दी मुंहासे त्वचा की बाहरी परत पर दिखाई देने वाली एक ऐसी समस्या हैं, जिसका सीधा जुड़ाव हमारे शरीर के भीतर होने वाले बदलावों, मानसिक तनाव, खराब जीवनशैली और अनुचित खान-पान से हो सकता है। युवाओं को इस बात को समझना बेहद जरूरी है कि केवल बाहरी सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल से इसका स्थायी समाधान संभव नहीं है।
चेहरे के अलग-अलग हिस्सों पर पिंपल्स निकलने का क्या है मतलब?
हमारे चेहरे के अलग-अलग हिस्सों पर होने वाले मुंहासे शरीर के आंतरिक स्वास्थ्य के बारे में कई संकेत देते हैं। उदाहरण के लिए, जब पिंपल्स बार-बार ठुड्डी और जॉलाइन यानी जबड़े के आसपास निकलते हैं, तो इसका मुख्य कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म यानी पीरियड्स के दिनों के आसपास हार्मोन्स के स्तर में उतार-चढ़ाव आने से अक्सर यह समस्या काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा, जो लोग अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजरते हैं या जिनकी नींद पूरी नहीं हो पाती है, उनके शरीर में तेल ग्रंथियां ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं। इससे त्वचा में ऑयल यानी तेल का उत्पादन बहुत बढ़ जाता है, जो अंततः ठुड्डी और जॉलाइन पर दर्दनाक पिंपल्स का रूप ले लेता है।
इसके विपरीत, यदि मुंहासे लगातार माथे और नाक के आसपास यानी टी-ज़ोन में दिखाई दे रहे हैं, तो इसके पीछे के कारण कुछ अलग हो सकते हैं। इस क्षेत्र में त्वचा स्वभाव से अधिक ऑयली होती है। अत्यधिक पसीना आना, धूल-मिट्टी का जमा होना, तनाव और त्वचा के अनुकूल न होने वाले स्किन केयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल इस समस्या को और गंभीर बना देता है। इसके साथ ही, हमारी रोजमर्रा की डाइट भी इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार होती है। जो लोग बहुत अधिक तली-भुनी चीजें, जंक फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, उनकी त्वचा पर इसके दुष्प्रभाव माथे और नाक पर पिंपल्स के रूप में साफ नजर आने लगते हैं।
चेहरे की सूजन और डार्क सर्कल का बड़ी बीमारियों से संबंध
आजकल इंटरनेट के दौर में लोग अपने लक्षणों को देखकर खुद ही गंभीर बीमारियों का अंदाजा लगाने लगते हैं। कई बार जब चेहरे पर मुंहासों के साथ-साथ आंखों के नीचे काले घेरे यानी डार्क सर्कल या चेहरे पर थोड़ी सूजन दिखाई देती है, तो लोग घबरा जाते हैं। वे इसे सीधे तौर पर किडनी या लिवर की गंभीर बीमारी से जोड़ने लगते हैं। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चेहरे पर दिखने वाले इन सामान्य लक्षणों के आधार पर किसी भी गंभीर बीमारी का निष्कर्ष निकालना पूरी तरह से गलत है। नींद की कमी, थकान या शरीर में पानी की कमी के कारण भी डार्क सर्कल और चेहरे पर सूजन आ सकती है।
अगर किसी व्यक्ति को वास्तव में किडनी या लिवर से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी है, तो उसके शरीर में केवल चेहरे पर ही बदलाव नहीं दिखेंगे। इसके साथ शरीर के अन्य हिस्सों में भी असामान्य सूजन, पेशाब के रंग या आवृत्ति में बदलाव, लगातार महसूस होने वाली शारीरिक कमजोरी और अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देंगे। जब तक ऐसे लक्षण स्पष्ट रूप से न दिखें, तब तक घबराने की आवश्यकता नहीं होती है। फिर भी, यदि इस तरह की जटिलताएं एक साथ दिखाई दें, तो बिना समय गंवाए किसी योग्य डॉक्टर से मिलकर पूरी जांच करानी चाहिए।
पिंपल्स को दबाने या फोड़ने की आदत कितनी नुकसानदेह?
चेहरे पर जब भी कोई पिंपल निकलता है, तो अक्सर लोग उसे अपने हाथों से दबाने, नोचने या फोड़ने की कोशिश करने लगते हैं। यह आदत त्वचा के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, मुंहासों को बार-बार छूने या दबाने से त्वचा के भीतर मौजूद बैक्टीरिया और गंदगी और गहराई में चले जाते हैं। इससे उस हिस्से में सूजन काफी ज्यादा बढ़ जाती है। बाद में, जब वह पिंपल ठीक भी हो जाता है, तब भी चेहरे पर गहरे काले दाग-धब्बे और गड्ढे छोड़ जाता है, जिन्हें हटाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
इंटरनेट के घरेलू नुस्खों और स्व-उपचार से बचें
सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो को देखकर खुद ही डॉक्टर बन जाना और चेहरे पर तरह-तरह के घरेलू उपाय आजमाना त्वचा को हमेशा के लिए खराब कर सकता है। अक्सर लोग इंटरनेट पर देखकर मुंहासों को सुखाने के लिए चेहरे पर खाने वाले चूने जैसी चीजों का लेप लगा लेते हैं। चेहरे की नाजुक त्वचा पर चूने जैसी अत्यधिक क्षारीय चीजों का इस्तेमाल करने से त्वचा बुरी तरह जल सकती है, जिससे चेहरे पर परमानेंट केमिकल बर्न के निशान बन सकते हैं। इसलिए, किसी भी अनवेरीफाइड नुस्खे को चेहरे पर लगाने से पूरी तरह बचना चाहिए।
खान-पान में बदलाव करना क्यों है जरूरी?
मुंहासों से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिए अपने खान-पान में सुधार करना पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में AYUSH विभाग के अंतर्गत कार्यरत होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि आजकल किशोरियों और युवा लड़कों में मुंहासों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसका एक बड़ा कारण हार्मोनल बदलाव तो है ही, लेकिन साथ ही हमारी बिगड़ती जीवनशैली और गलत खान-पान भी इसके लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं।
डॉ. रजिता ने सलाह दी है कि पिंपल्स की समस्या से निपटने के लिए युवाओं को अपनी डाइट से पूरी तरह से तली-भुनी चीजों, समोसे, कचौड़ी और जंक फूड को बाहर कर देना चाहिए। इसके अलावा, पैकेट में मिलने वाली चीजों और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन भी कम से कम करना चाहिए। इसकी जगह अपनी दैनिक डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे सलाद और मौसमी फलों को प्रचुर मात्रा में शामिल करना चाहिए। शरीर में पानी की कमी न होने दें और दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, ताकि शरीर के हानिकारक टॉक्सिन्स आसानी से बाहर निकल सकें।
होम्योपैथी में मुंहासों का इलाज और प्रमुख दवाएं
चूंकि हर इंसान का शरीर और उसकी समस्याएं अलग होती हैं, इसलिए होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में सभी मरीजों का इलाज एक जैसा नहीं होता। होम्योपैथी में व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक लक्षणों का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही दवा का चयन किया जाता है। डॉक्टर की देखरेख में कुछ प्रमुख होम्योपैथिक दवाओं का उपयोग इस समस्या में बेहद असरदार साबित होता है।
त्वचा को साफ करने और मुंहासों के बाद चेहरे पर रह गए काले दाग-धब्बों को हल्का करने के लिए बरबेरिस एक्विफोलियम का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह, यदि त्वचा पर खुजली, जलन या पुरानी त्वचा संबंधी समस्याएं हैं, तो सल्फर दवा का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, चेहरे, पीठ और कंधों पर होने वाले गहरे और पस वाले मुंहासों के इलाज के लिए काली ब्रोमेटम दवा बहुत उपयोगी मानी जाती है। डॉ. रजिता का कहना है कि इन दवाओं का सेवन कभी भी अपनी मर्जी से नहीं करना चाहिए, बल्कि हमेशा किसी रजिस्टर्ड होम्योपैथिक डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद ही इनका उपयोग शुरू करना चाहिए।
अंबाला नागरिक अस्पताल में निशुल्क चिकित्सा की सुविधा
अंबाला और उसके आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण और किफायती इलाज की बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है। अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में AYUSH सेवाओं का लाभ उठाने के लिए मरीजों को केवल 5 रुपये की एक मामूली ओपीडी पर्ची बनवानी होती है। इसके बाद अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों द्वारा मरीजों की जांच की जाती है और उन्हें आवश्यक होम्योपैथिक उपचार के साथ-साथ सभी उपलब्ध दवाएं बिल्कुल मुफ्त प्रदान की जाती हैं। यदि मुंहासों की समस्या लगातार बनी हुई है या बहुत गंभीर रूप ले चुकी है, तो बिना देरी किए अस्पताल में जाकर योग्य चिकित्सकों से सलाह लेना ही सबसे सही और सुरक्षित उपाय है।



















