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पाली में गहराया जल संकट, जूना मालारी बांध सूखा और वन्यजीवों पर मंडराया खतराराजस्थान
31 अग॰ 2026, 6:48 am (25 दिन पहले)· 2

पाली में गहराया जल संकट, जूना मालारी बांध सूखा और वन्यजीवों पर मंडराया खतरा

पाली जिले के गोडवाड़ अंचल और देसूरी क्षेत्र में कम बारिश के कारण जूना मालारी बांध पूरी तरह सूख चुका है। इससे पेयजल संकट गहराने के साथ-साथ कुंभलगढ़ अभयारण्य के वन्यजीवों के गांवों की ओर रुख करने का खतरा बढ़ गया है।

सावन का महीना बीत चुका है लेकिन पाली जिले के गोडवाड़ अंचल में इस बार मानसून की बेरुखी ने स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में हुई भारी बारिश की कमी के कारण अब कृषि कार्यों, पेयजल आपूर्ति और कुंभलगढ़ अभयारण्य के वन्यजीवों के सामने एक विकट स्थिति पैदा हो गई है। गोडवाड़ अंचल में इस बार मानसून सीजन के दौरान बारिश का आंकड़ा काफी कम दर्ज किया गया है, जिसके चलते प्राकृतिक जलस्रोतों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है और भविष्य को लेकर आशंकाएं गहराने लगी हैं।

देसूरी और गोडवाड़ अंचल में बारिश की स्थिति

क्षेत्रीय आंकड़ों पर नजर डालें तो देसूरी क्षेत्र में अब तक लगभग 277 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि पूरे गोडवाड़ अंचल में यह आंकड़ा 277 से 295 मिलीमीटर के बीच ही सिमट कर रह गया है। इतनी कम मानसूनी गतिविधि के कारण स्थानीय नदी-नालों में पानी की पर्याप्त आवक नहीं हो पाई है। इसके परिणामस्वरूप, क्षेत्र के तमाम बांधों और प्राकृतिक जलस्रोतों का जलस्तर तेजी से नीचे गिरता जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति के और अधिक गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

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जूना मालारी बांध सूखा और पेयजल का संकट

इस जल संकट का सबसे बड़ा उदाहरण उपखंड का जूना मालारी बांध है, जो अब पूरी तरह सूख चुका है। इसके अलावा कई अन्य छोटे प्राकृतिक जलस्रोत भी सूखने के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं और कुछ स्थानों पर तो पानी जमीन की सतह तक भी नहीं पहुंच पा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि पिछले साल के बचे हुए जल भंडार का बेहद सावधानीपूर्वक और संयमित उपयोग किया जाए, तो आगामी जनवरी या फरवरी महीने तक ही पेयजल की आपूर्ति संभव हो पाएगी। इसके बाद आने वाली गर्मियों के मौसम में भयंकर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

कुंभलगढ़ अभयारण्य में वन्यजीवों की मुश्किलें

बारिश की भारी कमी का सीधा असर कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सादड़ी और देसूरी रेंज पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। अभयारण्य के भीतर बने प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों प्रकार के वाटरहोल में पानी का स्तर लगातार कम होता जा रहा है और कई महत्वपूर्ण जलस्रोत सूख चुके हैं। ऐसी स्थिति में वन्यजीवों के सामने अपनी प्यास बुझाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। भीषण गर्मी के इस दौर में और कम बारिश के बीच वन विभाग के सामने अभयारण्य के भीतर रहने वाले सभी वन्यजीवों के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था करना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।

मानव और वन्यजीव संघर्ष का बढ़ता खतरा

जंगल में पानी और प्राकृतिक जलस्रोतों की इस भारी कमी के कारण अब वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों और बस्तियों की तरफ आने का जोखिम काफी बढ़ गया है। पानी और भोजन की तलाश में जंगली जानवर अपने प्राकृतिक आवास को छोड़कर बाहर निकल सकते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ने की पूरी आशंका है। मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ता यह संघर्ष एक तरफ जहां स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए खतरा है, वहीं दूसरी तरफ यह वन्यजीवों के संरक्षण के रास्ते में भी एक गंभीर बाधा बनकर सामने आ रहा है। विशेषज्ञ इस पूरी स्थिति को एक बड़े खतरे की आहट मान रहे हैं।

सवाल-जवाब

पाली जिले के गोडवाड़ अंचल में इस बार कितनी बारिश दर्ज की गई है?
गोडवाड़ अंचल में इस सीजन में औसतन 277 से 295 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
देसूरी क्षेत्र में इस साल बारिश का आंकड़ा कितना रहा है?
देसूरी क्षेत्र में इस मानसूनी सीजन में लगभग 277 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
कौन सा प्रमुख बांध पूरी तरह सूख चुका है?
उपखंड का जूना मालारी बांध पूरी तरह से सूख चुका है।
बचा हुआ पानी कब तक पेयजल आपूर्ति के लिए चल सकता है?
जानकारों के अनुसार, यदि सावधानी बरती जाए तो पिछले साल का बचा पानी जनवरी या फरवरी तक चल सकता है।
किस वन्यजीव अभयारण्य के जलस्रोतों पर संकट आया है?
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सादड़ी और देसूरी रेंज के जलस्रोतों पर संकट गहराया है।
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