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पानीपत में खुले नाले में समाने से बाल-बाल बची मासूम, सतर्क राहगीरों ने तुरंत बाहर खींच बचाई जानहरियाणा
16 अक्तू॰ 2026, 4:41 pm (21 दिन पहले)· 1

पानीपत में खुले नाले में समाने से बाल-बाल बची मासूम, सतर्क राहगीरों ने तुरंत बाहर खींच बचाई जान

पानीपत के वार्ड तीन में देवी मंदिर के पास खुले नाले में गिरी एक बच्ची को स्थानीय लोगों ने तुरंत बाहर निकाल लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस इलाके में पहले भी महिला और बाइक सवार गिर चुके हैं, जिसके बाद नगर निगम ने अधिकारियों पर कार्रवाई और निर्माण एजेंसी पर जुर्माना लगाया था।

हरियाणा के पानीपत शहर में बुनियादी नागरिक सुरक्षा से जुड़ी भारी लापरवाही का एक और खौफनाक मामला सामने आया है। वार्ड नंबर तीन के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध देवी मंदिर के निकटवर्ती इलाके में एक मासूम बच्ची अचानक बिना ढके खुले नाले में जा गिरी और डूबने लगी। गनीमत रही कि जिस वक्त यह अनहोनी हुई, उस समय आसपास कई स्थानीय लोग और राहगीर मौजूद थे। उन्होंने बिना एक पल गंवाए फुर्ती दिखाई और बच्ची को तुरंत नाले से बाहर खींच लिया। यदि लोगों की नजर पड़ने में कुछ पलों की भी देरी हो जाती, तो इस लापरवाही की कीमत मासूम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती थी। इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में दर्ज हो गई, जिसके सार्वजनिक होने के बाद से स्थानीय नागरिकों में नगर निगम की लचर कार्यशैली को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर और स्थानीय लोगों का साहसिक प्रयास

घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे में दर्ज हुए फुटेज से साफ पता चलता है कि बच्ची सामान्य रूप से वहां से गुजर रही थी कि अचानक पैर फिसलने अथवा नाले की परिधि पर कोई सुरक्षा घेरा न होने के चलते वह गहरे गंदे पानी में समा गई। आसपास खड़े लोगों ने जैसे ही छपाक की आवाज सुनी और बच्ची को नाले में डूबते देखा, वे तुरंत उसकी जान बचाने के लिए नाले की तरफ दौड़ पड़े। नागरिकों ने तत्परता दिखाते हुए झुककर बच्ची को सुरक्षित खींच लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि नाले की गहराई और उसमें बह रहे गंदे पानी के तेज बहाव को देखते हुए यह बचाव कार्य बेहद नाजुक था। समय रहते लोगों द्वारा उठाए गए इस कदम ने बच्ची के परिवार को कभी न भूलने वाले सदमे से बचा लिया। हालांकि अभी तक बच्ची की सटीक उम्र, हादसे का पक्का समय अथवा घटना के बाद उसे चिकित्सीय सहायता के लिए किसी अस्पताल ले जाया गया या नहीं, इस संबंध में आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन इस वाकये ने इलाके में बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर अभिभावक के मन में डर पैदा कर दिया है।

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अगस्त महीने में इसी नाले का शिकार बनी थी एक महिला

पानीपत के इसी क्षेत्र में खुले नालों के कारण जान जोखिम में पड़ने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व अगस्त के महीने में भी इसी नाले में एक महिला के गिर जाने की दर्दनाक घटना पेश आई थी। उस समय भी महिला सड़क किनारे चलते हुए अचानक खुले नाले के अंदर गिर गई थी, जिसका वीडियो भी निगरानी कैमरे में रिकॉर्ड हुआ था। उस दौरान आसपास मौजूद दुकानदारों और राहगीरों ने एकजुट होकर भारी मशक्कत के बाद महिला को नाले से बाहर निकाला था और उसकी जान बचाई थी। उस हादसे के तुरंत बाद स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने नगर निगम के प्रति तीखा रोष व्यक्त किया था। लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि इलाके में सड़क और सीवर लाइन बिछाने का निर्माण कार्य काफी समय से अधूरा पड़ा है। नालों की गहराई अत्यधिक है और खुदाई वाले खुले गड्ढों के चारों ओर न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग की गई है और न ही रोशनी या चेतावनी के पर्याप्त बंदोबस्त किए गए हैं। लेकिन उस गंभीर चेतावनी के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं आया।

सितंबर में सचदेवा गार्डन के सामने गड्ढे में जा गिरे थे बाइक सवार

लापरवाही की यह श्रृंखला केवल नाले तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसी इलाके में अधूरे निर्माण कार्यों के चलते सड़क पर बने गहरे गड्ढे भी राहगीरों के लिए जानलेवा जाल साबित होते रहे हैं। सितंबर की शुरुआत में सचदेवा गार्डन के ठीक सामने एक ऐसा ही भीषण हादसा हुआ था, जहां सड़क के बीचों-बीच खुले पड़े गड्ढे में अनियंत्रित होकर बाइक सवार गिर पड़े थे। इस हादसे का भी सीसीटीवी वीडियो सामने आया था, जिसमें दोपहिया वाहन चालकों को अचानक बने गड्ढे के कारण दुर्घटनाग्रस्त होते देखा गया था। इसके कुछ ही समय बाद इसी क्षेत्र में एक अन्य युवक के भी खुले सीवर मैनहोल अथवा गहरे गड्ढे में गिर जाने की घटना सामने आई थी। लगातार अंतराल पर एक ही इलाके में महिलाओं, दोपहिया चालकों, युवाओं और अब एक अबोध बच्ची के साथ हुए इन हादसों ने साबित कर दिया है कि नगर निगम की देखरेख में चल रहे अधूरे विकास कार्य और असुरक्षित ढांचे आम नागरिकों की दैनिक आवाजाही के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई: जेई निलंबित, वरिष्ठ अफसरों पर आरोपपत्र और निर्माण एजेंसी पर जुर्माना

अगस्त और सितंबर में महिला तथा बाइक सवारों के साथ हुई दुर्घटनाओं के बाद नगर निगम प्रशासन पर जनदबाव काफी बढ़ गया था, जिसके चलते कागजों पर कड़ी कार्रवाई भी की गई थी। निगम आयुक्त डॉ. पंकज राव ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए प्राथमिक जिम्मेदारी तय की थी और कनिष्ठ अभियंता (जेई) जतिन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही उच्च स्तर पर पर्यवेक्षण में लापरवाही बरतने के आरोप में उप-मंडल अधिकारी (एसडीओ) योगेश तोमर और कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) सुमित नांदल के खिलाफ बाकायदा आरोपपत्र जारी करते हुए विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी। केवल अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि स्थल पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाली संबंधित निर्माण एजेंसी पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए 10 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाने के आदेश पारित किए गए थे। इतना ही नहीं, एजेंसी को काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डालने की प्रक्रिया भी शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। परंतु सबसे बड़ा और ज्वलंत प्रश्न यह है कि इतनी सख्त प्रशासनिक कार्रवाइयों, निलंबन और लाखों के जुर्माने के बावजूद धरातल पर सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं सुधरे, जिससे एक बच्ची दोबारा उसी खतरे की चपेट में आ गई।

नागरिक सुरक्षा के स्थायी समाधान की दरकार

देवी मंदिर के पास हुए इस ताजा हादसे ने एक बार फिर यह कड़वी हकीकत उजागर कर दी है कि प्रशासनिक अमला अमूमन हादसा होने के बाद ही हरकत में आता है, जबकि हादसों को रोकने के लिए पूर्व में किए जाने वाले स्थायी सुरक्षा उपाय नदारद रहते हैं। क्या शहर के बाशिंदों की जिंदगी हमेशा केवल मौके पर मौजूद राहगीरों की सतर्कता और किस्मत के भरोसे ही रहेगी? केवल कागजों पर अधिकारियों को आरोपपत्र थमाना या ठेकेदार पर जुर्माना लगा देना तब तक निरर्थक साबित होगा, जब तक कि खतरनाक खुले नालों को ठोस ढक्कनों से पूरी तरह सुरक्षित न ढका जाए। शहरवासियों की यह पुरजोर मांग है कि सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं के चारों ओर मजबूत लोहे अथवा कंक्रीट की बैरिकेडिंग की जाए, रात के समय दृश्यता बढ़ाने के लिए रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं तथा जो काम अधूरे पड़े हैं उन्हें बिना किसी हीलाहवाली के निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए। नगर निगम को यह समझना होगा कि सुरक्षा इंतजामों में जरा सी चूक किसी भी परिवार का चिराग बुझा सकती है।

सवाल-जवाब

पानीपत में बच्ची के साथ क्या हादसा हुआ?
पानीपत के वार्ड नंबर तीन में देवी मंदिर के पास एक बच्ची खुले नाले में गिर गई थी, जिसे आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बाहर निकालकर सुरक्षित बचा लिया।
क्या इस इलाके में पहले भी ऐसी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं?
हां, इसी क्षेत्र में अगस्त में एक महिला खुले नाले में गिर गई थी और सितंबर में सचदेवा गार्डन के सामने खुले गड्ढे में बाइक सवार गिर गए थे।
पूर्व में हुए हादसों के बाद नगर निगम ने क्या कार्रवाई की थी?
नगर निगम आयुक्त ने जेई जतिन को निलंबित किया था, एसडीओ योगेश तोमर और एक्सईएन सुमित नांदल के खिलाफ आरोपपत्र जारी किया था तथा निर्माण एजेंसी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की थी।
क्या घटना में बच्ची की उम्र या स्वास्थ्य स्थिति की पुष्टि हुई है?
नहीं, अभी तक बच्ची की सटीक उम्र, घटना का समय अथवा उसे अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·20 दिन पहले

गनीमत रही कि लोग समय पर पहुँच गए, पर सवाल ये है कि नगर निगम सीसीटीवी फुटेज आने के बाद ही नींद से जागेगा क्या? अगस्त में भी इसी जगह हादसा हुआ था, फिर भी अब तक ढक्कन क्यों नहीं लगा?

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

मुझे वो दिन अच्छी तरह याद है जब मैं खुद पानीपत में एक रिपोर्टिंग के दौरान ऐसे ही खुले नाले के पास फिसलते-फिसलते बचा था। नगर निगम की ये लापरवाही किसी की जान ले सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·20 दिन पहले

अर्जुन, आपकी बात बिल्कुल सही है! पर हैरानी की बात ये है कि अगस्त में महिला के गिरने के बाद भी प्रशासन ने अभी तक नाला ढका क्यों नहीं?

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

गनीमत रही कि लोग वक्त पर पहुंच गए वरना बड़ी अनहोनी हो जाती। आख़िर नगर निगम इस खुले नाले को ढंकने के लिए किसी बड़े हादसे का इंतज़ार क्यों कर रहा है?

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

करण भाई, बात तो सही है आपकी लेकिन सीसीटीवी फुटेज देखकर लगता है कि बच्ची शायद बिना किसी बड़े के अकेली ही घूम रही थी। नगर निगम अपनी जगह गलत है, पर बच्चों पर भी तो थोड़ा ध्यान देना चाहिए।

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