ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से जुड़े परिवारों के लिए रसोई ईंधन के मासिक खर्च में राहत पाने का नया अवसर सामने आया है। कृषि विभाग की जैविक खेती प्रोत्साहन योजना के तहत किसानों को अपने घरों में बायोगैस संयंत्र लगाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। घर में गाय, भैंस या अन्य दुधारू मवेशी रखने वाले परिवार इस व्यवस्था को अपनाकर रसोई गैस सिलेंडरों पर हर महीने खर्च होने वाले 1,000 से 2,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और खेती की लागत में कमी लाना है। इसके लिए विभागीय स्तर पर डिजिटल माध्यम से पंजीयन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से जारी कर दी गई है।
सब्सिडी का गणित और संयंत्र की क्षमता
कृषि विभाग के तय मानकों के अनुसार, दो घन मीटर की क्षमता वाले गोबर गैस प्लांट की स्थापना पर कुल लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 21,000 रुपये तक की राशि अनुदान के रूप में दी जा रही है। संयंत्र लग जाने के उपरांत किसान दैनिक भोजन पकाने के लिए इस गैस का सीधा उपयोग कर सकेंगे। रसोई गैस पर होने वाली बचत प्रत्यक्ष तौर पर परिवार की कुल खपत और संयंत्र से प्रतिदिन उत्पन्न होने वाली गैस की मात्रा पर निर्भर करेगी। जो किसान इस सरकारी सहायता का लाभ लेना चाहते हैं, वे कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। इस योजना में सम्मिलित होने के लिए अंतिम समय-सीमा 30 सितंबर 2026 निर्धारित है।
रसोई ईंधन के साथ बिजली उत्पादन और जैविक खाद का दोहरा लाभ
बायोगैस संयंत्र की उपयोगिता सिर्फ चूल्हा जलाने तक ही सीमित नहीं रहती। यदि तकनीकी रूप से समुचित व्यवस्था की जाए, तो इस गैस की सहायता से घरेलू स्तर पर बिजली भी तैयार की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, गैस बनने के बाद संयंत्र से बाहर आने वाली स्लरी किसानों के लिए एक बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन सिद्ध होती है। किसान इस अवशिष्ट स्लरी का उपयोग सीधे फसलों में तरल जैविक खाद के रूप में कर सकते हैं या फिर इससे उच्च गुणवत्ता वाला वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार किया जा सकता है। इससे न केवल खेतों की उर्वरा शक्ति में निरंतर सुधार आता है, बल्कि बाजार से खरीदी जाने वाली महंगी रासायनिक खादों पर होने वाले भारी खर्च में भी बड़ी कटौती होती है।
गया जिले में लक्ष्य और तकनीकी शर्तें
वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान गया जिले में कुल 10 बायोगैस संयंत्रों की स्थापना का प्रशासनिक लक्ष्य रखा गया है। जिला कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि संयंत्र निर्माण के लिए दीनबंधु मॉडल को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके निर्माण हेतु परिसर में कम से कम 10×12 वर्ग फीट खुली जमीन की उपलब्धता अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से प्रत्येक संयंत्र इकाई पर 21,000 रुपये की अधिकतम सब्सिडी सीधे दी जाती है। इसके साथ ही तकनीकी सहायता व निर्माण कार्य से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर को 1,500 रुपये का भुगतान किया जाता है। इस प्रकार एक इकाई की स्थापना पर मिलने वाला कुल सरकारी सहयोग 22,500 रुपये तक पहुंच जाता है।
स्वीकृति की स्थिति और आवेदन का तरीका
संजीव कुमार के अनुसार, योजना को लेकर किसानों में खासा उत्साह देखा गया है और जिले में अब तक 114 किसान अपना आवेदन दर्ज करा चुके हैं। प्राप्त आवेदनों की प्राथमिक जांच के बाद तीन किसानों के बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के प्रस्तावों को विधिवत मंजूरी भी प्रदान की जा चुकी है। जिन परिवारों के पास पर्याप्त संख्या में गाय, भैंस अथवा अन्य पशुधन उपलब्ध है, वे ताजा गोबर की नियमित आपूर्ति कर संयंत्र को सुचारू रख सकते हैं। इच्छुक कृषकों को सलाह दी गई है कि वे 30 सितंबर 2026 से पूर्व डीबीटी पोर्टल पर अपना फॉर्म सबमिट करें। आवेदन करने से पहले किसान अपनी पात्रता, आवश्यक भू-अभिलेख और अनुदान संबंधी सभी दिशा-निर्देशों की भली-भांति जांच अवश्य कर लें।





















