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पेट्रोल पंप और बिल पर इथेनॉल की मात्रा दर्शाने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, हाई कोर्ट जाने की दी छूटभारत
31 अग॰ 2026, 12:49 pm (31 दिन पहले)· 4

पेट्रोल पंप और बिल पर इथेनॉल की मात्रा दर्शाने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, हाई कोर्ट जाने की दी छूट

सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोल पंप के नोजल और रसीद पर इथेनॉल का प्रतिशत दर्शाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया है।

देशभर के पेट्रोल पंपों पर बेचे जा रहे पेट्रोल में इथेनॉल के सटीक मिश्रण की जानकारी देने से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। याचिका में मांग की गई थी कि पेट्रोल की बिक्री के समय डिस्पेंसिंग नोजल और ग्राहकों को दी जाने वाली बिल रसीद पर यह स्पष्ट रूप से लिखा जाए कि ईंधन में कितने प्रतिशत इथेनॉल मिलाया गया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को यह अधिकार दिया है कि वे अपनी शिकायतों को लेकर संबंधित हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता और अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की अर्जी पर विचार करने से मना कर दिया।

अटॉर्नी जनरल की आपत्ति और अदालत का रुख

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल ने याचिका के तौर-तरीकों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि यह याचिका असल में एक 'प्रॉक्सी पिटीशन' यानी किसी अन्य हित के लिए दायर याचिका की तरह नजर आती है। अटॉर्नी जनरल ने पीठ को यह भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल भी इसी तरह की मांगों वाली एक याचिका को खारिज कर दिया था। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने तर्क दिया कि यह विषय केवल किसी व्यक्ति विशेष का निजी मामला नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों और वाहन चालकों के बुनियादी अधिकारों से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष अपने पेट्रोल बिल का उदाहरण पेश करते हुए बताया कि रसीद पर इथेनॉल की मात्रा का कोई उल्लेख नहीं किया जाता, जिससे उपभोक्ताओं को पता ही नहीं चलता कि वे किस गुणवत्ता का ईंधन खरीद रहे हैं।

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नोजल और बिल पर इथेनॉल की स्पष्ट जानकारी देने की मांग

याचिका में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया था कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर लगे फ्यूल डिस्पेंसिंग नोजल पर पेट्रोल में मिलाए गए इथेनॉल का सटीक प्रतिशत साफ-साफ और प्रमुखता से दर्ज होना चाहिए। इसके साथ ही, ग्राहकों को मिलने वाले हर डिजिटल या प्रिंटेड बिल, इनवॉइस और कैश रसीद पर इथेनॉल मिश्रण का विवरण लिखना अनिवार्य किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना था कि जब तक पेट्रोल की रसीद पर इथेनॉल का अनुपात नहीं लिखा जाएगा, तब तक ग्राहकों को उनके द्वारा चुकाई गई कीमत के बदले मिले ईंधन की सही जानकारी नहीं मिल सकेगी।

गाड़ियों के लिए सार्वजनिक डेटाबेस और पुराने वाहनों के लिए व्यवस्था

याचिका में वाहन मालिकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक सार्वभौमिक व्हीकल कम्पैटिबिलिटी डेटाबेस तैयार करने की भी मांग की गई थी। इस प्रस्तावित डेटाबेस में वाहन के निर्माता, मॉडल, इंजन के प्रकार और निर्माण के वर्ष के आधार पर जानकारी दर्ज की जानी चाहिए। इससे आम नागरिक आसानी से यह जांच सकें कि उनकी गाड़ी अलग-अलग इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के अनुकूल है या नहीं। इसके अतिरिक्त, याचिका में उन पुराने वाहनों के लिए एक पारदर्शी ट्रांजिशन ढांचा यानी संक्रमणकालीन व्यवस्था बनाने की सिफारिश की गई थी जो E20 ईंधन के अनुकूल नहीं हैं। याचिकाकर्ता ने आग्रह किया कि जहाँ भी तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव हो, वहाँ उपभोक्ताओं को कम इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति और नीतिगत दस्तावेजों का प्रकटीकरण

याचिका में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन की पुरजोर मांग की गई थी। इस समिति का मुख्य कार्य E20 पेट्रोल के मौजूदा वाहनों पर पड़ने वाले वास्तविक असर की गहन जांच करना था। समिति से यह अध्ययन कराने की मांग की गई थी कि इथेनॉल मिश्रण का गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी, इंजन के जीवनकाल, मेंटेनेंस खर्च, गाड़ी की वारंटी और इंश्योरेंस दावों पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, याचिका में इथेनॉल के बड़े पैमाने पर उत्पादन से जुड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों, जैसे पानी की अत्यधिक खपत और खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की विस्तृत समीक्षा करने का सुझाव भी शामिल था। याचिकाकर्ता ने सरकार से यह मांग भी की थी कि E20 पेट्रोल के अनिवार्य कार्यान्वयन से संबंधित सभी नीतिगत दस्तावेज, तकनीकी अध्ययन रिपोर्ट, वाहन अनुकूलता रिपोर्ट और उपभोक्ता सलाह सार्वजनिक रूप से जारी की जाएं।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने इथेनॉल लेबलिंग याचिका पर क्या फैसला सुनाया?
कोर्ट ने नोजल और पेट्रोल बिल पर इथेनॉल की मात्रा दर्शाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को संबंधित हाई कोर्ट जाने की छूट दी।
इस मामले की सुनवाई किस बेंच ने की?
इस याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने की।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने क्या मुख्य मांगें रखी थीं?
याचिकाकर्ता ने पेट्रोल नोजल और बिल पर इथेनॉल का प्रतिशत लिखने, वाहनों के लिए कम्पैटिबिलिटी डेटाबेस बनाने और विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की थी।
अटॉर्नी जनरल ने याचिका का विरोध क्यों किया?
अटॉर्नी जनरल ने याचिका को प्रॉक्सी पिटीशन बताया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट पिछले साल भी इसी तरह की याचिका खारिज कर चुका है।
क्या पुराने वाहनों के लिए याचिका में कोई विशेष मांग थी?
हाँ, याचिका में E20 के अनुकूल न होने वाले पुराने वाहनों के लिए एक पारदर्शी ट्रांजिशन फ्रेमवर्क और कम इथेनॉल वाले पेट्रोल की उपलब्धता का सुझाव दिया गया था।
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