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फिल्म पद्मावत और जौहर पर टिप्पणी को लेकर स्वरा भास्कर के खिलाफ करणी सेना का जयपुर में विरोध, संगठन के नेताओं ने जताई कड़ी आपत्तिराजस्थान
2 सित॰ 2026, 10:58 pm (22 दिन पहले)· 2

फिल्म पद्मावत और जौहर पर टिप्पणी को लेकर स्वरा भास्कर के खिलाफ करणी सेना का जयपुर में विरोध, संगठन के नेताओं ने जताई कड़ी आपत्ति

जयपुर में फिल्म पद्मावत और जौहर की ऐतिहासिक प्रथा पर स्वरा भास्कर के बयान को लेकर करणी सेना ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन की महिला विंग की अध्यक्ष कीर्ति राठौड़ ने भाषा सुधारने की हिदायत दी, जबकि महिपाल मकराना ने तीखा हमला बोला।

फिल्म पद्मावत और जौहर की ऐतिहासिक परंपरा को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर द्वारा दिए गए बयान पर जयपुर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। करणी सेना ने अभिनेत्री की टिप्पणी पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे इतिहास और वीरांगनाओं के शौर्य का अपमान करार दिया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि ऐतिहासिक संदर्भों और महान बलिदानों पर बात करते समय भाषा की मर्यादा का ध्यान रखा जाना आवश्यक है, और इस प्रकार की टिप्पणियों को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कीर्ति राठौड़ का कड़ा रुख और भाषा सुधारने की हिदायत

करणी सेना महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष कीर्ति राठौड़ ने जयपुर में अभिनेत्री स्वरा भास्कर के बयान पर अपनी तीव्र प्रतिक्रिया दर्ज कराई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अभिनेत्री को किसी भी ऐतिहासिक विषय पर टिप्पणी करने से पहले अपनी भाषा में सुधार करना चाहिए। राठौड़ ने जोर देकर कहा कि सनातन संस्कृति और देश की वीरांगनाओं के महान त्याग और शौर्य पर सवाल उठाने या उनके प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने का अधिकार किसी भी व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता।

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कीर्ति राठौड़ ने राजपूताना के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की वीरांगनाओं का त्याग और साहस सदियों से जगजाहिर रहा है। उनके अनुसार, जौहर जैसी महान परंपरा को समझने के लिए उस कालखंड के इतिहास, तात्कालिक परिस्थितियों और विदेशी आक्रमणकारियों के संकट को जानना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई व्यक्ति किसी ऐतिहासिक प्रथा पर चर्चा या सवाल उठाना चाहता है, तो उसे इतिहास के ठोस तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर बात करनी चाहिए। हालांकि, वीरांगनाओं के पावन बलिदान को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ऐतिहासिक संदर्भ की अनदेखी पर महिला विंग की आपत्ति

करणी सेना महिला विंग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संगठन स्वरा भास्कर की टिप्पणी का पुरजोर विरोध करता है। कीर्ति राठौड़ ने कहा कि जौहर जैसी घटनाओं को केवल आज के आधुनिक नजरिए से देखना पूरी तरह से अनुचित है। इतिहास के ऐसे संवेदनशील विषयों को समझने के लिए उस दौर की विषम परिस्थितियों का मूल्यांकन करना जरूरी होता है।

महिला विंग का मानना है कि किसी भी ऐतिहासिक घटना पर विचार-विमर्श की स्वतंत्रता हो सकती है, लेकिन जब बात देश की वीरांगनाओं के स्वाभिमान की हो, तो भाषा की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। संगठन ने साफ कर दिया है कि राजपूताना की नारियों के आत्मसम्मान और बलिदान को ठेस पहुंचाने वाले बयानों के खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा।

महिपाल मकराना के तीखे बोल और टॉक शो के बहिष्कार की चेतावनी

दूसरी तरफ, राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना ने भी स्वरा भास्कर के बयान पर अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। मकराना ने अभिनेत्री के खिलाफ बेहद तीखी और अपमानजनक शब्दावली का प्रयोग करते हुए अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने स्वरा भास्कर की तुलना पौराणिक ग्रंथ के पात्र सूर्पनखा से कर दी और उनके नाक-कान काटने से संबंधित कठोर बातें कहीं।

अपनी टिप्पणी के दौरान महिपाल मकराना ने यह भी कहा कि वे आम तौर पर महिलाओं का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन स्वरा भास्कर द्वारा जौहर पर दिए गए बयान के कारण वे इस प्रकार के कठोर शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही मकराना ने घोषणा की कि भविष्य में स्वरा भास्कर को किसी भी टॉक शो या सार्वजनिक मंच पर आमंत्रित किए जाने का करणी सेना द्वारा कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक धरोहरों और बलिदानों का अनादर करने वाले बयानों को समाज सहन नहीं करेगा।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और भावी रुख

जयपुर में करणी सेना के दोनों प्रमुख नेताओं की ओर से आई इस तीखी प्रतिक्रिया के बाद यह पूरा मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। एक ओर जहाँ कीर्ति राठौड़ ने इतिहास, तथ्यों और भाषा की मर्यादा के दायरे में रहकर विरोध दर्ज कराया है, वहीं महिपाल मकराना ने बेहद आक्रामक और व्यक्तिगत हमला बोलते हुए तीखे शब्दों का प्रयोग किया है।

दोनों नेताओं के इन बयानों के सामने आने के बाद सामाजिक माध्यमों पर स्वरा भास्कर की टिप्पणी और करणी सेना की प्रतिक्रिया को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है। फिल्म पद्मावत के प्रदर्शन के समय जौहर को लेकर शुरू हुआ विवाद इस नए घटनाक्रम के बाद एक बार फिर गरमा गया है। फिलहाल इस पूरे विवाद और करणी सेना के विरोध पर अभिनेत्री स्वरा भास्कर की ओर से कोई नई प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

सवाल-जवाब

स्वरा भास्कर के खिलाफ करणी सेना क्यों विरोध कर रही है?
करणी सेना फिल्म पद्मावत और जौहर की ऐतिहासिक प्रथा पर स्वरा भास्कर द्वारा दिए गए बयान का विरोध कर रही है, जिसे वे वीरांगनाओं का अपमान मानती है।
करणी सेना महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष की क्या प्रतिक्रिया थी?
कीर्ति राठौड़ ने कहा कि स्वरा भास्कर को पहले अपनी भाषा सुधारनी चाहिए और वीरांगनाओं के ऐतिहासिक बलिदान पर आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
महिपाल मकराना ने क्या बयान दिया?
राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना ने स्वरा भास्कर की तुलना पौराणिक पात्र सूर्पनखा से की और तीखी अपमानजनक बातें कहीं।
करणी सेना ने टॉक शो को लेकर क्या चेतावनी दी है?
महिपाल मकराना ने कहा कि भविष्य में स्वरा भास्कर को किसी भी टॉक शो में बुलाए जाने पर करणी सेना द्वारा विरोध जताया जाएगा।
क्या स्वरा भास्कर की ओर से इस विरोध पर कोई नई प्रतिक्रिया आई है?
करणी सेना के इस विरोध के बाद फिलहाल अभिनेत्री स्वरा भास्कर की ओर से कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

इस मामले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऐतिहासिक भावनाओं के टकराव के बीच कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। करणी सेना के तीखे तेवर और विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन को संभावित तनाव को रोकने और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाने होंगे। यदि इस तरह के मामलों में दोनों पक्षों द्वारा संयम नहीं बरता गया, तो यह विवाद स्थानीय स्तर पर बड़े प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी संकट का रूप ले सकता है, जिसकी निगरानी जांच एजेंसियों को गंभीरता से करनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

यह प्रकरण मात्र एक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ भी गहरे हैं। उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में इस तरह के विवादों का असर अक्सर क्षेत्रीय चुनावों और स्थानीय समीकरणों पर पड़ता है। राजनीतिक दल भी ऐसे मुद्दों पर नपे-तुले कदम रखते हैं ताकि किसी एक वर्ग की नाराजगी का खामियाजा उन्हें चुनावी मैदान में न भुगतना पड़े। आने वाले दिनों में यदि इस प्रकार के विरोध प्रदर्शनों को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह मुद्दा विभिन्न मंचों पर बहस का मुख्य एजेंडा बन सकता है, जिससे सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ने का जोखिम भी पैदा हो सकता है।

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