सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश की बड़ी जीत, बीबीएमबी विवाद सुलझा, सालाना 1000 करोड़ तक का होगा फायदातकनीकी दबाव में फिसला यूरो, अमेरिकी डॉलर के सामने 1.1200 का अहम स्तर टूटामहज 100 रुपये से शुरू किया कारोबार, अब लाखों की कमाई कर रहे हैं मुरादाबाद के मोहम्मद फिरोजओबीसी क्रीमी लेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र सरकार की अर्जी खारिजहिमाचल के सम्मू गांव में दिवाली पर क्यों पसरा रहता है सन्नाटा, जानिए सात पीढ़ियों से चली आ रही अनूठी परंपराझालावाड़ में मिलावट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, तीन हजार किलो संदिग्ध मावा सीज और मिठाइयां नष्टअमेज़न पर ₹699 की शुरुआती कीमत से मिल रहे रूम हीटर, ओरिएंट इलेक्ट्रिक और फास्ट्रॉन के मॉडलों पर भारी छूटदिवाली 2026 पर संडे को होगी मुहूर्त ट्रेडिंग और 10 नवंबर को बंद रहेगा शेयर बाजार, नया शेड्यूल जारीबल्लभगढ़ बस स्टैंड पर बढ़ी बसों की संख्या, आगरा और अलीगढ़ जाने वालों के लिए राहतधनतेरस पर चांदी की कीमतों में स्थिरता, जानिए दिल्ली और मुंबई समेत बड़े शहरों में ताजा भाव
पंचकूला में छात्रा पर हमले के बाद उठा सवाल, आखिर क्यों आक्रामक हो रहे हैं छोटे बच्चेहरियाणा
1 नव॰ 2026, 7:39 am (5 दिन पहले)· 0

पंचकूला में छात्रा पर हमले के बाद उठा सवाल, आखिर क्यों आक्रामक हो रहे हैं छोटे बच्चे

पंचकूला के एक स्कूल में केजी की छात्रा पर तीसरी कक्षा के छात्र द्वारा किए गए जानलेवा हमले के बाद मनोचिकित्सक ने बच्चों में बढ़ते हिंसक व्यवहार की वजहें और रोकथाम के उपाय साझा किए हैं।

हरियाणा के पंचकूला अंतर्गत सेक्टर-20 के एक स्कूल परिसर में घटी खौफनाक वारदात ने अभिभावकों और शिक्षकों को झकझोर कर रख दिया है। वहां तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने केजी की नन्हीं छात्रा पर बर्बरतापूर्वक हमला कर दिया। छात्र पर आरोप है कि उसने बच्ची का सिर पहले डेस्क पर दे मारा, चेहरे पर लगातार लात-घूंसे बरसाए, बाल पकड़कर उसे जमीन पर घसीटा और फिर ईंट से सिर पर प्रहार किया। लहूलुहान हालत में बच्ची को फौरन सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। इस स्तब्धकारी वाकये ने शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों की शारीरिक सुरक्षा के साथ-साथ कम उम्र के छात्रों की मनोदशा और उनके व्यवहार को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

कम उम्र में पनपते आक्रामक व्यवहार की बुनियादी वजहें

फरीदाबाद के मनोचिकित्सक सर्जन कमोडोर डॉ. सुनील गोयल के अनुसार, इतनी छोटी उम्र में किसी बच्चे के भीतर ऐसा अनियंत्रित क्रोध और जानलेवा आक्रामकता उभरना बेहद गंभीर मसला है। उनका विश्लेषण है कि इस तरह की हिंसक प्रवृत्तियां कई घरेलू और सामाजिक परिस्थितियों से जन्म लेती हैं। यदि कोई बच्चा अपने घर के माहौल में लगातार मारपीट का शिकार होता है या अपने माता-पिता के बीच घरेलू हिंसा होते देखता है, तो उसके अवचेतन मन में यह विकृत धारणा घर कर जाती है कि नाराजगी जताने का एकमात्र स्वाभाविक तरीका शारीरिक प्रहार ही है। इसके अतिरिक्त, विद्यालयों में जब बड़े विद्यार्थी किसी छोटे बच्चे को तंग या प्रताड़ित करते हैं, तो वह बच्चा अपने उसी दबे हुए गुस्से और हीनभावना को अपने से भी कमजोर व छोटे बच्चों पर उतारने का प्रयास करता है।

ये भी पढ़ें

डिजिटल स्क्रीन और हिंसक दृश्यों का गहरा प्रभाव

डॉ. सुनील गोयल रेखांकित करते हैं कि आधुनिक दौर में स्मार्टफोन पर देखी जाने वाली रील्स, सिनेमा और धारावाहिकों में परोसी जा रही आक्रामक सामग्री भी बच्चों के कोमल मस्तिष्क को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है। अपरिपक्व उम्र के कारण वे वास्तविक जीवन और काल्पनिक दृश्यों में अंतर नहीं कर पाते। निरंतर हिंसक दृश्य देखते रहने से उनकी संवेदनाएं सुन्न होने लगती हैं और वे मारपीट को एक सामान्य व स्वीकार्य आचरण मानकर अपने साथियों पर भी उसे दोहराने लगते हैं।

शुरुआती संकेतों और चिड़चिड़ेपन को न समझें महज शरारत

मनोवैज्ञानिक विश्लेषण स्पष्ट करता है कि बच्चों में अत्यधिक हिंसक प्रवृत्तियां रातों-रात पैदा नहीं होतीं, बल्कि उनका विकास एक निरंतर प्रक्रिया के तहत धीरे-धीरे होता है। डॉ. सुनील गोयल अभिभावकों को आगाह करते हैं कि यदि बच्चा मामूली बात पर गुस्सा होकर सामान फेंकने लगे, किसी को अचानक धक्का दे या परिवार के सदस्यों पर हाथ उठाने की चेष्टा करे, तो इसे सामान्य बचपन की नादानी या शरारत मानकर नजरअंदाज करने की भूल बिल्कुल न करें। यह बच्चे के व्यक्तित्व और व्यवहार में आ रहे नकारात्मक बदलाव की स्पष्ट चेतावनी होती है, जिसे शुरुआत में ही संभालना आवश्यक है।

सख्ती और समझाइश का संतुलन, हिंसा के बदले हिंसा से बचें

यदि कोई बच्चा अपने माता-पिता अथवा भाई-बहनों पर हाथ उठाता है, तो परिवार को बिना किसी ढिलाई के यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि ऐसा कृत्य किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके सुधार के लिए घर में स्पष्ट लक्ष्मण रेखाएं तय की जानी चाहिए। दंड स्वरूप बच्चे के खेलने के समय में कटौती की जा सकती है, कुछ दिनों के लिए उसका मोबाइल फोन जब्त किया जा सकता है अथवा उसकी प्रिय गतिविधियों पर सीमित समय के लिए रोक लगाई जा सकती है। हालांकि, सबसे अहम बात यह है कि बच्चे की आक्रामकता का जवाब कभी भी शारीरिक प्रहार से नहीं दिया जाना चाहिए। अभिभावकों को प्रेम और दृढ़ता का संतुलित रुख अपनाते हुए यह सिखाना होगा कि अत्यधिक क्रोध की स्थिति में भी किसी पर हाथ उठाना सर्वथा अनुचित है।

सवाल-जवाब

पंचकूला के स्कूल में किस कक्षा की छात्रा पर हमला हुआ?
पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित एक स्कूल में केजी की छात्रा पर तीसरी कक्षा के छात्र ने हमला किया।
घायल बच्ची को इलाज के लिए कहां रेफर किया गया?
बच्ची को पहले सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल ले जाया गया था, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
बच्चे के आक्रामक व्यवहार के पीछे कौन से मुख्य घरेलू कारण हो सकते हैं?
घर में मारपीट का सामना करना, माता-पिता के बीच घरेलू हिंसा देखना या स्कूल में बड़े बच्चों द्वारा तंग किया जाना इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
स्क्रीन और सोशल मीडिया का बच्चों की मानसिकता पर क्या असर पड़ता है?
मोबाइल रील्स और फिल्मों में हिंसक सामग्री देखने से बच्चों की संवेदनाएं सुन्न हो सकती हैं और वे मारपीट को सामान्य व्यवहार समझने लगते हैं।
यदि बच्चा घर पर किसी पर हाथ उठाए तो माता-पिता को क्या करना चाहिए?
माता-पिता को हिंसा का जवाब हिंसा से देने के बजाय उसका मोबाइल या खेल का समय सीमित कर प्यार व दृढ़ता से समझाना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·5 दिन पहले

केजी की बच्ची पर तीसरी के बच्चे का ऐसा हमला देखकर रूह कांप गई! क्या स्कूल प्रशासन और टीचरों को पहले से उस बच्चे के गुस्से के बारे में कुछ पता नहीं चला होगा?

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

पंचकूला की इस घटना ने दिल दहला दिया है। इतनी छोटी उम्र में बच्चे इतने हिंसक कैसे हो रहे हैं? माता-पिता और स्कूलों को अब बच्चों के फोन इस्तेमाल और मानसिक तनाव पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

रविकेश जी, बात सही है आपकी, पर मुझे नहीं लगता कि सारा दोष फोन और स्क्रीन पर मढ़ देना सही है। घर का माहौल और आसपास की चीजें भी बहुत असर डालती हैं.

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

छोटे बच्चों का ऐसा खौफनाक रूप देखकर रूह कांप जाती है। मोबाइल और घर का माहौल दोनों बच्चों को बिगाड़ रहे हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछली बार जब मैं गाजियाबाद के एक स्कूल में था, तो वहाँ भी ऐसी ही एक घटना पर प्रिंसिपल रो पड़े थे। मोबाइल की लत ने बच्चों को बदल दिया है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp