हरियाणा के पंचकूला स्थित सेक्टर 20 के सरकारी स्कूल में गंभीर हमले की शिकार हुई छह साल की छात्रा को कई दिनों के गहन इलाज के बाद पीजीआई चंडीगढ़ से छुट्टी दे दी गई है। नन्हीं बच्ची के अपने घर वापस पहुंचने पर परिजनों और पड़ोसियों ने फूल बरसाकर और उपहार देकर उसका स्वागत किया। इस भावुक मौके पर परिवार के सदस्यों की आंखें भर आईं। अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने भी बच्ची की सेहत में व्यापक सुधार के बाद उसे विदाई दी और विशेष एंबुलेंस के जरिए पंचकूला स्थित उसके आवास तक भिजवाया। हालांकि, शारीरिक जख्म भरने के बावजूद इस भयानक अनुभव ने मासूम के मन पर गहरा खौफ छोड़ दिया है।
बच्ची की मां ने बताया कि इस खौफनाक वारदात के बाद से नन्हीं बच्ची के मन में गहरा डर समा गया है। वह अक्सर रात के समय अचानक घबराकर उठ बैठती है और रोने लगती है। वहीं पिता का कहना है कि बेटी के सकुशल घर लौटने से उन्हें बहुत बड़ा सुकून मिला है, मगर इस अप्रत्याशित हादसे ने पूरे परिवार को अंदर तक हिलाकर रख दिया है। परिजन अब इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि बच्ची को इस मानसिक आघात से कैसे पूरी तरह बाहर निकाला जाए।
कक्षा में 29 अक्तूबर को हुआ था हमला
यह दर्दनाक घटना पंचकूला के सेक्टर 20 स्थित राजकीय विद्यालय में 29 अक्तूबर को घटित हुई थी। स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले आठ साल के एक छात्र ने इस मासूम बच्ची पर बर्बरतापूर्वक हमला कर दिया था। आरोपी छात्र ने बच्ची के चेहरे पर ईंट से ताबड़तोड़ वार किए थे और उसे कई दफा क्लासरूम के बैंच पर पटका था। इस जानलेवा हमले में बच्ची लहूलुहान होकर बेहोश हो गई थी और उसकी गंभीर नाजुक हालत को देखते हुए तत्काल पीजीआई चंडीगढ़ के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया था। स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरे में यह पूरी वारदात दर्ज हो गई थी, जिसकी फुटेज सामने आने के बाद पूरे देश में भारी रोष फैल गया था। अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों की निगरानी में बच्ची का निरंतर उपचार चला, जिसके बाद उसकी हालत खतरे से बाहर आ सकी।
आरोपी छात्र की मेंटल मैपिंग रिपोर्ट पुलिस को सौंपी गई
इस सनसनीखेज मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी छात्र की मेंटल मैपिंग टेस्ट रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी है। पुलिस इस विस्तृत रिपोर्ट को बुधवार को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश करेगी और साथ ही आरोपी बच्चे को भी बोर्ड के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड इस मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट के तथ्यों का अध्ययन करने के उपरांत यह महत्वपूर्ण निर्णय लेगा कि नाबालिग छात्र को उसके माता पिता की सुपुर्दगी में घर भेजना सुरक्षित रहेगा अथवा उसे सुधार गृह में ही रखा जाना चाहिए।
इससे पूर्व सोमवार को जीएमसीएस 32 अस्पताल में तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक पैनल ने आरोपी छात्र का मानसिक और व्यवहार संबंधी परीक्षण किया था। इस विशेष परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने बच्चे की सोचने समझने की क्षमता, तर्क शक्ति, उसके आचरण और समग्र मानसिक स्थिति का बारीकी से आकलन किया। पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने उल्लेख किया है कि बच्चे की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है और उसमें गंभीर व्यावहारिक विकार नजर आ रहे हैं।
स्कूल प्रबंधन पर मुकदमा और विभागीय कार्रवाई
वारदात के बाद पीड़ित परिवार की नजरें जांच कमेटी की अंतिम रिपोर्ट और जिम्मेदार स्कूल प्रशासन पर होने वाली सख्त कार्रवाई पर टिकी हैं। शिक्षा विभाग ने मामले में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में स्कूल की प्रिंसिपल और दो शिक्षिकाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही पूरी घटना की तह तक जाने के लिए पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है जो अपनी पड़ताल कर रही है। वहीं पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध भी वैधानिक धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पारिवारिक माहौल, सोशल मीडिया और हिंसक गेम्स पर चिंता
हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन उषा प्रियदर्शनी ने इस खौफनाक प्रकरण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के आक्रामक व्यवहार पर परिवार की आंतरिक परिस्थितियों, सोशल मीडिया की लत और हिंसक वीडियो गेमिंग के दुष्प्रभावों की गहन पड़ताल की जानी आवश्यक है। आयोग ने सभी स्कूलों में विद्यार्थियों की नियमित मानसिक काउंसलिंग और नैतिक शिक्षा पर विशेष बल देने की पैरवी की है।
उषा प्रियदर्शनी ने कहा कि बच्चे अपने आसपास जैसा वातावरण देखते हैं, वैसा ही आचरण सीखते हैं। ऐसे में यह पड़ताल करना बेहद जरूरी है कि छात्र के घर में कोई तनावपूर्ण माहौल तो नहीं था या माता पिता के आपसी व्यवहार का उस पर कोई नकारात्मक मनोवैज्ञानिक असर तो नहीं पड़ रहा था। उन्होंने आगाह किया कि मौजूदा दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अनुचित व उग्र सामग्री आसानी से उपलब्ध है। इसके अलावा ऑनलाइन गेमिंग में अत्यधिक क्रूरता और हिंसा दिखाई जाती है, जो अबोध बच्चों के कोमल मस्तिष्क और व्यवहार को विकृत कर सकती है।



















