हरियाणा के पंचकूला में एक स्कूल की कक्षा के भीतर जानलेवा हमले का शिकार हुई छह वर्षीय बच्ची आखिरकार अस्पताल से स्वस्थ होकर अपने घर लौट आई है। जब बच्ची अपने मोहल्ले पहुंची तो वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया और स्थानीय लोगों व परिजनों ने फूल-मालाओं तथा बैंड-बाजे के साथ उसका भव्य स्वागत किया। बच्ची को अपने पैरों पर सही-सलामत खड़ा देखकर परिवार के साथ-साथ उपस्थित हर व्यक्ति के चेहरे पर राहत और खुशी साफ झलक रही थी।
अपनी नन्हीं बेटी को सकुशल वापस पाकर पिता बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखें भर आईं। पिता ने कहा कि उनकी बेटी को नया जीवन मिला है और वे इसे किसी पुनर्जन्म से कम नहीं मानते। उन्होंने बच्ची के ठीक होने का श्रेय डॉक्टरों के समर्पण और अनगिनत लोगों की प्रार्थनाओं को दिया। पिता ने सभी का आभार जताते हुए कहा कि पूरी दुनिया की दुआओं की बदौलत ही उनकी बेटी इस मुश्किल से बाहर आ पाई है और वे उम्मीद करते हैं कि बची हुई मामूली तकलीफें भी जल्द ठीक हो जाएंगी।
कक्षा के भीतर हुआ था बर्बर हमला
यह खौफनाक वारदात पंचकूला स्थित एक निजी स्कूल में 28 अक्टूबर को सामने आई थी। कक्षा के अंदर एक आठ वर्षीय लड़के ने अपनी छह साल की सहपाठी बच्ची पर अचानक हमला कर दिया था। घटना से जुड़ा एक कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें लड़का बच्ची के बाल पकड़कर उसका सिर लगातार डेस्क पर पटकता नजर आया। इतना ही नहीं, जब घायल बच्ची बेसुध होकर फर्श पर गिर गई, तब भी लड़के ने कथित तौर पर उसे लातों से मारा और ईंट जैसी किसी ठोस वस्तु से उस पर वार किए।
हमले में बच्ची के सिर और शरीर पर बेहद गंभीर चोटें आई थीं। स्कूल परिसर में हुई इस हिंसक घटना के बाद गंभीर हालत को देखते हुए बच्ची को तुरंत चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान यानी पीजीआईएमईआर ले जाया गया। वहां डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने कई दिनों तक बच्ची का सघन इलाज किया, जिसके बाद उसकी हालत में लगातार सुधार दर्ज किया गया और अब उसे छुट्टी दे दी गई है।
पुलिस जांच और लड़के का चिकित्सीय मूल्यांकन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हुआ। पुलिस उपायुक्त (अपराध) अमरिंदर सिंह ने पुष्टि की कि घटना में शामिल लड़के की उम्र आठ वर्ष और पीड़िता की उम्र छह वर्ष है। पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आरोपी बच्चे की चिकित्सकीय और मानसिक स्थिति का विशेषज्ञों के जरिए पूरा आकलन कराया जा रहा है।
पुलिस उपायुक्त ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि सात से बारह वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों से जुड़े किसी भी हिंसक मामले में चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन अनिवार्य होता है। इस विशेष मूल्यांकन रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही नियमानुसार आगे की कानूनी व सुधारात्मक प्रक्रिया तय की जाएगी। स्कूल परिसर के भीतर छोटे बच्चों के बीच हुई इस स्तर की हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।























