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प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात की विपक्ष की कोशिश पर सियासी घमासान, भाजपा ने साधा निशानाभारत
12 अक्तू॰ 2026, 2:28 pm (2 घंटे पहले)· 0

प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात की विपक्ष की कोशिश पर सियासी घमासान, भाजपा ने साधा निशाना

कांग्रेस नेताओं द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ ज्ञापन देने के लिए समय मांगने पर प्रधान न्यायाधीश द्वारा मिलने से मना किए जाने के बाद भाजपा ने तीखा हमला बोला है।

चुनावी प्रक्रियाओं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर विपक्षी दलों के तेवर बेहद आक्रामक हो चुके हैं, लेकिन इस बीच प्रधान न्यायाधीश के रुख ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत से मिलने का वक्त मांगा था। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने इस मुलाकात से इनकार कर दिया, क्योंकि इसी तरह के विवाद पहले से ही शीर्ष अदालत में विचाराधीन हैं। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर संवैधानिक सीमाओं को लांघने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला।

संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा पर भाजपा का वार

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका को हर दिन के राजनीतिक विवादों से पूरी तरह अलग रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता सत्ता पाने की बेचैनी में संवैधानिक कानूनों और अपनी राजनीतिक नौटंकी के बीच का फर्क भूल चुके हैं। भाटिया के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश द्वारा विपक्षी नेताओं से मिलने से साफ मना करना एक बड़ा संदेश देता है कि अदालतों को सियासी खींचतान का अखाड़ा नहीं बनाया जा सकता।

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संविधान की प्रति को लेकर चल रही राजनीति पर प्रहार करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “इसे पढ़िए, इसका सम्मान कीजिए और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को समझिए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल संविधान को साथ लेकर चलने भर से कोई उसके प्रावधानों का मर्म नहीं समझ जाता। संविधान देश के शासन तंत्र का पथप्रदर्शक दस्तावेज है, न कि राजनीतिक तमाशा खड़ा करने का कोई औजार।

विपक्ष की चार सूत्री मांगें और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का ऐलान

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने विरोध प्रदर्शन को लगातार धार दे रहे हैं। इसी रणनीति के तहत विपक्षी दलों ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च निकालने की तैयारी की है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने बाकायदा पत्र लिखकर सोमवार शाम चार से पांच बजे के बीच प्रधान न्यायाधीश से मिलने का समय मांगा था।

विपक्षी दल प्रधान न्यायाधीश को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इस ज्ञापन में चुनाव में कथित वोट चोरी पर रोक लगाने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को तुरंत रोकने और आगामी चुनावों में पुरानी मतपत्र प्रणाली को फिर से लागू करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल थीं। अदालत ने ऐसे मामलों के पहले से विचाराधीन होने के आधार पर इस मुलाकात को मंजूरी नहीं दी।

सवाल-जवाब

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिलने से इनकार क्यों किया?
प्रधान न्यायाधीश ने मुलाकात से इसलिए मना किया क्योंकि चुनाव से जुड़े इसी तरह के मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने प्रधान न्यायाधीश से कब और किस समय मिलने का वक्त मांगा था?
विपक्षी नेताओं ने सोमवार शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था।
विपक्षी दल अपने ज्ञापन में मुख्य रूप से क्या मांगें उठाना चाहते थे?
ज्ञापन में वोट चोरी रोकने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक और मतपत्र प्रणाली बहाल करने की मांग शामिल थी।
विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का फैसला किस तारीख को किया है?
विपक्षी दलों ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है।
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत की अनदेखी करते हुए संवैधानिक कानून को राजनीतिक नाटकबाजी में बदल दिया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·1 घंटे पहले

अदालत को राजनीति का अखाड़ा बनाने की जिद ठीक नहीं है। जब शक्तियों का स्पष्ट विभाजन है, तो संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखना ही चाहिए।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

अदालत को राजनीति में घसीटने की कोशिश ठीक नहीं है, सीजेआई का फैसला बिल्कुल सही रहा।

Rohan Gupta@rohan-gupta·1 घंटे पहले

रविकेश जी, आपकी बात सही है। पिछली बार जब मैं एक स्टार्टअप मीटिंग के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट के पास था, तो वहां का माहौल देखकर समझ आ गया था कि अदालतों को इन मामलों से दूर ही रखना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

अदालत को राजनीति का अखाड़ा बनाने की कोशिश करेंगे तो ऐसा ही जवाब मिलेगा। जब मामला पहले से ही कोर्ट में है, तो सीधे सीजेआई से मिलने की जिद समझ से बाहर है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

करण, बात तो ठीक है पर क्या विपक्ष को अपनी बात रखने का कोई और रास्ता नहीं मिलना चाहिए था? सिर्फ जिद कहना थोड़ा जल्दबाजी होगी।

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