त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही फूलों की मंडियों में जोरदार हलचल देखने को मिल रही है। नवरात्रि और दशहरा के दौरान पूजा अनुष्ठानों तथा सजावट के लिए फूलों की जरूरत अचानक बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर इनकी कीमतों पर पड़ा है। अपनी खास महक के लिए पहचानी जाने वाली शंकरपुरा चमेली की कीमतों में पिछले लगभग पंद्रह दिनों के भीतर भारी उछाल दर्ज किया गया है। जहां कुछ समय पहले तक यह ₹240 से ₹300 प्रति अट्टे के भाव पर मिल रही थी, वहीं अब इसकी कीमत उछलकर ₹1,600 प्रति अट्टे के स्तर पर पहुंच चुकी है। इस तेज तेजी ने त्योहारों की तैयारी कर रहे आम खरीदारों और श्रद्धालुओं के घरेलू बजट पर खासा दबाव बना दिया है।
खुले बाजार में रविवार को रिकॉर्ड स्तर पर बिके फूल
रविवार, 11 अक्टूबर को शंकरपुरा चमेली के दाम खुले बाजार में ₹1,600 प्रति अट्टे तक दर्ज किए गए। अगर करीब पंद्रह दिन पहले के भावों से तुलना करें, तो यह पुरानी कीमत के मुकाबले पांच गुना से भी अधिक महंगा हो चुका है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी आराधना, मंदिरों में चढ़ावे और घरों की सजावट के लिए इन ताजे फूलों का व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल होता है। मांग में आए इस अचानक उभार ने मंडियों में उपलब्ध सीमित आवक पर दबाव बढ़ा दिया, जिससे कीमतों में यह अभूतपूर्व तेजी सामने आई है।
उत्पादक संघ की तय दर और खुदरा कीमतों में भारी अंतर
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाला पहलू उत्पादक संघ की ओर से निर्धारित दर और खुले बाजार में बिक रहे फूलों की कीमत के बीच का बहुत बड़ा अंतर है। मल्लिगे उत्पादक संघ ने शंकरपुरा चमेली के लिए ₹570 प्रति अट्टे की दर तय की थी, लेकिन खुले बाजार में यही फूल ग्राहकों को ₹1,600 प्रति अट्टे तक बेचे जा रहे हैं।
- शंकरपुरा चमेली का खुला बाजार भाव: ₹1,600 प्रति अट्टे तक
- मल्लिगे उत्पादक संघ की निर्धारित दर: ₹570 प्रति अट्टे
इस भारी अंतर के कारण अलग-अलग दुकानों और मंडियों में ग्राहकों को कीमतों में भारी फेरबदल का सामना करना पड़ रहा है। बाजार विश्लेषकों के लिए भी यह विषय चर्चा में है कि आखिर उत्पादक संघ की तय सीमा से कहीं अधिक दर पर खुले बाजार में यह बिक्री किस वजह से हो रही है। यहां यह समझना भी जरूरी है कि ‘अट्टे’ फूलों को मापने की एक पारंपरिक स्थानीय इकाई है, जिसकी सटीक मात्रा का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
जाजी फूलों के दामों में भी देखा गया भारी अंतर
दामों में यह भारी उछाल केवल चमेली तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि जाजी फूलों के भाव भी तेजी से ऊपर चढ़े हैं। खुले बाजार में जाजी फूलों की बिक्री ₹800 प्रति अट्टे तक पहुंच गई। इसकी तुलना में उत्पादक संघ ने जाजी फूलों के लिए मात्र ₹160 प्रति अट्टे की दर तय की थी। इस तरह जाजी के मामले में भी संघ की आधिकारिक दर और खुले बाजार के दाम के बीच भारी विसंगति बनी हुई है।
मांग में बदलाव से कीमतों की चाल
कीमतों में आए इस भारी फेरबदल की मुख्य वजह त्योहारी चक्र के दौरान मांग का उतार-चढ़ाव है। दरअसल, पितृ पक्ष के दौरान आमतौर पर पूजा और मांगलिक आयोजनों के सीमित रहने से फूलों की मांग काफी गिर जाती है और भाव निचले स्तरों पर आ जाते हैं। इसके उलट, जैसे ही नवरात्रि और दशहरा का पर्व शुरू होता है, मंदिरों, पंडालों और घरों में दैनिक पूजन तथा भव्य सजावट के लिए फूलों की खरीदारी बहुत तेजी से बढ़ जाती है। इसी अचानक बढ़ी हुई उपभोक्ता मांग ने मंडियों में शंकरपुरा चमेली और जाजी फूलों के भाव को आसमान पर पहुंचा दिया है।





















