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जयपुर के ऐतिहासिक गोविंद देवजी मंदिर के महंत अंजन कुमार गोस्वामी का देहांत, 78 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांसराजस्थान
2 नव॰ 2026, 12:23 am (1 घंटे पहले)· 0

जयपुर के ऐतिहासिक गोविंद देवजी मंदिर के महंत अंजन कुमार गोस्वामी का देहांत, 78 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

जयपुर स्थित प्रसिद्ध गोविंद देवजी मंदिर के महंत अंजन कुमार गोस्वामी का रविवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 78 वर्ष की उम्र में अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

जयपुर के आराध्य देव माने जाने वाले प्रसिद्ध गोविंद देवजी मंदिर के महंत अंजन कुमार गोस्वामी का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रविवार दोपहर अचानक साइलेंट अटैक आने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। परिजनों और मंदिर से जुड़े लोगों ने उन्हें तुरंत दुर्लभजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके परलोक गमन की सूचना मिलते ही मंदिर परिवार और शहर भर के श्रद्धालुओं के बीच शोक की गहरी लहर फैल गई।

रविवार दोपहर बिगड़ी थी तबीयत

रविवार दोपहर लगभग 12 बजे महंत अंजन कुमार गोस्वामी की अचानक तबीयत खराब हुई थी। साइलेंट अटैक की चपेट में आने पर उन्हें बिना किसी देरी के अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के तमाम प्रयास किए, लेकिन उपचार के दौरान उनका देहांत हो गया। उनके निधन के बाद बड़ी संख्या में भक्त और गणमान्य लोग संवेदना व्यक्त करने पहुंचे।

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जलमहल के सामने समाज बाड़ी में हुआ अंतिम संस्कार

महंत अंजन कुमार गोस्वामी की अंतिम यात्रा रविवार शाम 4:30 बजे सुभाष चौक क्षेत्र स्थित उनकी हवेली से निकाली गई। इस अंतिम यात्रा में काफी संख्या में श्रद्धालु, संत समाज के लोग और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। इसके बाद जलमहल के ठीक सामने स्थित समाज बाड़ी में उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। महंत अंजन कुमार गोस्वामी गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय की समृद्ध परंपरा से जुड़े हुए थे और उनके जाने से धार्मिक जगत में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।

कछवाहा राजवंश और गोविंद देवजी का अटूट संबंध

जयपुर शहर में स्थित गोविंद देवजी मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि यह पूरी गुलाबी नगरी की सांस्कृतिक अस्मिता और अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है। इस पवित्र धाम में भगवान श्रीकृष्ण के श्री गोविंद देव स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐतिहासिक रूप से कछवाहा राजवंश के शासक भगवान गोविंद देवजी को ही जयपुर रियासत का वास्तविक राजा या स्वामी स्वीकार करते थे। राजपरिवार के राजा स्वयं को भगवान का दीवान अथवा सेवक मानकर ही शासन का संचालन करते थे।

सिटी पैलेस परिसर और मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह भव्य मंदिर जयपुर के सिटी पैलेस परिसर में स्थित जय निवास उद्यान के भीतर स्थापित है। वास्तुकला की दृष्टि से यह बादल महल और चंद्र महल के ठीक मध्य में स्थित है, जहां हर रोज हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए उमड़ते हैं। इस पवित्र मंदिर की स्थापना 18वीं शताब्दी के दौरान जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय के समय में की गई थी। भगवान गोविंद देवजी की यह अलौकिक प्रतिमा मूल रूप से वृंदावन से जयपुर लाई गई थी।

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, मुगल शासक औरंगजेब के दौर में प्रतिमा की सुरक्षा को देखते हुए इसे वृंदावन से बाहर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था। लंबे सफर के बाद अंततः इस पावन विग्रह को जयपुर लाया गया और विधिवत रूप से स्थापित किया गया। कछवाहा शासकों की इस विग्रह के प्रति अगाध निष्ठा थी और वे समूचे राजकाज को ईश्वर की सेवा मानकर निभाते थे। यही समृद्ध आध्यात्मिक विरासत आज भी गोविंद देवजी मंदिर को जयपुर की पहचान के तौर पर जीवंत बनाए हुए है।

सवाल-जवाब

महंत अंजन कुमार गोस्वामी का निधन किस कारण से हुआ?
रविवार दोपहर करीब 12 बजे उन्हें साइलेंट अटैक आया था, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उनका देहांत हो गया।
निधन के समय महंत अंजन कुमार गोस्वामी की उम्र कितनी थी?
निधन के समय उनकी आयु 78 वर्ष थी।
उन्हें इलाज के लिए किस अस्पताल ले जाया गया था?
तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें जयपुर के दुर्लभजी अस्पताल ले जाया गया था।
महंत जी का अंतिम संस्कार कहाँ किया गया?
उनका अंतिम संस्कार जलमहल के सामने स्थित समाज बाड़ी में किया गया।
महंत अंजन कुमार गोस्वामी किस धार्मिक संप्रदाय से जुड़े थे?
वे गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय की धार्मिक परंपरा से जुड़े हुए थे।
गोविंद देवजी मंदिर जयपुर में कहाँ स्थित है?
यह मंदिर जयपुर के सिटी पैलेस परिसर में जय निवास उद्यान के भीतर, बादल महल और चंद्र महल के बीच स्थित है।
गोविंद देवजी की प्रतिमा मूल रूप से कहाँ से लाई गई थी?
भगवान गोविंद देवजी की प्रतिमा 18वीं शताब्दी में वृंदावन से सुरक्षित लाकर जयपुर में स्थापित की गई थी।
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टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·8 मिनट पहले

पिछले साल जब मैं जयपुर गई थी, तब गोविंद देवजी के दर्शन करने का मौका मिला था। मंदिर में जो शांति और दिव्यता महसूस हुई थी, वह आज भी याद है। महंत जी के जाने से शहर ने अपना एक बड़ा आध्यात्मिक सहारा खो दिया।

Arjun Mehta@arjun-mehta·28 मिनट पहले

जयपुर जाना हुआ था तब गोविंद देवजी के दर्शन करने का मौका मिला था। महंत जी का यूं अचानक जाना सचमुच बहुत दुखद है, पूरा शहर आज उदाس है।

Ravikash Gupta@ravikash·27 मिनट पहले

अर्जुन भाई, आपकी बात बिल्कुल ठीक है, वहां की ऊर्जा ही अलग है। क्या अब मंदिर की परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए उत्तराधिकारी की घोषणा को लेकर कोई प्रक्रिया शुरू हुई है?

Rohan Verma@rohan-verma·48 मिनट पहले

महंत जी का जाना वाकई दुखद है, पर मुझे थोड़ा शक है कि इतनी उम्र में अचानक साइलेंट अटैक आने पर भी अस्पताल इतनी देर से क्यों पहुंचे। अमूमन ऐसे मामलों में समय बहुत कम मिलता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·47 मिनट पहले

रोहन भाई, अस्पताल पहुँचने में सचमुच देर हुई या परिवार को अस्पताल ले जाने में वक्त लग गया, क्या इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है?

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