राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक विशेष पोक्सो अदालत ने सात वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला दिया है। अदालत ने मामले के दोषी को अपनी अंतिम सांस तक जेल की सलाखों के पीछे रहने का आदेश सुनाया है। अदालत ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट रेखांकित किया कि छोटे बच्चों के खिलाफ ऐसा घिनौना और अमानवीय अपराध करने वाले किसी भी प्रकार की सहानुभूति अथवा दया के पात्र नहीं हो सकते।
फैसला सुनाते समय भावुक हुए न्यायाधीश
इस संवेदनशील और जघन्य मामले की गंभीरता को देखते हुए पीठासीन अधिकारी एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजिताभ आचार्य ने जब खुले न्यायालय में सजा का ऐलान किया, तो वहां मौजूद सभी लोग सन्न रह गए। फैसले के दौरान खुद न्यायाधीश भी बेहद भावुक हो गए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे मामलों में नरमी बरतना समाज और मासूम बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने जैसा है, इसलिए दोषी को कठोरतम दंड मिलना अनिवार्य है।
दोषी पर जुर्माना और पीड़िता को मुआवजा
अदालत ने इंदिरा नगर, बाड़मेर निवासी आरोपी मघ सिंह पुत्र तेजसिंह को दोषी करार देते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, अदालत ने दोषी पर 1 लाख 75 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया। न्यायालय ने पीड़ित बच्ची के भविष्य और उसके परिवार के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को 7 लाख रुपये का आर्थिक मुआवजा देने का कड़ा आदेश जारी किया है। इस मुकदमे की पैरवी कर रहे विशिष्ट लोक अभियोजक दामोदर कुमार चौधरी के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने अपराध साबित करने के लिए अदालत में 20 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके साथ ही साक्ष्य के तौर पर 44 अहम दस्तावेज और 18 आर्टिकल भी पेश किए गए, जिनकी बिनाह पर दोष सिद्ध हुआ।
जांच में लापरवाही पर पुलिस को फटकार और सीसीटीवी के निर्देश
फैसला सुनाने के दौरान न्यायाधीश अजिताभ आचार्य ने मामले की पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने जांच अधिकारी की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने टिप्पणी की कि बच्चों से जुड़े अपराधों में पुलिस को पूरी तत्परता, संवेदनशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से साक्ष्य जुटाने चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर कानूनी खामी न रहे। भविष्य में इस प्रकार की कमियों से बचने और प्रशासनिक तंत्र को चुस्त करने के उद्देश्य से अदालत ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। छोटे बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को विशेष तौर पर निर्देशित किया गया है कि वे जिले भर के सभी सार्वजनिक स्थानों पर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगवाएं।
खेलते समय बच्ची को झाड़ियों में ले गया था आरोपी
यह दर्दनाक घटना उस समय सामने आई थी जब 19 जुलाई 2026 को पीड़िता के पिता ने बाड़मेर के महिला थाने में लिखित शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनकी सात वर्ष की बेटी घर के बाहर खेल रही थी। उसी दौरान आरोपी मघ सिंह ने उसे बहलाया-फुसलाया और बबूल की झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया। पुलिस ने मामले की पड़ताल के बाद बीएनएस की धारा 65(2), 96, 137(2) और पोक्सो अधिनियम की धारा 5एम/6 एवं 11(iv)/12 के तहत आरोप प्रमाणित पाते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था।



















