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प्रशासनिक खर्च घटाने की बड़ी पहल: हिमाचल प्रदेश में आईएएस और आईएफएस अधिकारियों के 58 पद कम करेंगे सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खूहिमाचल प्रदेश
18 अग॰ 2026, 2:51 pm (35 दिन पहले)· 2

प्रशासनिक खर्च घटाने की बड़ी पहल: हिमाचल प्रदेश में आईएएस और आईएफएस अधिकारियों के 58 पद कम करेंगे सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू

हिमाचल प्रदेश सरकार राजस्व व्यय कम करने के लिए ऑल इंडिया सर्विसेज के कैडर में कटौती करने जा रही है। आईएएस अधिकारियों के 23 और आईएफएस अधिकारियों के 35 पद कम करने के प्रस्ताव से सालाना 100 से 150 करोड़ रुपये की बचत का अनुमान है।

हिमाचल प्रदेश सरकार अपने प्रशासनिक खर्चों में कटौती करने और राजस्व घाटे को नियंत्रित करने के लिए अखिल भारतीय सेवाओं के कैडर आकार में बड़ी कटौती करने जा रही है। राज्य प्रशासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारियों की स्वीकृत संख्या को घटाने की योजना तैयार की है। इसके साथ ही भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के कैडर में भी कमी करने की दिशा में विचार किया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाना और राज्य के खजाने पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करना है।

आईएएस और आईएफएस अधिकारियों की संख्या में कटौती का खाका

राज्य में आईएएस अधिकारियों की मौजूदा स्वीकृत संख्या 153 है, जिसे घटाकर 130 करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि राज्य कैडर में आईएएस अधिकारियों के 23 पद कम किए जाएंगे। इसी तरह आईएफएस अधिकारियों की संख्या को 118 से घटाकर 83 करने की योजना है, जिससे इस कैडर में 35 पदों की कमी आएगी। हालांकि, पुलिस सेवा यानी आईपीएस के अधिकारियों की संख्या में कितनी कटौती की जाएगी, इसे लेकर आधिकारिक आंकड़ा अभी तय होना बाकी है।

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अनुसार, राज्य में उच्च स्तर पर अधिकारियों की संख्या आवश्यकता से अधिक है। कैडर में इस रणनीतिक कटौती के माध्यम से सरकार अपने राजस्व खर्च में सालाना 100 करोड़ रुपये से 150 करोड़ रुपये तक की भारी बचत करने का लक्ष्य रख रही है।

प्रशासनिक दक्षता और सुक्खू सरकार का दृष्टिकोण

प्रशासनिक ढांचे को युक्तिसंगत बनाने का कारण बताते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि पहाड़ी राज्य के लिए अधिकारियों की इतनी बड़ी संख्या आवश्यक नहीं है। उनके अनुसार, हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक कार्यों के सुचारू संचालन के लिए आईएएस अधिकारियों की वास्तविक आवश्यकता 100 से 110 के बीच ही है। हालांकि, पहले चरण में इसे 130 तक लाने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सुधारों के इस उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा,

"हमें अधिकारियों की फौज नहीं चाहिए, बल्कि ऐसे अधिकारी चाहिए जो सरकार की नीतियों और योजनाओं को असरदार ढंग से लागू कर सकें।"

कैडर का आकार छोटा करने की इस नीति के तहत, राज्य सरकार अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की पूरी छूट दे रही है। जो भी अधिकारी केंद्र सरकार की सेवाओं में जाने का विकल्प चुन रहे हैं, उन्हें राज्य स्तर से तुरंत मंजूरी प्रदान की जा रही है ताकि राज्य पर उनका वित्तीय बोझ कम हो सके।

प्रतिनियुक्ति की स्थिति और सालाना वित्तीय बोझ

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में हिमाचल कैडर के 20 से अधिक आईएएस अधिकारी और 12 से अधिक आईपीएस व आईएफएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। इनमें से कई अधिकारी राज्य के भीतर भी गैर-संवर्ग (नॉन-कैडर) पदों की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।

राज्य सरकार के अनुमान के अनुसार, प्रत्येक उच्च स्तर के अखिल भारतीय सेवा अधिकारी पर सरकार को हर साल लगभग 40 लाख रुपये से 50 लाख रुपये का वित्तीय खर्च उठाना पड़ता है। इस लागत में अधिकारियों का मूल वेतन, महंगाई भत्ता, उनके साथ तैनात कर्मचारियों का खर्च, आधिकारिक वाहन, आवास और अन्य सरकारी सुविधाएं शामिल हैं।

इसी भारी-भरकम वित्तीय बोझ को देखते हुए, हिमाचल प्रदेश सरकार जल्द ही अधिकारियों की संख्या कम करने का एक औपचारिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी में है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार केंद्र से यह अनुरोध भी करेगी कि भविष्य में हिमाचल प्रदेश को और अधिक केंद्रीय सेवा अधिकारी आवंटित न किए जाएं, ताकि राज्य के खजाने पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

सवाल-जवाब

हिमाचल प्रदेश सरकार अधिकारियों की संख्या क्यों घटा रही है?
राज्य सरकार राजस्व व्यय को कम करने और प्रशासनिक खर्च में सालाना 100 से 150 करोड़ रुपये की बचत करने के लिए कैडर में कटौती कर रही है।
आईएएस और आईएफएस अधिकारियों के कितने पद कम किए जाएंगे?
आईएएस अधिकारियों की संख्या 153 से घटाकर 130 (23 पद कम) और आईएफएस अधिकारियों की संख्या 118 से घटाकर 83 (35 पद कम) की जाएगी।
आईपीएस अधिकारियों की संख्या में कितनी कटौती होगी?
आईपीएस अधिकारियों के कैडर में कितनी कटौती की जाएगी, इसकी अंतिम संख्या अभी तय नहीं हुई है।
एक अखिल भारतीय सेवा अधिकारी पर सरकार का सालाना कितना खर्च होता है?
वेतन, भत्ता, अमला और अन्य सुविधाओं को मिलाकर एक अधिकारी पर सालाना 40 लाख रुपये से 50 लाख रुपये का खर्च आता है।
क्या राज्य सरकार केंद्र को इस संबंध में प्रस्ताव भेजेगी?
हां, कैडर में कमी करने का औपचारिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा और राज्य में अतिरिक्त अधिकारी आवंटित न करने का अनुरोध किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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