पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आधिकारिक परिसरों और उनसे जुड़े प्रशासनिक हलकों में उस समय हलचल तेज हो गई, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो की एक टीम ने मंगलवार, 6 अक्तूबर को उनके कैंप कार्यालय सह गेस्ट हाउस पर अपनी जांच कार्रवाई शुरू की। यह परिसर चंडीगढ़ के सेक्टर-2 में स्थित मकान नंबर 50 है, जिसे मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। जांच दल केवल चंडीगढ़ तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मन के संगरूर जिले के घराचों स्थित पैतृक आवास पर भी टीम ने पहुंचकर दस्तावेजों और जरूरी रिकॉर्ड्स की छानबीन की।
उच्च न्यायालय के कड़े आदेश के बाद दर्ज हुआ आपराधिक मामला
जांच एजेंसी की यह पूरी सक्रियता पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस हालिया आदेश के बाद सामने आई है, जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित कथित अनियमितताओं, तबादलों और नियुक्तियों के प्रकरण में निष्पक्ष जांच का निर्देश दिया गया था। उच्च न्यायालय ने एजेंसी को निर्देश दिया था कि वह मामले में बाकायदा आपराधिक प्राथमिकी दर्ज कर गहराई से पड़ताल करे और अगले दो महीने की समय सीमा के भीतर अपनी विस्तृत स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश करे। इस न्यायिक निर्देश के अनुपालन में जांच एजेंसी ने नियमित मामला दर्ज किया और फिर अलग-अलग चिन्हित ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय के पत्रों से खुला था मामला
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पूर्व में पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी गई आधिकारिक चिट्ठियों से जुड़ी हैं। वित्तीय जांच एजेंसी ने अपने पत्रों में यह गंभीर आरोप रेखांकित किए थे कि सरकारी तबादलों, विभिन्न पदों पर तैनाती, भूमि उपयोग परिवर्तन से जुड़ी मंजूरियों और प्रशासनिक फैसलों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। इन्हीं संचार माध्यमों में मुख्यमंत्री के निकट सहयोगी और विशेष कार्य अधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन का नाम भी प्रमुखता से सामने आया था। जब यह पूरा दस्तावेज और मामला उच्च न्यायालय के संज्ञान में पहुंचा, तो अदालत ने किसी भी पूर्वाग्रह से परे एक स्वतंत्र पड़ताल सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो को जांच की कमान सौंप दी।
सर्वोच्च न्यायालय से राहत न मिलने के बाद तेज हुई कार्रवाई
उच्च न्यायालय द्वारा केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपे जाने और दो महीने में रिपोर्ट तलब किए जाने के निर्देश के खिलाफ पंजाब सरकार ने देश की शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। राज्य सरकार की कानूनी टीम ने सर्वोच्च न्यायालय से इस याचिका पर तत्काल प्रभाव से सुनवाई करने का अनुरोध किया था। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने इस मामले पर फौरी या आपात सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। कानूनी मोर्चे पर इस राहत के अभाव के तुरंत बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई को गति देते हुए कैंप कार्यालय और अधिकारी के पैतृक घर पर तलाशी शुरू कर दी।
राजनीतिक बयानबाजी तेज, आप और बीजेपी आमने-सामने
इस प्रशासनिक कार्रवाई ने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने पंजाबी में अपनी बात रखते हुए कहा कि आने वाले चुनावों की घबराहट में केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग सरकार की छवि धूमिल करने के लिए किया जा रहा है और जनता से मिल रहे समर्थन के कारण विरोधी दल असहज महसूस कर रहा है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी सोशल मीडिया मंच पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक दो महीने पहले मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े परिसर पर जांच एजेंसी की कार्रवाई सत्ताधारी दल की हताशा को दिखाती है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों ने अपना मन पूरी तरह बना लिया है और वे अगले चुनाव में भगवंत मान को 100 से अधिक सीटों पर ऐतिहासिक जीत दिलाकर दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपेंगे।
विपक्ष का कड़ा रुख और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इस कानूनी कदम का स्वागत करते हुए राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला। पार्टी नेता मंजिंदर सिंह सिरसा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि राज्य में पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान हुए गलत कामों का हिसाब होने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि जब सत्ता के शीर्ष कार्यालयों और करीबी अधिकारियों से जुड़े परिसरों पर जांच की आंच पहुंची है, तो यह संकेत है कि भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए पारदर्शी जांच जरूरी है।























