देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और सुरक्षा से जुड़ी प्रणालीगत खामियों को दूर करने के लिए देश की संसद में एक समर्पित राष्ट्रीय विमर्श की मांग तेज़ हो गई है। 5 अक्टूबर 2026 को राजधानी नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक साझा कार्यक्रम के दौरान पीपुल अगेंस्ट रेप्स इन इंडिया (PARI) की संस्थापक योगिता भयाना तथा अधिकार अभी, न्याय अभी (AANA) संगठन के प्रतिनिधियों ने सरकार और संसद के समक्ष यह बात रखी। उन्होंने देश भर में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र तुरंत आहूत करने की मांग की, ताकि नीतिगत स्तर पर ठोस बदलाव किए जा सकें।
युवाओं और छात्रों से मिले सुझावों पर आधारित पहल
संसदीय हस्तक्षेप की यह महत्वपूर्ण पहल सीधे तौर पर ज़मीनी स्तर से मिले अनुभवों और इनपुट्स पर टिकी हुई है। इस औपचारिक मांग को उठाने से पहले योगिता भयाना ने दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश के विभिन्न राज्यों के छात्र-छात्राओं और युवाओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श एवं परामर्श प्रक्रिया पूरी की थी। इस संवाद सत्र के दौरान युवा महिलाओं और विद्यार्थियों ने सार्वजनिक स्थलों, शैक्षणिक परिसरों, कार्यस्थलों और ऑनलाइन डिजिटल स्पेस में सुरक्षा को लेकर रोज़मर्रा की चुनौतियों, वास्तविक चिंताओं और व्यावहारिक सुझावों को साझा किया था। इन वास्तविक अनुभवों को इस अभियान की मुख्य बुनियाद बनाया गया है।
छात्रों और छात्राओं से मिले इन सुझावों को उस ज़मीनी अनुभव के साथ जोड़ा गया है, जो पीपुल अगेंस्ट रेप्स इन इंडिया संगठन पिछले सात वर्षों से लगातार हासिल कर रहा है। यह संस्था पिछले सात साल से अपराधों से प्रभावित सर्वाइवर्स, बच्चों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालयों और विभिन्न सामाजिक समुदायों के बीच निरंतर काम कर रही है। इन ज़मीनी अनुभवों और पिछले सात वर्षों की निरंतर पैरवी से निकले निष्कर्षों को संकलित करके इस राष्ट्रव्यापी मांग पत्र में शामिल किया गया है, ताकि संसद में होने वाली किसी भी चर्चा का आधार वास्तविक परिस्थितियां बन सकें।
प्रतिक्रियावादी रवैये के बजाय रोकथाम और जवाबदेही पर ज़ोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए योगिता भयाना ने मौजूदा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और सोच में बुनियादी बदलाव की आवश्यकता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा के संवेदनशील विषय को केवल किसी जघन्य घटना या हिंसा के घटित होने के बाद दी जाने वाली तात्कालिक प्रशासनिक प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि देश को एक ऐसे समर्पित राष्ट्रीय संसदीय विमर्श की तत्काल आवश्यकता है, जहां महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े रोकथाम के उपायों, संस्थागत जवाबदेही, मौजूदा कानूनों एवं नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यवस्थागत कमियों पर खुली और ईमानदार चर्चा हो सके।
इस मांग के तहत संसद में लगातार पूरे दो दिन तक केवल महिला सुरक्षा के एजेंडे पर केंद्रित विमर्श का प्रारूप तैयार करने की वकालत की गई है। इस सत्र में युवा नागरिकों, सर्वाइवर-सपोर्ट से जुड़े संगठनों, नागरिक समाज और संबंधित हितधारकों द्वारा उठाए गए मुद्दों को मुख्य एजेंडे में शामिल करने की मांग की गई है। इस पूरी पहल का मुख्य लक्ष्य व्यवस्था को घटना-केंद्रित प्रतिक्रिया से हटाकर पूर्व-रोकथाम की ओर ले जाना, छिटपुट घटनाओं के बजाय व्यापक नीतिगत सुधारों को अपनाना और केवल औपचारिक जागरूकता अभियानों से आगे बढ़कर मापने योग्य सख्त जवाबदेही स्थापित करना है।
औपचारिक मांग पत्र के ज़रिये ठोस कार्ययोजना का आग्रह
आयोजन के दौरान संबंधित अधिकारियों और संसद के लिए एक औपचारिक लेटर ऑफ डिमांड भी जारी किया गया। इस पत्र के माध्यम से संबंधित प्राधिकारियों और संसदीय नेतृत्व से अपील की गई कि वे निर्धारित संवैधानिक और संसदीय प्रक्रियाओं का पालन करते हुए महिला सुरक्षा पर दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की दिशा में जल्द से जल्द विचार करें और आवश्यक कदम उठाएं।
योगिता भयाना और अधिकार अभी, न्याय अभी संगठन ने ज़ोर देकर कहा कि उनका यह कदम केवल एक और पारंपरिक परिचर्चा कराने तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक मकसद एक तय समयसीमा के भीतर राष्ट्रीय स्तर पर सार्थक संवाद स्थापित करना है, जिससे ठोस नीतिगत सिफारिशें, मज़बूत जवाबदेही तंत्र और ज़मीन पर लागू होने वाले प्रभावी उपाय हासिल किए जा सकें। इस अभियान का स्पष्ट संदेश है कि महिला सुरक्षा के लिए दो दिन का राष्ट्रीय संवाद और तत्काल कार्रवाई अब समय की सबसे बड़ी मांग है।



















