सार्वजनिक करदाताओं की गाढ़ी कमाई से संचालित होने वाली आपातकालीन जीवनरक्षक सेवाओं का राजनीतिक प्रभाव के चलते निजी कार्यों में इस्तेमाल होना एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। आगजनी, आपदा और जीवन संकट के समय त्वरित राहत पहुंचाने के लिए आरक्षित दमकल वाहनों को जब व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं और घरेलू साफ-सफाई के साधन के रूप में देखा जाने लगे, तब पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं। हाल ही में गुजरात और मध्य प्रदेश से सामने आए अलग-अलग मामलों ने इस तरह के अनुचित प्रशासनिक रवैये को सार्वजनिक पटल पर उजागर कर दिया है, जहां आपातकालीन वाहनों की पानी की धार से कहीं रिहायशी परिसर धोया गया तो कहीं विधायक की निजी कार चमकाई गई।
दाहोद में दमकल गाड़ी से विधायक के आवास पर पानी का छिड़काव
पहला मामला गुजरात राज्य के दाहोद जिले के अंतर्गत आने वाले देवगढ़ बारिया क्षेत्र का है। वहां देवगढ़ बारिया से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री बचुभाई खाबाद के धनपुर तालुका स्थित निजी आवास पर नगर पालिका का एक दमकल वाहन पानी का छिड़काव करता हुआ देखा गया। इस घटना का वीडियो कैमरे में दर्ज होने के बाद जब सार्वजनिक मंचों पर सामने आया, तब स्थानीय स्तर पर व्यापक असंतोष और चर्चा देखने को मिली।
देवगढ़ बारिया नगरपालिका के अध्यक्ष घमेश कलाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि उन्हें विधायक कार्यालय की ओर से दमकल वाहन भेजने का फोन आया था। नगर पालिका अध्यक्ष के अनुसार, उन्हें यह अंदेशा हुआ कि शायद वहां कोई विकट आपात स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसके चलते उन्होंने बिना किसी विलंब के तत्काल वाहन को रवाना कर दिया। हालांकि, जब दमकल विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और वहां तैनात दमकल कर्मियों ने सूचित किया कि गाड़ी का उपयोग आग बुझाने के बजाय केवल आवास धोने के लिए किया जा रहा है, तो अधिकारियों ने तुरंत प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हुए छिड़काव कार्य रुकवा दिया। इस पूरे विवाद के बढ़ने और जनदबाव बनने के पश्चात नगर पालिका प्रशासन ने विधायक बचुभाई खाबाद पर 2,700 रुपये का जुर्माना लगाया और उसकी वसूली की।
सिंगरौली में दमकल से विधायक की निजी कार धोने पर राजनीतिक विवाद
इसी तरह का दूसरा प्रकरण मध्य प्रदेश के सिंगरौली से प्रकाश में आया था, जहां 26 अगस्त 2026 को बीजेपी विधायक रामनिवास शाह के सरकारी आवास के बाहर का एक दृश्य सामने आया। इस दृश्य में नगर निगम के कर्मचारी दमकल वाहन के भारी दबाव वाले होजपाइप का इस्तेमाल करके विधायक की सफेद रंग की टोयोटा इनोवा कार को धोते हुए दिखाई दिए। आपातकालीन वाहन को व्यक्तिगत वाहन धुलाई केंद्र के रूप में प्रयुक्त होते देख राज्य की राजनीति में तीव्र प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
विपक्षी नेता उमंग सिंघार ने इस घटना पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब आम नागरिकों के घरों या प्रतिष्ठानों में आग लगती है, तब दमकल की गाड़ियां अक्सर समय पर नहीं पहुंच पातीं, लेकिन सत्ताधारी दल के विधायक के लिए वही सरकारी जीवनरक्षक गाड़ी एक निजी सर्विस स्टेशन बन गई है। राजनीतिक विवाद गहराने पर विधायक रामनिवास शाह ने अपना पक्ष रखते हुए सवालिया लहजे में कहा कि क्या कोई विधायक खुद अपनी गाड़ी धोता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्टीकरण दिया कि जिस समय यह वाकया हुआ, उस दौरान वह अपने सरकारी आवास पर उपस्थित नहीं थे, इसलिए उन्हें इसकी पहले से कोई जानकारी नहीं थी। अपने बचाव में उन्होंने यह संभावना भी व्यक्त की कि नगर निगम के टैंकों में जल आपूर्ति बाधित होने के कारण शायद यह वाहन संबंधित अधिकारियों के निवास पर पानी पहुंचाने के उद्देश्य से वहां गया होगा।
वीआईपी मानसिकता और आपातकालीन सेवाओं की जवाबदेही
इन दोनों परस्पर मिलती-जुलती घटनाओं ने सार्वजनिक जीवन में उत्तरदायित्व और संसाधनों के उपयोग को लेकर बुनियादी सवाल खड़े कर दिए हैं। दमकल सेवा किसी भी नागरिक समाज में जीवन और संपत्ति की रक्षा के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहने वाली अनिवार्य आपातकालीन सेवा है। जब ऐसे संसाधनों को सत्ता के प्रभाव में निजी कारों की धुलाई या परिसरों की सफाई में झोंक दिया जाता है, तो यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं बल्कि आम जनता के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति असंवेदनशीलता को भी दर्शाता है। प्रशासनिक मशीनरी में जब तक ऐसे कृत्यों के प्रति सख्त जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक सार्वजनिक सेवाओं का व्यक्तिगत उपयोग रोकना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।



















