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पंजाब पुलिस के बर्खास्त AIG राज जीत सिंह तीन साल बाद पटियाला से पकड़े गए, ड्रग्स गठजोड़ का है आरोपपंजाब
24 सित॰ 2026, 2:37 pm (43 दिन पहले)· 2

पंजाब पुलिस के बर्खास्त AIG राज जीत सिंह तीन साल बाद पटियाला से पकड़े गए, ड्रग्स गठजोड़ का है आरोप

पंजाब पुलिस और नशा तस्करों के बीच कथित सांठगांठ मामले में पिछले करीब तीन साल से फरार बर्खास्त AIG राज जीत सिंह को एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने पटियाला से हिरासत में ले लिया है।

पंजाब में पुलिस अफसरों और मादक पदार्थ तस्करों की कथित मिलीभगत के मामले में करीब तीन साल से बचते फिर रहे पूर्व सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) राज जीत सिंह को पटियाला से गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच अधिकारियों ने उन्हें गुरुवार के दिन पटियाला स्थित दर्शन सिंह नगर के एक रिहायशी ठिकाने से दबोचा। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को लंबे समय से उनकी तलाश थी, जिसके बाद यह अहम कामयाबी हाथ लगी है।

एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कार्रवाई

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, बर्खास्त अधिकारी को पकड़ने का अभियान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की एक विशेष टीम ने पूरा किया। इस पूरे ऑपरेशन को तकनीकी निगरानी और वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण के आधार पर अंजाम दिया गया। अधिकारी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, लेकिन डिजिटल साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड्स की पड़ताल ने जांच एजेंसी को सीधे पटियाला के उस मकान तक पहुंचा दिया जहां वह छिपा हुआ था।

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अप्रैल 2023 में मुख्यमंत्री ने किया था बर्खास्त

राज जीत सिंह को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अप्रैल 2023 में सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया था। यह कड़ा प्रशासनिक कदम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की निगरानी में गठित विशेष जांच दल (SIT) की तीन अलग-अलग रिपोर्टों के अध्ययन के बाद उठाया गया था। इन रिपोर्टों में खाकी और नशे के काले कारोबारियों के बीच की गहरी सांठगांठ का सिलसिलेवार ब्योरा दर्ज किया गया था, जिसके आधार पर राज्य सरकार ने विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाई थी।

2017 में बनी SIT और इंदरजीत सिंह कनेक्शन

पुलिस अधिकारियों के विवरण के मुताबिक, इस मामले की जड़ें वर्ष 2017 से जुड़ी हैं जब विशेष जांच दल का गठन किया गया था। उस दौरान टीम को निर्देश दिया गया था कि मोगा के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) राज जीत सिंह और बर्खास्त पुलिस निरीक्षक इंदरजीत सिंह के बीच के कथित संपर्कों की गहन छानबीन की जाए। इंदरजीत सिंह को साल 2017 में ही स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बरामदगी के तुरंत बाद पुलिस महकमे से बर्खास्त कर दिया गया था।

जांच रिपोर्ट में सांठगांठ और रिकॉर्ड के खुलासे

विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि ऐसे ठोस तथ्य मौजूद हैं जो राज जीत सिंह की इंदरजीत सिंह के साथ गहरी संलिप्तता की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2023 में जारी सरकारी आदेश में रेखांकित किया गया था कि SIT की तीनों रिपोर्टों की सामग्री से दोनों अधिकारियों के आपसी तालमेल और ड्रग सिंडिकेट के साथ उनके रिश्तों का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया कि कानून के रक्षक ही नशा तस्करों के ढाल बनकर काम कर रहे थे।

50 से अधिक नमूनों के फेल होने और पद के दुरुपयोग का मामला

प्रशासनिक आदेश के अनुसार, जब राज जीत सिंह तरनतारन के SSP थे और इंदरजीत सिंह सीआईए (CIA) प्रभारी के पद पर तैनात थे, उस दौरान NDPS Act से संबंधित मामलों के 50 से अधिक सैंपल जांच में फेल पाए गए थे। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग करते हुए निजी फायदे कमाए। उन्होंने नशा तस्करों को सख्त कानूनी कार्रवाई से बचाया, बेकसूर नागरिकों को फर्जी मामलों में उलझाया और इंदरजीत सिंह के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच को भटकाने का प्रयास किया।

तकनीकी खामियों का फायदा और जबरन वसूली

सरकारी आदेश में यह भी दर्ज किया गया था कि राज जीत सिंह NDPS Act की विधिक और तकनीकी बारीकियों को भली-भांति समझते थे। उन्होंने बर्खास्त निरीक्षक इंदरजीत सिंह के साथ मिलकर इन कानूनी पेचीदगियों का इस्तेमाल तस्करों को बचाने और कथित तौर पर धन उगाही करने के लिए किया। कानून की खामियों का सहारा लेकर गंभीर अपराधियों को सजा से दूर रखने में मदद की गई। पटियाला से गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस और जांच एजेंसियां उनके खिलाफ आगे की विधिक प्रक्रिया पूरी कर रही हैं।

सवाल-जवाब

राज जीत सिंह कौन हैं और उन्हें कहां से गिरफ्तार किया गया?
राज जीत सिंह पंजाब पुलिस के बर्खास्त सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) हैं, जिन्हें एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने पटियाला के दर्शन सिंह नगर स्थित एक मकान से पकड़ा है।
राज जीत सिंह कितने समय से फरार चल रहे थे?
वह पुलिस अधिकारियों और कथित नशा तस्करों के बीच गठजोड़ से जुड़े मामले में पिछले करीब तीन साल से फरार चल रहे थे।
उन्हें पंजाब पुलिस सेवा से कब और किसने बर्खास्त किया था?
उन्हें अप्रैल 2023 में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सेवा से बर्खास्त किया था।
बर्खास्तगी का आधार क्या था?
यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की तीन रिपोर्टों के आधार पर की गई थी।
एसआईटी का गठन कब हुआ था और इसे क्या जांच सौंपी गई थी?
एसआईटी का गठन वर्ष 2017 में तत्कालीन मोगा एसएसपी राज जीत सिंह और बर्खास्त इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह की कथित संलिप्तता की जांच के लिए किया गया था।
इंदरजीत सिंह को कब बर्खास्त किया गया था?
इंदरजीत सिंह को साल 2017 में स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा मादक पदार्थ बरामद किए जाने के बाद बर्खास्त किया गया था।
तरनतारन में तैनाती के दौरान क्या गड़बड़ी सामने आई थी?
सरकारी आदेश के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान एनडीपीएस एक्ट से जुड़े 50 से अधिक मामलों के फॉरेंसिक सैंपल फेल पाए गए थे।
राज जीत सिंह पर क्या मुख्य आरोप हैं?
उन पर पद का दुरुपयोग कर नशा तस्करों को बचाने, निर्दोषों को झूठे मुकदमों में फंसाने, जबरन वसूली करने और जांच को प्रभावित करने के आरोप हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Tanvi Desai@tanvi-desai·42 दिन पहले

तीन साल तक पुलिस की गिरफ्त से बचकर ये साहब आखिर इतने दिन कहां छिपे रहे और इनकी मदद कौन कर रहा था?

Ravikash Gupta@ravikash·43 दिन पहले

तीन साल तक पुलिस की गिरफ्त से बचना कोई मामूली बात नहीं है, खासकर तब जब खुद महकमा आपके पीछे पड़ा हो। तकनीकी निगरानी और बैंक रिकॉर्ड्स की मदद से अंततः वह पकड़ा गया, लेकिन इतने लंबे वक्त तक उसे पनाह किसने दी होगी?

Arjun Mehta@arjun-mehta·43 दिन पहले

रविकेश जी, बिल्कुल सही सवाल है आपका। जब मैं मोगा में था, तब भी लोग यही कहते थे कि खाकी के भीतर से ही इसे बचाया जा रहा है, वरना कोई इतने साल छिप नहीं सकता था।

Rohan Verma@rohan-verma·43 दिन पहले

तीन साल तक पुलिस की गिरफ्त से बचना अजीब है, शायद विभाग में अब भी मदद करने वाले लोग बैठे हों।

Karan Malhotra@karan-malhotra·43 दिन पहले

रोहन, बात तो सही है। क्या लगता है, टेक्निकल सर्विलांस ने मदद की या कोई अंदर का सुराग मिला?

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