प्रवर्तन निदेशालय की एक गहन वित्तीय जांच के केंद्र में एक राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व मंत्री के बीच हुआ करीब 30 लाख रुपये का वित्तीय लेनदेन आ गया है। जांच एजेंसी के हाथ ऐसे ठोस दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य लगे हैं जो एक पूर्व मंत्री से जुड़े बैंक खाते से तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी बैंक खाते में भेजी गई धनराशि की ओर इशारा करते हैं। शुरुआत में जब अधिकारियों ने इस धन प्रवाह के औचित्य और बैंकिंग माध्यमों की पड़ताल शुरू की, तब मिले बयानों ने मामले को सामान्य वित्तीय ट्रांसफर के बजाय गंभीर संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। प्रारंभिक पूछताछ में दिए गए स्पष्टीकरणों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होने के बाद एजेंसी अब वरिष्ठ स्तर पर इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
तलाशी अभियान में जब्त उपकरणों से खुला संदिग्ध लेनदेन
इस पूरे मामले की नींव तब पड़ी जब प्रवर्तन निदेशालय की विशेष टीमों ने पूर्व मंत्री और उनके नजदीकी सहयोगियों के विभिन्न ठिकानों पर व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया था। इस सघन छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में वित्तीय दस्तावेज, फाइलें और कंप्यूटर हार्डवेयर समेत कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे। इन्हीं डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड्स के फॉरेंसिक विश्लेषण के दौरान अधिकारियों को एक बड़े बैंक खाते से तत्कालीन मुख्यमंत्री के खाते में कई किस्तों में भेजी गई धनराशि का सुराग मिला। टीम ने मामले की संवेदनशीलता को भांपते हुए तत्काल अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया, जिसके बाद पूरे मामले की निगरानी उच्च स्तर पर शुरू कर दी गई।
गीत लिखने के बदले भुगतान का अजीबोगरीब दावा
प्रारंभिक पूछताछ के दौरान इस वित्तीय लेनदेन को लेकर जो दलील सामने रखी गई, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। पूर्व मंत्री की ओर से यह दावा किया गया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के भीतर एक रचनात्मक कलाकार और गीतकार की प्रतिभा मौजूद है। इस कलात्मक क्षमता को पहचानते हुए उनसे एक विशेष गीत की रचना करने का आग्रह किया गया था। इस दावे के मुताबिक, तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उनके लिए एक गीत लिखा था और उसी रचनात्मक पारिश्रमिक के एवज में यह पूरी रकम दी गई थी। यह भी बताया गया कि एक संस्था के माध्यम से अलग-अलग समय पर लगभग 30 लाख रुपये की राशि तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी।
व्हाट्सएप से गीत डिलीट होने की दलील से गहराया शक
जांच एजेंसी के अधिकारियों ने जब इस दावे की पुष्टि के लिए लिखे गए मूल गीत, उससे संबंधित अनुबंध या किसी औपचारिक रिकॉर्ड की मांग की, तो स्थिति और अधिक उलझ गई। इस पर यह सफाई पेश की गई कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने वह गीत व्हाट्सएप पर लिखकर भेजा था, लेकिन बाद में वह मैसेज दुर्घटनावश डिलीट हो गया। लिखित प्रमाण, ऑडियो रिकॉर्डिंग या किसी सार्वजनिक रिकॉर्ड की गैरमौजूदगी और डिलीट होने के इस तर्क ने पूरी कहानी को अत्यधिक संदिग्ध बना दिया है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इतनी बड़ी रकम के लेनदेन के पीछे कोई ठोस आधार न होना और इस तरह के तर्क देना केवल वास्तविक उद्देश्य को छिपाने की कोशिश हो सकती है।
वरिष्ठ निदेशक स्तर के अधिकारियों की निगरानी और आगे का रुख
मामले की गंभीरता और इसमें शामिल बड़े संवैधानिक पदों की पृष्ठभूमि को देखते हुए जांच एजेंसी के कई निदेशक स्तर के वरिष्ठ अधिकारी पूरी पड़ताल की सीधी निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल संबंधित नेताओं के आधिकारिक नाम गोपनीय रखे गए हैं ताकि तफ्तीश की प्रक्रिया प्रभावित न हो। जांच एजेंसी ने औपचारिक स्तर पर अभी किसी भी नाम की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है। एजेंसी की प्राथमिक रणनीति पहले पूर्व मंत्री को तलब कर उनके वित्तीय स्रोतों, संस्था के बैंक रिकॉर्ड और लेनदेन के साक्ष्यों पर विस्तृत बयान दर्ज करने की है। इसके बाद तथ्यों के आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री को भी औपचारिक पूछताछ के लिए समन जारी करने की संभावना तलाशी जा रही है।
















