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पूर्व सांसद सज्जन कुमार के निधन के बाद याद आई 1984 दंगे की खौफनाक गवाही, चाम कौर के बयानों से हिला था कोर्टबिहार
20 अग॰ 2026, 3:48 pm (36 दिन पहले)· 2

पूर्व सांसद सज्जन कुमार के निधन के बाद याद आई 1984 दंगे की खौफनाक गवाही, चाम कौर के बयानों से हिला था कोर्ट

1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उनके निधन के बाद 1984 दंगों के दौरान अदालत में दर्ज हुई पीड़िता चाम कौर की खौफनाक गवाही एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। 20 अगस्त 2026 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली, जहां स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें भर्ती कराया गया था। सज्जन कुमार की मौत की पुष्टि होने के साथ ही वर्ष 1984 के उस दौर की दर्दनाक कहानियां और अदालती सुनवाई एक बार फिर लोगों की यादों में ताजा हो गई हैं। उस दौरान अदालत के कटघरे में दर्ज हुई गवाहियों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इनमें से एक सबसे खौफनाक और दिल दहला देने वाला बयान चाम कौर का था। चाम कौर की गवाही में न केवल दंगाइयों की बर्बरता का कच्चा चिट्ठा था, बल्कि उनके अपने परिवार पर टूटे दुखों का वह पहाड़ भी शामिल था, जिसने कोर्ट रूम में मौजूद हर शख्स को सिहरा दिया था।

अदालत के कटघरे में चाम कौर का खौफनाक बयान

नवंबर 2018 में चाम कौर ने दिल्ली की अदालत में पेश होकर ऐतिहासिक गवाही दी थी। उन्होंने कटघरे में खड़े होकर सज्जन कुमार की स्पष्ट पहचान की थी और हिंसा भड़काने के उनके दावों को अदालत के सामने रखा था। चाम कौर ने बताया था कि 1 नवंबर 1984 की सुबह जब वह अपने घर से बाहर निकली थीं, तब उन्होंने भीड़ के सामने सज्जन कुमार को कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देते सुना था। उन्होंने अदालत को बताया कि सज्जन कुमार भीड़ से कह रहे थे कि सिखों ने हमारी मां को मार डाला है, इसलिए उन्हें मार डालो। यहां मां शब्द का इस्तेमाल देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए किया गया था। चाम कौर ने अदालत में यह भी साफ किया कि वह सज्जन कुमार को घटना से बहुत पहले से जानती थीं। वह राशन कार्ड बनवाने और अन्य सरकारी कागजी कामकाज के सिलसिले में उनके पास जाया करती थीं। यही वजह थी कि भीड़ में देखने के बाद भी उन्हें सज्जन कुमार की पहचान करने में कोई दुविधा या परेशानी नहीं हुई।

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गवाही के बाद परिवार पर टूटा बर्बरता का कहर

चाम कौर की गवाही का सबसे दर्दनाक और भयावह हिस्सा उनके अपने परिवार के साथ हुई त्रासदी से जुड़ा था। उन्होंने अदालत के सामने उस खौफनाक मंजर का ब्योरा दिया, जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूल सकीं। चाम कौर के अनुसार, भड़काऊ भाषण के अगले ही दिन हमलावरों की भीड़ उनके घर तक पहुंच गई। उस समय उनके पिता सरदारजी सिंह और उनका बेटा कपूर सिंह घर की दूसरी मंजिल पर बने एक कमरे में छिपे हुए थे। उपद्रवियों ने उनकी छिपने की जगह का पता लगा लिया और दोनों को खींचकर बाहर निकाला। इसके बाद भीड़ ने पिता और पुत्र पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। बुरी तरह मारपीट करने के बाद उपद्रवियों ने दोनों को छत से नीचे फेंक दिया। इस दौरान चाम कौर ने उन्हें बचाने की कोशिश की तो उनके साथ भी बेरहमी से मारपीट की गई। अदालत में इस आपबीती को सुनाते समय पूरा माहौल गमगीन हो गया था।

शीला कौर का बयान और सजा का न्यायिक सफर

1984 की हिंसा से जुड़े इस मामले में चाम कौर अकेली प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं थीं। उनसे पहले एक अन्य पीड़िता शीला कौर ने भी अदालत में सज्जन कुमार की पहचान की थी और उनके खिलाफ गवाही दी थी। दोनों महिलाओं के बयानों ने दिल्ली कैंट और पलम कॉलोनी इलाके में हुई हिंसा के मामले में सज्जन कुमार की भूमिका को तय करने में अहम कड़ी का काम किया। दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए सज्जन कुमार को पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को आग के हवाले करने के जुर्म में दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनाई। सज्जन कुमार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया, जहां वह अपनी सजा काट रहे थे। इसके बाद फरवरी 2025 में 1984 के दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में भी उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, हालांकि कुछ अन्य मुकदमों में उन्हें अदालतों से राहत भी मिली थी।

सज्जन कुमार के निधन के साथ एक दौर का अंत

20 अगस्त 2026 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में सज्जन कुमार के निधन के साथ ही 1984 के दंगों से जुड़ी कानूनी लड़ाइयों का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है। तिहाड़ जेल में सजा काटने के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उनके निधन की पुष्टि की। उनकी मौत के बाद 1984 की हिंसा, पीड़ितों के संघर्ष और अदालती बहसों की चर्चाएं एक बार फिर शुरू हो गई हैं। चाम कौर की गवाही आज भी उस दौर की भयावहता की गवाह बनी हुई है। वह सिर्फ एक कानूनी बयान नहीं था, बल्कि एक ऐसी महिला की आंखों देखी दर्दभरी दास्तान थी, जिसने अपनी आंखों के सामने अपने पिता और बेटे को खो दिया था।

सवाल-जवाब

सज्जन कुमार कौन थे और उनका निधन कब हुआ?
सज्जन कुमार कांग्रेस के पूर्व सांसद थे, जिन्हें 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। 20 अगस्त 2026 को 80 वर्ष की आयु में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उनका निधन हो गया।
अदालत में चाम कौर ने सज्जन कुमार के खिलाफ क्या गवाही दी थी?
चाम कौर ने नवंबर 2018 में अदालत में गवाही देते हुए बताया कि 1 नवंबर 1984 को उन्होंने सज्जन कुमार को कथित तौर पर भीड़ को उकसाते हुए यह कहते सुना था कि सिखों ने हमारी मां को मार डाला है, उन्हें मार डालो।
चाम कौर ने अदालत में सज्जन कुमार की पहचान आसानी से कैसे कर ली?
चाम कौर घटना से पहले से सज्जन कुमार को जानती थीं क्योंकि वह राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों के काम के सिलसिले में उनके पास जाया करती थीं।
1984 की हिंसा में चाम कौर के परिवार के साथ क्या त्रासदी हुई थी?
भड़काऊ बयान के अगले ही दिन उपद्रवियों की भीड़ ने उनके घर की दूसरी मंजिल पर छिपे उनके पिता सरदारजी सिंह और बेटे कपूर सिंह को बाहर निकाला, उनके साथ मारपीट की और उन्हें छत से नीचे फेंक दिया।
सज्जन कुमार को अदालत से क्या-क्या सजाएं मिली थीं?
दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें दिल्ली कैंट-पलम कॉलोनी इलाके में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे में आगजनी के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद फरवरी 2025 में एक अन्य मामले में भी उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी।
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