संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान इस्लामिक सहयोग संगठन द्वारा कश्मीर से जुड़े दावों को दोहराने पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने इस रुख को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार की टिप्पणियां पूरी तरह अनुचित और सच्चाई से परे हैं। भारत सरकार ने दोहराया कि पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के किसी भी हिस्से से संबंधित आंतरिक मामलों पर हस्तक्षेप करने का ओआईसी के पास कोई वैध या कानूनी आधार नहीं है। राजनीतिक प्रेरणा से संचालित कोई भी दुर्भावनापूर्ण अभियान जमीनी हकीकत को तनिक भी प्रभावित नहीं कर सकता।
साख और अधिकार क्षेत्र पर सवाल
विदेश मंत्रालय ने ओआईसी के तथाकथित संपर्क समूह के वक्तव्यों पर ऐतराज जताते हुए कहा कि भारत के संप्रभु क्षेत्र पर किसी भी तीसरे पक्ष का अधिकार क्षेत्र स्वीकार नहीं किया जा सकता। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सदैव भारत के अविभाज्य हिस्से रहे हैं और आगे भी रहेंगे। नई दिल्ली ने रेखांकित किया कि पाकिस्तान द्वारा गढ़े गए झूठे आख्यानों को बार-बार अपने मंच से प्रसारित कर संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केवल अपनी विश्वसनीयता खो रहा है। किसी भी बाहरी समूह को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है।
मंच के दुरुपयोग और सीमा पार हिंसा पर सख्त रुख
भारत ने कड़े लहजे में कहा कि इस वैश्विक निकाय को एक खास देश के गलत प्रचार का माध्यम बनने से बचना चाहिए। संगठन को अपने मंच के अनुचित इस्तेमाल पर रोक लगानी चाहिए और इसके बजाय पाकिस्तान को अपने गिरेबान में झांकने की स्पष्ट सीख देनी चाहिए। दशकों से सीमा पार हिंसा को बढ़ावा देने और आतंक को प्रश्रय देने का पाकिस्तान का एक लंबा रिकॉर्ड रहा है।
क्षेत्रीय शांति और आतंकी ढांचे का मुद्दा
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह पक्ष भी रखा कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाकों से संचालित आतंकी नेटवर्क आज भी पूरे क्षेत्र की शांति के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। जब तक आतंकी शिविरों का संचालन और वित्तीय मदद पूरी तरह बंद नहीं होती, तब तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर गढ़े गए बयानों के जरिए इस कड़वी हकीकत को छिपाया नहीं जा सकता।


















