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राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में फर्जीवाड़े के बाद सख्त हुए नियम, अब डॉक्टर को खुद करनी होगी पर्ची की जांचराजस्थान
29 अग॰ 2026, 6:42 pm (27 दिन पहले)· 2

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में फर्जीवाड़े के बाद सख्त हुए नियम, अब डॉक्टर को खुद करनी होगी पर्ची की जांच

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में घोटालों के खुलासे के बाद नियमों को कड़ा कर दिया गया है। अब इलाज की पर्ची पर डॉक्टर के खुद के हस्ताक्षर और मुहर होना अनिवार्य कर दिया गया है।

जयपुर में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी आरजीएचएस के तहत हुए घोटालों के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बढ़ा दी गई है। व्यवस्था में खामियों को दूर करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनके तहत अब मरीजों की पर्चियों पर संबंधित डॉक्टर का खुद सत्यापन करना अनिवार्य कर दिया गया है। एम्पैनल्ड चिकित्सक को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि पर्ची पर लिखी गई तमाम जानकारियां और इलाज से जुड़े दस्तावेज पूरी तरह सही हैं। इसके बाद डॉक्टर को अपने हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर लगाकर पर्ची को सत्यापित करना होगा।

घोटालों की जांच में सामने आई थी बड़ी लापरवाही

हाल ही में आरजीएचएस के अंतर्गत सामने आए घोटालों की जब गहराई से जांच की गई, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। जांच के दौरान कई ऐसी पर्चियां मिलीं जिन पर इलाज करने वाले मुख्य डॉक्टर के हस्ताक्षर ही मौजूद नहीं थे। उन पर्चियों पर डॉक्टर की बजाय जूनियर रेजिडेंट्स या अन्य सहायक कर्मियों के हस्ताक्षर पाए गए। यानी जिस डॉक्टर के नाम से दवाइयां और इलाज अप्रूव हुआ था, उन्होंने खुद वह पर्ची देखी तक नहीं थी। इस तरह की गंभीर अनियमितताओं के सामने आने के बाद ही नियमों को सख्त करने का निर्णय लिया गया है और यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अब इस मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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डॉक्टर के लिए सेल्फ-वेरिफिकेशन अनिवार्य

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब एम्पैनल्ड चिकित्सकों की सीधी जवाबदेही तय कर दी गई है। संबंधित डॉक्टर को खुद पर्ची की सत्यता की जांच करनी होगी और उसके बाद ही उसका वेरिफिकेशन करना होगा। डॉक्टर को अपनी मुहर और हस्ताक्षर के जरिए यह प्रमाणित करना होगा कि पर्ची उनके अपने स्तर पर जांची गई है। इसका साफ अर्थ यह है कि यदि डॉक्टर की जगह कोई जूनियर रेजिडेंट या अन्य स्टाफ हस्ताक्षर करता है, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी। अस्पतालों और डॉक्टरों को यह पुख्ता करना होगा कि सभी प्रक्रियाएं तय नियमों के तहत ही पूरी हों।

अन्य व्यक्ति के हस्ताक्षर मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई

आरजीएचएस प्रशासन ने यह भी बिल्कुल साफ कर दिया है कि यदि डॉक्टर के स्थान पर किसी दूसरे व्यक्ति के हस्ताक्षर पाए गए, तो संबंधितों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। केवल डॉक्टर के नाम से पर्ची बनवा देना अब काफी नहीं होगा, बल्कि चिकित्सक को खुद पर्ची देखकर उस पर अपने हस्ताक्षर और मुहर लगानी होगी। इस सख्त नियम का मुख्य उद्देश्य पर्चियों के नाम पर होने वाली गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लगाना है। पिछली जांच में जब जूनियर कर्मचारियों के हस्ताक्षर मिले थे, तब इस पूरी प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हुए थे, जिन्हें अब दूर किया जा रहा है।

परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने दी पूरी जानकारी

इस पूरे मामले पर आरजीएचएस की परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि अब संबंधित डॉक्टर का खुद का सत्यापन यानी सेल्फ-वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। एम्पैनल्ड चिकित्सक को अपने हस्ताक्षर और मुहर के माध्यम से पर्ची को प्रमाणित करना ही होगा। घोटालों के खुलासे के बाद अब पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखी जा रही है और डॉक्टरों की भूमिका को सीधे तौर पर तय किया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताएं दोबारा न हो सकें।

सवाल-जवाब

आरजीएचएस में नया नियम क्या लागू किया गया है?
अब मरीज की पर्ची पर संबंधित डॉक्टर का खुद हस्ताक्षर और मुहर के साथ सत्यापन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
नियम सख्त करने की मुख्य वजह क्या थी?
घोटालों की जांच के दौरान पर्चियों पर डॉक्टरों के बजाय जूनियर कर्मचारियों के हस्ताक्षर मिलने के कारण यह कदम उठाया गया है।
यदि डॉक्टर की जगह कोई अन्य व्यक्ति हस्ताक्षर करे तो क्या होगा?
आरजीएचएस ने स्पष्ट किया है कि ऐसा पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बारे में आधिकारिक जानकारी किसने दी है?
आरजीएचएस की परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने इस नई व्यवस्था की जानकारी दी है।
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