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राजस्थान के सांसद राजकुमार रोत पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, आदिवासी क्षेत्रों में शहरी निकायों के गठन की मांग पर केंद्र को निर्देशराजस्थान
4 अग॰ 2026, 5:33 pm (53 दिन पहले)· 1

राजस्थान के सांसद राजकुमार रोत पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, आदिवासी क्षेत्रों में शहरी निकायों के गठन की मांग पर केंद्र को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान से सांसद राजकुमार रोत की उस याचिका का निपटारा कर दिया है जिसमें अनुसूचित क्षेत्रों में शहरी स्थानीय निकाय लागू करने की मांग की गई थी। अदालत ने केंद्र सरकार को कानून के दायरे में जल्द विचार करने को कहा है।

अनुसूचित क्षेत्रों के भीतर शहरी स्थानीय निकायों के सुचारू गठन और क्रियान्वयन से जुड़े एक अहम मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली है। राजस्थान के सांसद राजकुमार रोत की तरफ से इस संबंध में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसके बाद अदालत ने इस अर्जी का निपटारा करते हुए केंद्र सरकार को इस पर कानूनी प्रावधानों के अनुसार विचार करने के निर्देश दिए हैं।

सांसद ने क्या उठाई थी मांग

यह कानूनी कदम भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत की ओर से उठाया गया था। उनका मुख्य तर्क यह था कि संविधान की पाँचवीं अनुसूची और आर्टिकल 243ZC के तहत आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विकास तथा स्थानीय शासन के लिए जो विशेष अधिकार निर्धारित किए गए हैं, वे जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रहे हैं। उनका यह भी कहना था कि 74वें संविधान संशोधन के जरिए शहरी क्षेत्रों को जो स्वशासन के अधिकार प्रदान किए गए हैं, उनका पूरा लाभ इन जनजातीय क्षेत्रों की शहरी आबादी को नहीं मिल पा रहा है।

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अदालत की कार्यवाही और निर्देश

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के नीतिगत और प्रशासनिक विषयों पर निर्णय लेने के लिए सबसे पहले केंद्र सरकार के स्तर पर विचार होना आवश्यक है। इसी आधार पर याचिकाकर्ता को यह सलाह दी गई कि वे अपनी सभी माँगो और तर्कों का एक विस्तृत विवरण संबंधित मंत्रालय या प्राधिकारी को सौंपें। इसके साथ ही, केंद्र सरकार को यह ताकीद की गई है कि वह प्राप्त होने वाले इस ज्ञापन पर विधिक नियमों के अनुसार यथाशीघ्र उचित निर्णय ले।

कानूनी और संवैधानिक पहलू

इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सांसद की पैरवी एडवोकेट अनिलेंद्र पांडेय, आरती साह और अनिमेष शुक्ला ने की। यह पूरा प्रकरण भारतीय संविधान के संघीय और स्थानीय प्रशासनिक ढाँचे से जुड़ा हुआ है। जब कभी जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्यों या शासन प्रणालियों की बात आती है, तो वहाँ की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना बेहद जरूरी हो जाता है। अब यह पूरा मामला केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में चला गया है, जहाँ उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि स्थानीय आदिवासियों की विशिष्ट संस्कृति और पहचान पर कोई आँच आए बिना शहरी विकास और नगर निकायों के तंत्र को किस प्रकार मजबूत किया जाए।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने राजकुमार रोत की याचिका पर क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए सांसद को केंद्र सरकार को विस्तृत ज्ञापन सौंपने को कहा और केंद्र को कानून के अनुसार विचार करने का निर्देश दिया।
यह याचिका किसने दाखिल की थी?
यह याचिका भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत द्वारा दाखिल की गई थी।
याचिका में मुख्य रूप से क्या माँग की गई थी?
अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निगम और नगर पालिका जैसे शहरी स्थानीय निकायों को सही ढंग से लागू करने की माँग की गई थी।
याचिका में किन संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया गया था?
याचिका में संविधान की 5वीं अनुसूची और आर्टिकल 243ZC का हवाला दिया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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