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राजस्थान में 20 सितंबर को दोतरफा मौसम, पूर्वी अंचल में आंधी और बिजली तो पश्चिम में सूखाराजस्थान
19 सित॰ 2026, 5:10 pm (6 दिन पहले)· 0

राजस्थान में 20 सितंबर को दोतरफा मौसम, पूर्वी अंचल में आंधी और बिजली तो पश्चिम में सूखा

राजस्थान में 20 सितंबर को मौसम का मिजाज दो विपरीत छोरों पर बंटा रहेगा, जहां कोटा और उदयपुर संभाग के जिलों में आंधी के साथ बौछारों की संभावना है, वहीं थार और पश्चिमी जिलों में धूप और सूखा बना रहेगा।

प्रदेश के वायुमंडल में 20 सितंबर को मौसमी दशाएं दो साफ धड़ों में विभाजित नजर आने वाली हैं। भौगोलिक संरचना के अनुसार जहां पूर्वी और दक्षिणी छोर पर बादलों की हलचल तेज रहने वाली है, वहीं पश्चिमी भूभाग पूरी तरह साफ और सूखा दर्ज किया जाएगा। मौसमी आकलन के अनुसार विशेष तौर पर कोटा तथा उदयपुर संभागों के अंतर्गत आने वाले इलाकों में छिटपुट बौछारें पड़ने के आसार बन रहे हैं। 19 और 20 सितंबर के दौरान दक्षिण-पूर्वी तथा पूर्वी बेल्ट में कुछ चुनिंदा स्थानों पर मध्यम से लेकर तेज दर्जे की वर्षा गतिविधियां भी दर्ज हो सकती हैं, जबकि इसके उलट पश्चिमी संभागों में बादलों की आवाजाही नदारद रहेगी और शुष्क हवाएं प्रभावी रहेंगी।

पूर्वी अंचल के आठ जिलों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली की चेतावनी

पूर्वी भूभाग के आठ विशिष्ट जिलों पर मौसमी तंत्र का गहरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। इन चिन्हित क्षेत्रों में बांसवाड़ा, बारां, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूम्बर और उदयपुर शामिल हैं। यहां आसमान में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की गंभीर आशंका व्यक्त की गई है। इसके अतिरिक्त इन जनपदों में हवा के तेज झोंके चलने का अंदेशा जताया गया है, जिनकी गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

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दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के भूभाग में मौसमी सक्रियता अपेक्षाकृत अधिक केंद्रित रहने वाली है। बांसवाड़ा, बारां, झालावाड़ और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में आकाशीय बिजली चमकने, मेघगर्जन होने और साथ में वर्षा के कारण परिस्थितियों में अचानक खराबी आ सकती है। इसके अलावा डूंगरपुर, राजसमंद, सलूम्बर और उदयपुर के निवासियों को भी आंधी और वज्रपात को लेकर पहले से सचेत रहने की जरूरत होगी। जब आसमान में बिजली कड़क रही हो, तब किसी भी व्यक्ति को खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या असुरक्षित संरचनाओं में खड़े होने से परहेज करना चाहिए।

कोटा और उदयपुर संभागों में वर्षा का फैलाव

दैनिक मौसमी आकलन के अनुसार कोटा और उदयपुर संभाग के सभी हिस्सों में एक जैसी मूसलाधार बारिश नहीं होगी, बल्कि यह दायरा संभाग के अलग-अलग क्षेत्रों में खंडित रूप से देखने को मिलेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि समूचे संभाग में सर्वव्यापी बारिश न होकर सिर्फ चुनिंदा पॉकेट्स में ही मेघ बरसेंगे। स्थानीय स्तर पर बादलों का जमावड़ा दक्षिण-पूर्वी बेल्ट में अधिक भारी रह सकता है, जिससे वहां के कृषि क्षेत्रों और कस्बों में जलभराव या तेज हवाओं के झोंके दैनिक कार्यों को बाधित कर सकते हैं।

विशेष रूप से उदयपुर जिले में संभागस्तरीय संभावनाओं के अनुरूप कहीं-कहीं बौछारें गिर सकती हैं, जबकि जिले भर में गरज-चमक, आकाशीय तड़ित और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की झोंकेदार हवाओं का जोर रहेगा। बांसवाड़ा जिले में भी तीव्र बादलों की गर्जना और बिजली कड़कने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं बहने का अनुमान है। बारां जिले में भी मौसमी उथल-पुथल बनी रहेगी, जहां गर्जन और आकाशीय बिजली के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज बयार चलने का अलर्ट प्रभावी रहेगा। झालावाड़ जनपद में भी मेघगर्जन और वज्रपात के साथ इतनी ही गति यानी 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की झोंकेदार हवाएं चलने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है।

जयपुर सहित मध्य और उत्तरी क्षेत्रों के लिए राहत की स्थिति

प्रांतीय राजधानी जयपुर में 20 सितंबर को किसी भी प्रकार की प्रतिकूल मौसमी आपदा या आंधी-तूफान की चेतावनी प्रभावी नहीं की गई है। राजधानी का आकाश मुख्य रूप से सामान्य रहने का अनुमान है और यहां किसी तीव्र चेतावनी का उल्लेख नहीं है। इसी भांति अजमेर, अलवर, ब्यावर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, दौसा, डीग, धौलपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटा जिला, कोटपुतली-बहरोड़, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही तथा टोंक में भी किसी प्रकार का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

इन इलाकों में सामान्य दिनचर्या बिना किसी व्यवधान के जारी रह सकती है। हालांकि कोटा संभाग में कहीं-कहीं छिटपुट बारिश का अनुमान जरूर है, मगर जिला स्तर पर चेतावनी की श्रेणी से इसे मुक्त रखा गया है। शेखावाटी और ढूंढार क्षेत्र के निवासियों को तेज हवाओं या आकाशीय तड़ित के किसी बड़े खतरे का सामना नहीं करना पड़ेगा।

पश्चिमी राजस्थान के सभी 13 जिलों में बना रहेगा सूखा

रेगिस्तानी और पश्चिमी राजस्थान का परिदृश्य पूर्वी अंचल से एकदम अलग तस्वीर पेश करेगा। 20 सितंबर को यहां वर्षा शून्य रहने का अनुमान है और वातावरण पूर्णतया सूखा रहेगा। इस भूभाग के अंतर्गत आने वाले सभी 13 जनपदों में किसी भी प्रकार की चेतावनी नहीं दी गई है।

इन शांत और सूखे जिलों की सूची में बालोतरा, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, डीडवाना-कुचामन, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, नागौर, पाली, फलौदी तथा श्रीगंगानगर शामिल हैं। इन सभी जनपदों में बादलों की गर्जना, आकाशीय वज्रपात अथवा 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली हवाओं का कोई संकट नहीं है। पश्चिमी मरुस्थल के किसान और आमजन बिना किसी आंधी-तूफान के भय के अपने सामान्य कामकाज निपटा सकते हैं।

कृषि कार्य और खुले क्षेत्रों के लिए एहतियाती निर्देश

दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में आंधी और आकाशीय बिजली की संभावना को देखते हुए खेतों में काम कर रहे किसानों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। फसलों की कटाई या थ्रेसिंग का काम कर रहे काश्तकारों को कटी हुई उपज को सुरक्षित तिरपाल या ढके हुए गोदामों में रखना चाहिए, ताकि अचानक शुरू होने वाली तेज हवाओं और बौछारों से अनाज भीगने से बच सके।

बिजली के खंभों, बड़े होर्डिंग्स और कमजोर छप्परों के पास खड़े होने से बचना चाहिए, क्योंकि 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली झोंकेदार हवाएं टीन शेड और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। राज्य के दोनों हिस्सों में प्राकृतिक विषमता स्पष्ट रहेगी, जहां पूर्व में बारिश और आंधी का पहरा होगा, वहीं पश्चिमी धोरों में सूरज की तल्खी और शुष्क हवाएं सामान्य बनी रहेंगी।

सवाल-जवाब

20 सितंबर को राजस्थान के किन जिलों में आंधी और बिजली की चेतावनी दी गई है?
पूर्वी राजस्थान के आठ जिलों यानी बांसवाड़ा, बारां, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूम्बर और उदयपुर में मेघगर्जन, आकाशीय बिजली और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं का अलर्ट है।
क्या 20 सितंबर को राजधानी जयपुर में आंधी या बारिश की कोई चेतावनी है?
नहीं, 20 सितंबर के लिए जयपुर जिले में किसी विशेष मौसमी खतरे या तेज आंधी-तूफान की चेतावनी जारी नहीं की गई है।
पश्चिमी राजस्थान में 20 सितंबर को मौसम कैसा रहने का अनुमान है?
पश्चिमी राजस्थान के सभी 13 जिलों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा और वहां किसी भी प्रकार की बारिश या तूफान का अलर्ट नहीं है।
चेतावनी वाले जिलों में हवा की अधिकतम रफ्तार कितनी हो सकती है?
चिन्हित आठ जिलों में गरज-चमक के दौरान झोंकेदार तेज हवाओं की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
कोटा और उदयपुर संभागों में बारिश का दायरा किस प्रकार का रहेगा?
इन संभागों के सभी इलाकों में एक साथ बारिश नहीं होगी, बल्कि कुछ चिन्हित स्थानों पर खंडित रूप से हल्की से मध्यम और कहीं तेज बारिश दर्ज हो सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·5 दिन पहले

मनोरंजन पत्रकारिता के दृष्टिकोण से, राजस्थान के इस दोतरफ़ा मौसम का सीधा असर पर्यटन, शूटिंग शेड्यूल और सांस्कृतिक आयोजनों पर पड़ेगा। उदयपुर और कोटा जैसे प्रमुख शूटिंग हब में अचानक आंधी और बारिश से आउटडोर प्रोडक्शन ठप हो सकते हैं, जिससे निर्माताओं को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

राजस्थान के इस दोतरफा मौसम का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि पर पड़ेगा। पूर्वी संभाग में आंधी और वज्रपात से फसलों को नुकसान की आशंका है, वहीं पश्चिमी क्षेत्र में सूखा बने रहने से सिंचाई की मांग बढ़ेगी। आपूर्ति श्रृंखला और स्थानीय स्तर पर कृषि जिंसों के बाजार में इसके तात्कालिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं, जिस पर निवेशकों और विश्लेषकों को नजर रखनी चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

रविकेश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह दोतरफा मौसमी स्थिति नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। एक ओर पूर्वी जिलों में वज्रपात और तेज हवाओं से कृषि उपज को संभावित क्षति और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले दबाव से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन तंत्र को तुरंत सक्रिय करना होगा। वहीं, दूसरी ओर पश्चिमी बेल्ट में सूखे जैसे हालात के बीच जल संसाधन प्रबंधन और किसानों को समय पर सिंचाई के साधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक प्राथमिकता होनी चाहिए, अन्यथा यह क्षेत्रीय विषमता ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को सीधे प्रभावित कर सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

मौसम की यह दोतरफा स्थिति और पूर्वी जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से चलने वाली हवाएं तथा आकाशीय बिजली का खतरा सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे जाने से बचने की जो चेतावनी दी गई है, वह जनहानि को रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को इन आठ चिन्हित जिलों में एहतियातन तुरंत निगरानी बढ़ानी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

यह स्पष्ट है कि इस मौसमी विषमता का सीधा प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि पर पड़ेगा। पूर्वी संभाग के आठ चिन्हित जिलों में जहां तेज हवाओं और वज्रपात से फसलों तथा खुले में खड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान की आशंका है, वहीं पश्चिमी राजस्थान का सूखा रहना स्थानीय किसानों की चिंताएं बढ़ा सकता है। आपदा प्रबंधन तंत्र को इन संवेदनशील क्षेत्रों में किसानों के लिए तत्काल एडवाइजरी जारी करनी चाहिए।

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