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राजस्थान में 29 सीटें जीतने के बाद भी कांग्रेस हारी, पाली नगर निगम में भाजपा की नमिता बुबकिया बनीं मेयरराजस्थान
21 सित॰ 2026, 1:09 pm (4 दिन पहले)· 0

राजस्थान में 29 सीटें जीतने के बाद भी कांग्रेस हारी, पाली नगर निगम में भाजपा की नमिता बुबकिया बनीं मेयर

पाली नगर निगम चुनाव में 29 वार्ड जीतने के बावजूद कांग्रेस महापौर पद की दौड़ में पिछड़ गई और भाजपा की नमिता बुबकिया ने जीत दर्ज की।

राजस्थान के निकाय चुनावों में पाली नगर निगम के नतीजों ने सबको चौंका दिया है, जहाँ सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद कांग्रेस अपना मेयर नहीं बना पाई। नगर निगम के कुल 65 वार्डों में से कांग्रेस ने 29 सीटों पर परचम लहराया था, जबकि भारतीय जनता पार्टी को केवल 21 वार्डों में कामयाबी मिली थी। इसके बावजूद चुनावी गणित और क्रॉस वोटिंग के फेर में भाजपा की नमिता बुबकिया ने बाजी मारते हुए पाली नगर निगम की पहली निर्वाचित महापौर बनने का गौरव हासिल किया।

त्रिकोणीय मुकाबले में पलटा चुनावी समीकरण

पाली नगर निगम के महापौर चुनाव में मुकाबला काफी कड़ा और दिलचस्प रहा। यहाँ भाजपा प्रत्याशी नमिता बुबकिया, कांग्रेस प्रत्याशी और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिला। नाम वापसी के अंतिम दौर में कुसुम, पुष्पा और रशीदा ने अपने नाम वापस ले लिए थे, जिसके बाद मैदान में नमिता, सुमित्रा और राजबाला के बीच मुख्य मुकाबला तय हुआ। अंतिम नतीजों में नमिता बुबकिया ने निर्दलीय प्रत्याशी को 4 मतों के अंतर से शिकस्त देकर नगर निगम बोर्ड पर भाजपा का परचम लहरा दिया।

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कांग्रेस पार्षदों की टूट और भारी क्रॉस वोटिंग

इस चुनाव का सबसे हैरान करने वाला पहलू कांग्रेस पार्टी का वोट बैंक बिखरना रहा। सदन में 29 निर्वाचित पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को मात्र 3 मत ही हासिल हो सके। सदन में मौजूद 15 निर्दलीय पार्षदों और असंतुष्ट खेमों के रुख ने पूरे मुकाबले का रुख मोड़ दिया। इस भारी क्रॉस वोटिंग और बगावत ने साफ कर दिया कि स्थानीय स्तर पर पार्षद दल अपनी पार्टी के पक्ष में एकजुट नहीं रह सका, जिसका सीधा फायदा भाजपा खेमे को मिला।

राजस्थान के 273 निकायों में हुआ मतदान

पाली के साथ ही राजस्थान भर में स्थानीय स्वशासन के बड़े स्तर पर चुनाव संपन्न हुए। राज्य के कुल 273 नगरीय निकायों में अध्यक्ष और 5 नगर निगमों में महापौर के पदों के लिए वोट डाले गए। कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों और बाड़ाबंदी के बीच कड़ा मुकाबला देखा गया, जहाँ 32 निकायों में प्रमुखों का चुनाव पहले ही निर्विरोध संपन्न हो चुका था। पाली में बने इस नए समीकरण ने स्थानीय सियासत में नए समीकरण स्थापित कर दिए हैं।

सवाल-जवाब

पाली नगर निगम की पहली निर्वाचित महापौर कौन बनी हैं?
भाजपा की नमिता बुबकिया ने त्रिकोणीय मुकाबले में जीत हासिल कर पाली नगर निगम की पहली निर्वाचित महापौर बनने का गौरव हासिल किया।
पाली नगर निगम चुनाव में विभिन्न दलों को कितनी सीटें मिली थीं?
कुल 65 वार्डों में से कांग्रेस ने 29 सीटें और भाजपा ने 21 सीटें जीती थीं, जबकि 15 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे थे।
सदन में 29 सीटें होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को कितने वोट मिले?
भारी क्रॉस वोटिंग के कारण 29 पार्षद जीतने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को महापौर चुनाव में महज 3 वोट मिले।
नमिता बुबकिया ने कितने वोटों के अंतर से जीत हासिल की?
भाजपा उम्मीदवार नमिता बुबकिया ने निर्दलीय प्रत्याशी को 4 मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की।
महापौर चुनाव में किन उम्मीदवारों के बीच मुकाबला था?
नाम वापसी के बाद नमिता, सुमित्रा और राजबाला के बीच त्रिकोणीय मुकाबला तय हुआ था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·3 दिन पहले

यह परिणाम स्थानीय निकायों में दलबदल और गुप्त मतदान की अस्थिरता को उजागर करता है। कांग्रेस का 29 सीटें जीतने के बावजूद मात्र 3 वोट पाना पार्टी के भीतर भारी असंतोष और कमजोर आंतरिक अनुशासन को दर्शाता है। यदि राष्ट्रीय दल स्थानीय चुनावों में अपने पार्षदों को एकजुट नहीं रख पाएँगे, तो आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इसका असर संगठन की जमीनी पकड़ पर भी पड़ सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

पाली नगर निगम के यह नतीजे यह साबित करते हैं कि स्थानीय निकाय चुनावों में दलीय बहुमत से ज्यादा आंतरिक एकजुटता और फ्लोर मैनेजमेंट मायने रखता है। 29 वार्ड जीतने के बाद भी कांग्रेस का महज 3 वोट पाना पार्टी के भीतर भारी असंतोष और क्रॉस वोटिंग की ओर इशारा करता है, जो भविष्य के चुनावों के लिए संगठनात्मक कमजोरी का संकेत है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

पाली के इन नतीजों से यह स्पष्ट है कि गुप्त मतदान प्रणाली और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका कई बार दलीय समीकरणों को पूरी तरह पलट देती है। 29 पार्षदों के समर्थन का दावा करने वाली पार्टी को मात्र 3 वोट मिलना केवल क्रॉस वोटिंग नहीं, बल्कि स्थानीय नेतृत्व और जमीनी समन्वय की बड़ी विफलता है। यदि स्थानीय स्तर पर ऐसा असंतोष बना रहा, तो बड़े राजनीतिक आयोजनों और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर बगावत और अनुशासनहीनता को रोकना आलाकमान के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

पाली नगर निगम के इस नतीजे से स्पष्ट है कि स्थानीय निकायों में दलीय संख्याबल से अधिक पार्षदों की एकजुटता और प्रबंधन निर्णायक होता है। उनतीस वार्ड जीतने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को मात्र तीन वोट मिलना इस बात का प्रमाण है कि आंतरिक कलह और क्रॉस वोटिंग किसी भी पार्टी के चुनावी गणित को पूरी तरह धराशायी कर सकती है। भविष्य में इस प्रकार के परिणामों से राजनीतिक दलों को अपने पार्षदों पर पकड़ मजबूत करने और अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता होगी, अन्यथा मजबूत स्थिति होने पर भी सत्ता हाथ से निकल सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

यह घटना महज राजनीतिक उलटफेर नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर खुफिया प्रबंधन और अंदरूनी बगावत का गंभीर मामला है। गुप्त मतदान के दौरान 29 में से 26 पार्षदों का अपनी ही पार्टी से विमुख हो जाना राजनीतिक भ्रष्टाचार और गहरी आंतरिक टूट की ओर इशारा करता है। भविष्य में इस तरह की सेंधमारी रोकने के लिए दलों को केवल संख्याबल पर निर्भर रहने के बजाय अपने प्रतिनिधियों की निष्ठा सुनिश्चित करने वाली मजबूत आंतरिक निगरानी प्रणाली विकसित करनी होगी।

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