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राजस्थान में ब्यावर से भरतपुर तक बनेगा नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, दिल्ली से अजमेर का सफर घटकर पांच घंटे होगाराजस्थान
19 सित॰ 2026, 4:49 pm (6 दिन पहले)· 3

राजस्थान में ब्यावर से भरतपुर तक बनेगा नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, दिल्ली से अजमेर का सफर घटकर पांच घंटे होगा

राजस्थान में 277 किलोमीटर लंबा ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे तैयार किया जा रहा है, जिससे दिल्ली और अजमेर के बीच यात्रा का समय घटकर करीब 5 घंटे रह जाएगा।

राजस्थान के सड़क नेटवर्क में एक बड़ा विस्तार प्रस्तावित है, जिसके तहत ब्यावर से भरतपुर के बीच 277 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तैयार किया जा रहा है। इस नए हाई-स्पीड कॉरिडोर के बनने से पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के बीच आवागमन काफी सुगम हो जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट का सीधा असर राजधानी दिल्ली से राजस्थान के कई प्रमुख जिलों की दूरी और समय पर पड़ेगा, जिससे दिल्ली से अजमेर पहुंचने में महज 4.5 से 5 घंटे और भरतपुर पहुंचने में लगभग 2.5 से 3 घंटे का समय लगेगा।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा नया मार्ग

इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे नेटवर्क के साथ लिंक होना है। यह नया कॉरिडोर दौसा जिले के लालसोट क्षेत्र के समीप दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ने जा रहा है। इस इंटरचेंज के तैयार होते ही दिल्ली, गुरुग्राम और सोहना की तरफ से आने वाला ट्रैफिक निर्बाध गति से राजस्थान के आंतरिक हिस्सों में प्रवेश कर सकेगा। वर्तमान में दिल्ली से अजमेर सड़क मार्ग से जाने में करीब 7 से 8 घंटे लगते हैं, जो इस नए मार्ग के चालू होने के बाद घटकर लगभग 4.5 से 5 घंटे रह जाएंगे। वहीं ब्यावर से भरतपुर के बीच का सफर, जिसमें अभी 7 से 8 घंटे का समय लगता है, सिमटकर केवल 3 से 3.5 घंटे का रह जाएगा।

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छह जिलों और 210 गांवों से गुजरेगा 4-लेन कॉरिडोर

यह 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जयपुर जिले के दूदू क्षेत्र में स्थित झाग गांव से प्रारंभ होकर भरतपुर के ऊंचा नगला तक पहुंचेगा। ऊंचा नगला में इसका सीधा जुड़ाव NH-21 से किया जाएगा। अपने 277 किलोमीटर के दायरे में यह मार्ग राज्य के छह प्रमुख जिलों जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर को आपस में जोड़ेगा। प्रोजेक्ट की रूपरेखा के अनुसार लगभग 210 गांव इस नए अलाइनमेंट के दायरे में आ रहे हैं, जहां भूमि अधिग्रहण और रूट सर्वे से जुड़े कार्य आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से इंटरचेंज

इस नए एक्सप्रेसवे को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के मानकों पर तैयार किया जा रहा है। तेज रफ्तार के साथ-साथ वाहनों के सुरक्षित प्रवेश और निकास के लिए आधुनिक स्ट्रक्चर्स और इंटरचेंज बनाए जाएंगे। यह एक्सप्रेसवे न केवल क्षेत्रीय शहरों को जोड़ेगा, बल्कि अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे, NH-448 और NH-21 जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों से भी सीधा संपर्क स्थापित करेगा। इस वैकल्पिक कॉरिडोर के तैयार होने से पारंपरिक रूप से व्यस्त रहने वाले NH-48 और NH-21 पर भारी वाहनों तथा सामान्य यातायात का दबाव काफी हद तक कम होने का अनुमान है।

व्यापार, उद्योग और अंतरराज्यीय परिवहन को मिलेगी गति

इस एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के पूरा होने से दिल्ली-NCR और राजस्थान के औद्योगिक केंद्रों के बीच माल ढुलाई की लागत और समय दोनों में बड़ी बचत होगी। अजमेर, ब्यावर, जयपुर और भरतपुर के औद्योगिक क्षेत्रों से राजधानी क्षेत्र तक कच्चे माल और तैयार उत्पादों का परिवहन तेज गति से हो सकेगा। इसके साथ ही, पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के बीच सुगम कनेक्टिविटी स्थापित होने से स्थानीय पर्यटन और वाणिज्यिक गतिविधियों को भी नया संबल मिलेगा।

सवाल-जवाब

ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी है?
इस प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 277 किलोमीटर है।
इस नए एक्सप्रेसवे से दिल्ली और अजमेर के बीच कितना समय लगेगा?
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दिल्ली से अजमेर का सफर करीब 4.5 से 5 घंटे में पूरा हो सकेगा।
यह एक्सप्रेसवे किन जिलों से होकर गुजरेगा?
यह मार्ग जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जिलों से होकर गुजरेगा।
एक्सप्रेसवे का शुरुआती और अंतिम बिंदु कहां है?
यह जयपुर जिले के दूदू क्षेत्र स्थित झाग गांव से शुरू होकर भरतपुर के ऊंचा नगला में NH-21 से जुड़ेगा।
इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम डिजाइन स्पीड क्या रखी गई है?
इस एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के अनुसार तैयार किया जा रहा है।
यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से कहां जुड़ेगा?
यह नया कॉरिडोर दौसा जिले के लालसोट क्षेत्र के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·5 दिन पहले

यह एक्सप्रेसवे सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे मॉडर्न लाइफस्टाइल और वीकेंड कल्चर को भी एक नई गति मिलेगी। जब दिल्ली से अजमेर और ब्यावर की दूरी घटकर पांच घंटे या उससे भी कम रह जाएगी, तो कॉर्पोरेट पेशेवरों और युवाओं के लिए राजस्थान के इन ऐतिहासिक शहरों में वीकेंड गेटअवे और शॉर्ट ट्रिप्स प्लान करना बेहद आसान हो जाएगा। 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाला यह छह जिलों से गुजरने वाला कॉरिडोर लोगों की भागदौड़ भरी जिंदगी में यात्रा के समय को बचाकर उनके पर्सनल और लीजर टाइम को बेहतर बनाएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर के बीच आर्थिक कॉरिडोर को गति देने वाला एक रणनीतिक निवेश है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से इसका जुड़ाव और 120 किमी/घंटे की डिजाइन स्पीड से औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा। आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) के समय और लागत में कमी आने से इस क्षेत्र में नई व्यावसायिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

यह ढांचागत परियोजना न केवल यात्रा का समय कम करेगी, बल्कि मौजूदा व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों का भारी दबाव भी हटाएगी। छह जिलों और दो सौ से अधिक गांवों से गुजरने वाला यह गलियारा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को नई दिशा देगा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के साथ इसका जुड़ाव अंतरराज्यीय व्यापार के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे के संदर्भ में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 210 गांवों से गुजरने वाले इस 277 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 120 किमी प्रति घंटे की उच्च गति सीमा के कारण सड़क सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली कैसी रहती है। भारी वाहनों और अंतरराज्यीय परिवहन के इस नए वैकल्पिक कॉरिडोर पर शिफ्ट होने से पारंपरिक राष्ट्रीय राजमार्गों पर अपराध नियंत्रण, ओवरस्पीडिंग और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए पुलिस गश्त और आधुनिक निगरानी तंत्र को नए सिरे से मजबूत करना होगा, ताकि इस हाई-स्पीड नेटवर्क का उपयोग असामाजिक तत्व न कर सकें।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

रोहन वर्मा की ओर से विश्लेषण: 120 किमी प्रति घंटे की डिज़ाइन स्पीड वाले इस 277 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट से दिल्ली-अजमेर का सफर तो सुगम होगा ही, साथ ही छह जिलों के 210 गांवों से गुजरने पर स्थानीय अर्थव्यवस्था और भूमि अधिग्रहण से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर भी प्रशासनिक निगरानी रखनी होगी। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ने के बाद लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई में समय की बचत होगी, बशर्ते सुरक्षा और सुचारू ट्रैफिक प्रबंधन समय पर सुनिश्चित किया जाए।

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