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राजस्थान में लॉरेंस गैंग के दो शार्प शूटर धरे गए, पांच-पांच लाख का था इनामराजस्थान
20 सित॰ 2026, 5:36 pm (5 दिन पहले)· 1

राजस्थान में लॉरेंस गैंग के दो शार्प शूटर धरे गए, पांच-पांच लाख का था इनाम

एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स और जोधपुर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर लॉरेंस-आरजू बिश्नोई गिरोह के दो वांछित शूटरों को दबोच लिया.

राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने स्थानीय जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस के साथ मिलकर एक बड़े अभियान में लॉरेंस-आरजू बिश्नोई गिरोह के दो शार्प शूटरों को धर दबोचा. पकड़े गए दोनों बदमाशों पर पांच-पांच लाख रुपये का भारी इनाम घोषित था. ये दोनों अपराधी जोधपुर शहर में किसी गंभीर वारदात को अंजाम देने की फिराक में पहुंचे हुए थे, लेकिन इससे पहले कि वे अपनी योजना में कामयाब होते, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें घेरकर हिरासत में ले लिया.

पंजाब के फाजिल्का से जुड़े हैं दोनों शूटरों के तार

पकड़े गए दोनों शूटर मूल रूप से पंजाब के फाजिल्का जिले से ताल्लुक रखते हैं. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक इनकी पहचान राजिंदर उर्फ बिल्ला तथा जसकरण सिंह उर्फ करण उर्फ सनी उर्फ कट्टा के तौर पर हुई है. ये दोनों बदमाश सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि पंजाब के अबोहर और फाजिल्का इलाकों में हुई हत्या की कई सनसनीखेज वारदातों में भी लंबे समय से वांछित चल रहे थे. आपराधिक गतिविधियों के चलते ही पुलिस लगातार इनकी तलाश में जुटी हुई थी.

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वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में हुआ ऑपरेशन

इस पूरे संयुक्त ऑपरेशन को एडीजी एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स दिनेश एम.एन. के सुपरविजन में अंजाम दिया गया. इस फील्ड टीम में एएसपी सिद्धांत शर्मा, डीवाईएसपी रविंद्र प्रताप के साथ इंस्पेक्टर सुनील जांगिड और रामसिंह शामिल रहे. जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस के तालमेल से टीम ने सटीक घेराबंदी कर दोनों को धर दबोचा.

आपराधिक नेटवर्क और बैकवर्ड लिंक्स पर पूछताछ जारी

गिरफ्तारी के बाद दोनों शूटरों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी गई है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जोधपुर में उनके मददगार कौन थे और उन्हें शहर में किस व्यक्ति या ठिकाने को निशाना बनाने का जिम्मा सौंपा गया था. इसके अलावा उनके समूचे आपराधिक नेटवर्क और अन्य राज्यों में जुड़ी पुरानी वारदातों की कड़ियों को भी खंगाला जा रहा है.

सवाल-जवाब

जोधपुर में किन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने पंजाब निवासी राजिंदर उर्फ बिल्ला और जसकरण सिंह उर्फ करण उर्फ सनी उर्फ कट्टा को गिरफ्तार किया है.
पकड़े गए दोनों शूटरों पर कितना इनाम घोषित था?
दोनों बदमाशों पर पांच-पांच लाख रुपये का नकद इनाम घोषित था.
आरोपी किस आपराधिक गिरोह से जुड़े हुए हैं?
ये दोनों आरोपी लॉरेंस-आरजू बिश्नोई गैंग के शार्प शूटर बताए गए हैं.
यह कार्रवाई किस पुलिस अधिकारी के सुपरविजन में की गई?
यह अभियान एडीजी एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स दिनेश एम.एन. के सुपरविजन में पूरा किया गया.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·4 दिन पहले

संगठित अपराध से जुड़े गिरोहों का नेटवर्क अब सीमाओं को पार कर चुका है। पंजाब के शूटरों का राजस्थान में पकड़ा जाना यह दर्शाता है कि आपराधिक सिंडिकेट राज्यों के बीच भौगोलिक सीमाओं का फायदा उठाते हैं। इस पृष्ठभूमि में, एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस का यह संयुक्त ऑपरेशन अंतर-राज्यीय कानून प्रवर्तन सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है। ऐसी त्वरित कार्रवाई न केवल किसी बड़ी संभावित शहरी हिंसा को टालती है, बल्कि बड़े आपराधिक गठजोड़ों के रसद नेटवर्क को भी कमजोर करती है। आगे की जांच में इनके स्थानीय मददगारों का खुलासा होना पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जरूरी है।

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के इन वांटेड शूटरों की गिरफ्तारी केवल एक कानून-व्यवस्था की सफलता नहीं है, बल्कि यह अंतर-राज्यीय पुलिस समन्वय की बढ़ती ताकत को दर्शाती है। राजस्थान जैसे आर्थिक और पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्य में इस तरह के संगठित आपराधिक नेटवर्क का सक्रिय होना व्यापारिक सुरक्षा और निवेश के माहौल को प्रभावित कर सकता है। समय रहते की गई यह कार्रवाई स्थानीय उद्योगों और नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा देगी। आगे की पूछताछ से गिरोह के वित्तीय स्रोतों और स्थानीय मददगारों के नेटवर्क का भंडाफोड़ होने की उम्मीद है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

इस कार्रवाई से यह साफ है कि संगठित अपराध से निपटने के लिए राज्य सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' का नीतिगत रुख धरातल पर काम कर रहा है। पंजाब से राजस्थान तक फैले इस नेटवर्क को तोड़ना केवल पुलिस की सफलता नहीं, बल्कि गृह विभाग की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति को भी दर्शाता है। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) जैसे विशेष दस्तों को सीधे वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में स्वतंत्र रूप से काम करने की छूट देना एक प्रभावी प्रशासनिक कदम है। आने वाले समय में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन अपराधियों के वित्तीय सिंडिकेट और राजनीतिक-प्रशासनिक गठजोड़ पर नकेल कसने के लिए क्या नए नीतिगत और कानूनी बदलाव लाती है ताकि ऐसे सीमा पार सुरक्षा खतरों को जड़ से खत्म किया जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

इस गिरफ्तारी से साफ है कि अंतरराज्यीय गैंगस्टर्स का नेटवर्क अब केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। पंजाब के अपराधियों का राजस्थान में पकड़ा जाना दिखाता है कि अपराध सिंडिकेट्स का फैला हुआ जाल कितनी बड़ी चुनौती है। ऐसे में राज्यों की पुलिस के बीच तालमेल और एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स की सक्रियता बेहद जरूरी हो जाती है। समय रहते की गई यह कार्रवाई न केवल एक बड़ी वारदात को टालने में सफल रही, बल्कि संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस के खुफिया तंत्र की मुस्तैदी को भी साबित करती है। आगे की पूछताछ से इस सिंडिकेट के स्थानीय मददगारों और फंडिंग नेटवर्क का खुलासा होना बेहद अहम होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

रोहन की बात बिल्कुल सही है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन शार्प शूटर्स के खिलाफ कोर्ट में एक अभेद्य कानूनी शिकंजा कसने की होगी। चूंकि ये अपराधी पंजाब और राजस्थान दोनों राज्यों में वांछित हैं, इसलिए पुलिस को इनके ट्रांजिट रिमांड, कस्टडी ट्रांसफर और अंतरराज्यीय जांच में बेहद सावधानी बरतनी होगी। ऐसे मामलों में अक्सर गवाहों के मुकरने का खतरा रहता है, इसलिए पुलिस को केवल बयानों पर निर्भर न रहकर वैज्ञानिक, तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों को मजबूत करना होगा। इन अपराधियों पर सख्त संगठित अपराध विरोधी कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए ताकि इन्हें आसानी से जमानत न मिल सके और इन्हें कानूनन कड़ी सजा दिलाई जा सके।

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