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राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 की बिसात बिछी, प्रधान पदों की आरक्षण लॉटरी के बाद गांवों में सियासी पारा चढ़ाराजस्थान
23 सित॰ 2026, 6:27 pm (2 दिन पहले)· 1

राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 की बिसात बिछी, प्रधान पदों की आरक्षण लॉटरी के बाद गांवों में सियासी पारा चढ़ा

राजस्थान में निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद अब पंचायती राज चुनाव 2026 की सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जहां बुधवार को आरक्षण लॉटरी के जरिए सभी श्रेणियों और 50 फीसदी महिला कोटे की स्थिति साफ कर दी गई।

राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया लगभग पूरी होने के तुरंत बाद अब चुनावी गहमागहमी देहात की ओर मुड़ चुकी है। पंचायती राज चुनाव 2026 के औपचारिक शंखनाद से पहले बुधवार का दिन राज्य की ग्रामीण राजनीति के लिहाज से बेहद अहम साबित हुआ। जिला मुख्यालयों पर आयोजित आधिकारिक प्रक्रियाओं के दौरान प्रधान पदों के आरक्षण की लॉटरी निकाली गई, जिससे विभिन्न पंचायत समितियों का सियासी समीकरण पूरी तरह स्पष्ट हो गया है।

जयपुर जिले की 22 पंचायत समितियों की स्थिति

राजधानी जयपुर जिले की कुल 22 पंचायत समितियों में प्रधान पदों के लिए आरक्षण तय कर दिया गया है। इस निर्धारण के साथ ही ग्रामीण इलाकों में चुनावी दावेदारों की स्थिति भी स्पष्ट हो गई है। जयपुर के इन 22 पदों में से 4 पद अनुसूचित जाति यानी एससी, 3 पद अनुसूचित जनजाति यानी एसटी, 4 पद अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी और 11 पद सामान्य वर्ग के लिए तय किए गए हैं। नीति के अनुसार कुल पदों में से 50 प्रतिशत पद महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखे गए हैं।

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एससी और एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीटें

जयपुर जिले में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए कुल चार पंचायत समितियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें कोटखावदा, तूंगा, रामपुरा डाबड़ी और आंधी शामिल हैं। इनमें से रामपुरा डाबड़ी और कोटखावदा के प्रधान पद अनुसूचित जाति की महिला उम्मीदवारों के लिए तय हुए हैं। दूसरी तरफ अनुसूचित जनजाति वर्ग के हिस्से में तीन पंचायत समितियां आई हैं, जिनमें चौमूं, अमरसर और किशनगढ़ रेनवाल शामिल हैं। अमरसर पंचायत समिति का प्रधान पद अनुसूचित जनजाति की महिला के लिए आरक्षित घोषित किया गया है।

ओबीसी और सामान्य वर्ग की पंचायत समितियों का ब्योरा

अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए जोबनेर, माधोराजपुरा, मौजमाबाद और सांगानेर पंचायत समितियां आरक्षित की गई हैं। इस वर्ग की सीटों में से मौजमाबाद और जोबनेर के पद ओबीसी महिला के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। इसके अलावा 11 पंचायत समितियां सामान्य वर्ग के खाते में गई हैं, जिनमें गोविंदगढ़, जालसू, चाकसू, सांभरलेक, जमवारामगढ़, दूदू, आमेर, झोटवाड़ा, शाहपुरा, बस्सी और फागी शामिल हैं। सामान्य वर्ग की इन सीटों में से गोविंदगढ़, जालसू, झोटवाड़ा, आमेर, चाकसू और दूदू के प्रधान पद सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इन घोषणाओं के बाद अब गांवों में उम्मीदवारी को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है।

राज्यभर की 457 पंचायत समितियों में आरक्षण का गणित

पूरे प्रदेश के स्तर पर बात करें तो कुल 457 पंचायत समितियों के प्रधान पदों के लिए आरक्षण का खाका खींचा गया। राज्यव्यापी कोटे के तहत अनुसूचित जाति वर्ग के हिस्से में 79 पद आए हैं, जबकि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 93 पद आरक्षित किए गए हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए करीब 56 पद निर्धारित किए गए हैं। शेष बचे लगभग 228 से 229 पद ओपन यानी सामान्य वर्ग की श्रेणी में रखे गए हैं।

ग्रामीण सत्ता में आधी आबादी की मजबूत भागीदारी

पंचायती राज संस्थाओं में लागू 50 प्रतिशत महिला आरक्षण नियम के कारण इस बार ग्रामीण सरकार में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद व्यापक रहने वाला है। प्रदेश में चुने जाने वाले कुल 1.55 लाख ग्रामीण जन-प्रतिनिधियों में से 77 हजार से अधिक सीटों पर केवल महिलाएं ही काबिज होंगी। आरक्षण का यह नियम एससी, एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग सभी श्रेणियों पर समान रूप से लागू है, जहां प्रत्येक वर्ग के आधे पदों पर महिला नेतृत्व तय किया गया है।

सवाल-जवाब

राजस्थान में बुधवार को किस बात की लॉटरी निकाली गई?
जिला मुख्यालयों पर पंचायती राज चुनाव 2026 के लिए पंचायत समितियों के प्रधान पदों के आरक्षण की लॉटरी निकाली गई।
जयपुर जिले में प्रधान पदों का आरक्षण किस प्रकार निर्धारित हुआ?
जयपुर की 22 पंचायत समितियों में से 4 पद एससी, 3 पद एसटी, 4 पद ओबीसी और 11 पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।
राज्यभर में कुल कितनी पंचायत समितियों के लिए आरक्षण तय हुआ?
पूरे राजस्थान में 457 पंचायत समितियों के प्रधान पदों के लिए आरक्षण का ढांचा तैयार किया गया।
प्रदेश स्तर पर एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को कितनी सीटें मिली हैं?
राज्य स्तर पर एससी वर्ग को 79, एसटी वर्ग को 93 और ओबीसी वर्ग को करीब 56 पद मिले हैं, जबकि लगभग 228 से 229 पद ओपन वर्ग में हैं।
पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?
पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू है, जिसके तहत 1.55 लाख कुल प्रतिनिधियों में से 77 हजार से अधिक पदों पर महिलाएं चुनी जाएंगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·1 दिन पहले

आरक्षण लॉटरी से गांवों का पारा तो सच में चढ़ गया है, लेकिन महिलओं के लिए पचास फीसदी कोटा कागजों पर जितना शानदार दिखता है, जमीन पर असल ताकत परिवारों के पुरुषों के हाथ में ही रह जाती है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

अब गांवों में असली चुनावी गहमागहमी शुरू हो गई है, आरक्षण लॉटरी आते ही प्रधान पद के दावेदारों की नींद उड़ गई होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

रविकेश जी, नींद उड़ने की बात थोड़ी ज़्यादा लगती है। ऐसे लोग पहले से ही हर समीकरण के लिए तैयार रहते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

गाँवों में अब असली राजनीति शुरू होगी। आरक्षण की पर्ची खुलते ही टिकट के दावेदारों ने अपने हिसाब से जोड़-तोड़ बिठाना शुरू कर दिया है, चुनाव का असली रंग अब दिखेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछली बार जब हमारे यहां प्रधानी का आरक्षण खुला था, तब चाचा ने महीनों पहले से ही चौपाल पर चुनावी चौसर बिछानी शुरू कर दी थी।

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