राजस्थान के नागौर जिले में एक बेहद दर्दनाक और अप्रत्याशित वाकया सामने आया है, जहां कुछ ही घंटों के भीतर आक्रामक मधुमक्खियों ने दो बार भीषण हमला कर पूरे इलाके में दहशत फैला दी। डेगाना उपखंड स्थित हरसौर क्षेत्र की बेरी की ढाणी में गुरुवार का दिन ग्रामीणों के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ। सुबह के वक्त घर के पास मौजूद 85 वर्षीय बुजुर्ग नेमाराम कुमावत पर मधुमक्खियों ने अचानक धावा बोल दिया। अनगिनत डंक लगने से बुजुर्ग की हालत तेजी से बिगड़ी और उन्होंने दम तोड़ दिया। इस अनहोनी से परिजन गहरे सदमे में डूब गए और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि कुछ ही घंटों बाद श्मशान जाते समय इससे भी बड़ी मुसीबत सामने आ जाएगी।
बालाजी मंदिर के समीप अचानक मची भगदड़
बुजुर्ग की सांसें थमने के बाद परिजन और रिश्तेदार दोपहर के समय अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गए। दोपहर में जब सैकड़ों ग्रामीण पार्थिव देह को कंधा देकर श्मशान की तरफ बढ़ रहे थे, तभी ढाणी के बाहर बने बालाजी मंदिर के पास आसमान में भिनभिनाहट तेज हो गई। देखते ही देखते मधुमक्खियों के विशाल झुंड ने शवयात्रा में शामिल जनसमूह पर सीधा हमला बोल दिया। अचानक हुए इस अप्रत्याशित हमले से वहां भारी चीख-पुकार मच गई। बचने का कोई रास्ता न देख लोग अपनी सुधबुध खो बैठे और जान बचाने की खातिर चारों तरफ दौड़ने लगे।
हमले की तीव्रता इतनी भयानक थी कि ग्रामीणों को मजबूरन शव को सड़क पर ही छोड़ना पड़ा। कई लोग भागते समय ठोकर खाकर जमीन पर गिर पड़े, जिन पर कीड़ों ने दोबारा हमला कर दिया। कुछ लोगों ने मंदिर की ओट में छिपकर तो कइयों ने झाड़ियों और आसपास की खाली जगहों में शरण लेकर अपनी रक्षा करने का प्रयास किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पलक झपकते ही पूरा माहौल मातम से अफरा-तफरी और खौफ में बदल गया, क्योंकि झुंड ने एक साथ दर्जनों लोगों को लगातार डंक मारना जारी रखा था।
अस्पताल में उमड़ा सैलाब, दर्जनों ग्रामीण उपचाराधीन
इस अप्रत्याशित हमले में 100 से अधिक लोग बुरी तरह जख्मी हो गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को संभाला और आनन-फानन में राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। इतनी बड़ी तादाद में घायल ग्रामीणों के अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सा परिसर में भारी भीड़ एकत्र हो गई। हर कोई अपने रिश्तेदारों और परिचितों का कुशलक्षेम जानने के लिए बेताब नजर आया। अस्पताल के वार्डों और बरामदों में मरीजों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे ड्यूटी पर मौजूद चिकित्साकर्मियों और नर्सिंग स्टाफ को प्राथमिक उपचार देने के लिए भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा।
उपचार पाने वालों में शिवराज, गजेंद्र, ताराचंद, श्यामलाल, ओंकार, राजूराम, चेतन, गोरधन, भींवराज, गुदड़, पिंटू और पेमाराम समेत कई ग्रामीण शामिल हैं, जिन्हें चिकित्सकों की सघन निगरानी में रखा गया है। कई लोगों के चेहरे, हाथ और गर्दन पर डंक के गहरे निशान बन गए थे, जिससे उन्हें तेज जलन और असहनीय दर्द से जूझना पड़ा।
पूरे इलाके में दहशत, रास्तों पर सन्नाटा
एक ही दिन के भीतर घटित इन दोहरी त्रासदियों ने बेरी की ढाणी सहित आसपास के गांवों को गहरे खौफ में डाल दिया है। जिस परिवार में सुबह बुजुर्ग की मौत का मातम पसरा था, दोपहर होते-होते उसी परिवार के कई सदस्य और उनके हमदर्द अस्पताल के बिस्तरों पर पहुंच गए। अंतिम यात्रा के रास्ते पर हुए इस हमले के बाद ग्रामीणों के मन में गहरा डर बैठ गया है। लोग अब बालाजी मंदिर और ढाणी के उस मुख्य रास्ते से गुजरने से साफ बच रहे हैं, जहां यह झुंड सक्रिय हुआ था। हर तरफ केवल इसी बात की चर्चा है कि कैसे चंद घंटों में मधुमक्खियों के दो हमलों ने एक शोकाकुल परिवार और पूरे गांव के दुख को कई गुना बढ़ा दिया।



















