राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था में सरसों को रबी सीजन की सबसे अहम तिलहनी फसलों में प्रमुख स्थान प्राप्त है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मिट्टी की बनावट, पानी की उपलब्धता और तापमान की स्थिति में काफी विविधता देखने को मिलती है। यही वजह है कि खेती से जुड़े हर किसान के लिए एक ही तरह का बीज या तकनीक हर जगह एक जैसी सफलता नहीं दे सकती। सफल पैदावार के लिए जरूरी है कि किसान अपने इलाके की जलवायु और मिट्टी की तासीर के हिसाब से ही बीजों का चयन करें।
सही किस्म के चुनाव में इन बातों का रखें ध्यान
सिरोही जिले के कृषि अधिकारी नरपत सिंह के अनुसार, इस इलाके में सरसों की खेती करने वाले किसानों की संख्या काफी अधिक है। फसल की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि शुरुआत में बीज का चुनाव कितना सटीक होता है। किसानों को बीज खरीदते समय बुवाई के तय समय, खेत में मौजूद नमी की मात्रा, पानी की सुविधा और स्थानीय मौसम के मिजाज को अच्छी तरह जांच लेना चाहिए। समय पर होने वाली सिंचित बुवाई के लिए अलग तरह की प्रजातियां काम आती हैं, जबकि जिन खेतों में पानी की कमी रहती है या खेती पूरी तरह बारिश पर टिकी होती है, उनके लिए दूसरी किस्में बेहतर मानी जाती हैं।
पूसा बोल्ड और सिंचित क्षेत्रों के लिए विकल्प
राज्य के किसानों के बीच लंबे समय से पूसा बोल्ड किस्म का इस्तेमाल बहुत लोकप्रिय रहा है। यह मोटे दाने वाली एक जानी-मानी प्रजाति है, जिसे खासतौर पर समय पर बोई जाने वाली सिंचित जगहों के लिए अनुशंसित किया गया है। कृषि जानकारों के अनुसार पूसा बोल्ड को उत्तरी राजस्थान के साथ-साथ उत्तर-पश्चिमी जिलों में समय पर बुवाई वाली सिंचित जमीनों के लिए उपयुक्त माना गया है। हालांकि इस किस्म से मिलने वाली कुल पैदावार खेत की देखरेख, मौसम के बदलाव और कृषि प्रबंधन के तौर-तरीकों पर निर्भर करती है। इसलिए केवल बीज का नाम देखकर उत्पादन का पक्का अनुमान लगाने के बजाय स्थानीय कृषि कार्यालय से संपर्क करके सही राय लेना समझदारी होती है।
आरएच-749 और आरएच-725 की विशेषताएं
राज्य के कृषि क्षेत्र में आरएच-749 भी एक बेहद लोकप्रिय और प्रमुख किस्म मानी जाती है। जानकारों द्वारा इसे तय समय पर बोई जाने वाली सिंचित सरसों के लिए उपयुक्त बताया जाता है। इस प्रजाति की खासियतों में इसके बड़े दाने, लंबी फलियां और मजबूत पैदावार क्षमता शामिल हैं। इसके अलावा आरएच-725 को भी एक बेहतरीन किस्म माना गया है, जिसे अलग-अलग तरह के कृषि क्षेत्रों में उगाया जाता है। जिन इलाकों में खेती बारिश के भरोसे होती है या सिंचाई के सीमित साधन हैं, वहां के किसानों को जिले के कृषि विभाग की नवीनतम सलाह के आधार पर ही अपने लिए सही बीज चुनना चाहिए।
गिरिराज और आरएच-30 किस्मों का महत्व
उन्नत बीजों की सूची में गिरिराज यानी डीआरएमआरआईजे-31 का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। इस उन्नत किस्म को आईसीएआर, भरतपुर के शोध संस्थानों द्वारा तैयार किया गया है। कृषि विशेषज्ञ इस किस्म को राजस्थान के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी समय पर बुवाई के लिए उपयुक्त मानते हैं। इस प्रजाति के दाने बड़े होते हैं और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे बंपर पैदावार के साथ-साथ तेल की मात्रा भी अच्छी मिलती है। इसके साथ ही, पारंपरिक आरएच-30 किस्म भी राज्य में खासी पसंद की जाती है, जिसे समय पर बुवाई वाली श्रेणी में रखा गया है। आधुनिक समय में किसानों के पास कई नए उन्नत विकल्प भी आ चुके हैं, इसलिए उन्हें केवल पुराने बीजों पर टिके रहने के बजाय अपने क्षेत्र में हाल के सफल प्रयोगों की जानकारी लेनी चाहिए।























