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राजस्थान में सरसों की बंपर पैदावार के लिए सितंबर में इन उन्नत किस्मों की करें बुवाईराजस्थान
17 सित॰ 2026, 10:32 am (8 दिन पहले)· 1

राजस्थान में सरसों की बंपर पैदावार के लिए सितंबर में इन उन्नत किस्मों की करें बुवाई

राजस्थान के किसानों के लिए सितंबर का महीना सरसों की बुवाई के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, मिट्टी, जलवायु और सिंचाई के साधनों को ध्यान में रखकर सही बीज चुनने से बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है।

राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था में सरसों को रबी सीजन की सबसे अहम तिलहनी फसलों में प्रमुख स्थान प्राप्त है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मिट्टी की बनावट, पानी की उपलब्धता और तापमान की स्थिति में काफी विविधता देखने को मिलती है। यही वजह है कि खेती से जुड़े हर किसान के लिए एक ही तरह का बीज या तकनीक हर जगह एक जैसी सफलता नहीं दे सकती। सफल पैदावार के लिए जरूरी है कि किसान अपने इलाके की जलवायु और मिट्टी की तासीर के हिसाब से ही बीजों का चयन करें।

सही किस्म के चुनाव में इन बातों का रखें ध्यान

सिरोही जिले के कृषि अधिकारी नरपत सिंह के अनुसार, इस इलाके में सरसों की खेती करने वाले किसानों की संख्या काफी अधिक है। फसल की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि शुरुआत में बीज का चुनाव कितना सटीक होता है। किसानों को बीज खरीदते समय बुवाई के तय समय, खेत में मौजूद नमी की मात्रा, पानी की सुविधा और स्थानीय मौसम के मिजाज को अच्छी तरह जांच लेना चाहिए। समय पर होने वाली सिंचित बुवाई के लिए अलग तरह की प्रजातियां काम आती हैं, जबकि जिन खेतों में पानी की कमी रहती है या खेती पूरी तरह बारिश पर टिकी होती है, उनके लिए दूसरी किस्में बेहतर मानी जाती हैं।

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पूसा बोल्ड और सिंचित क्षेत्रों के लिए विकल्प

राज्य के किसानों के बीच लंबे समय से पूसा बोल्ड किस्म का इस्तेमाल बहुत लोकप्रिय रहा है। यह मोटे दाने वाली एक जानी-मानी प्रजाति है, जिसे खासतौर पर समय पर बोई जाने वाली सिंचित जगहों के लिए अनुशंसित किया गया है। कृषि जानकारों के अनुसार पूसा बोल्ड को उत्तरी राजस्थान के साथ-साथ उत्तर-पश्चिमी जिलों में समय पर बुवाई वाली सिंचित जमीनों के लिए उपयुक्त माना गया है। हालांकि इस किस्म से मिलने वाली कुल पैदावार खेत की देखरेख, मौसम के बदलाव और कृषि प्रबंधन के तौर-तरीकों पर निर्भर करती है। इसलिए केवल बीज का नाम देखकर उत्पादन का पक्का अनुमान लगाने के बजाय स्थानीय कृषि कार्यालय से संपर्क करके सही राय लेना समझदारी होती है।

आरएच-749 और आरएच-725 की विशेषताएं

राज्य के कृषि क्षेत्र में आरएच-749 भी एक बेहद लोकप्रिय और प्रमुख किस्म मानी जाती है। जानकारों द्वारा इसे तय समय पर बोई जाने वाली सिंचित सरसों के लिए उपयुक्त बताया जाता है। इस प्रजाति की खासियतों में इसके बड़े दाने, लंबी फलियां और मजबूत पैदावार क्षमता शामिल हैं। इसके अलावा आरएच-725 को भी एक बेहतरीन किस्म माना गया है, जिसे अलग-अलग तरह के कृषि क्षेत्रों में उगाया जाता है। जिन इलाकों में खेती बारिश के भरोसे होती है या सिंचाई के सीमित साधन हैं, वहां के किसानों को जिले के कृषि विभाग की नवीनतम सलाह के आधार पर ही अपने लिए सही बीज चुनना चाहिए।

गिरिराज और आरएच-30 किस्मों का महत्व

उन्नत बीजों की सूची में गिरिराज यानी डीआरएमआरआईजे-31 का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। इस उन्नत किस्म को आईसीएआर, भरतपुर के शोध संस्थानों द्वारा तैयार किया गया है। कृषि विशेषज्ञ इस किस्म को राजस्थान के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी समय पर बुवाई के लिए उपयुक्त मानते हैं। इस प्रजाति के दाने बड़े होते हैं और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे बंपर पैदावार के साथ-साथ तेल की मात्रा भी अच्छी मिलती है। इसके साथ ही, पारंपरिक आरएच-30 किस्म भी राज्य में खासी पसंद की जाती है, जिसे समय पर बुवाई वाली श्रेणी में रखा गया है। आधुनिक समय में किसानों के पास कई नए उन्नत विकल्प भी आ चुके हैं, इसलिए उन्हें केवल पुराने बीजों पर टिके रहने के बजाय अपने क्षेत्र में हाल के सफल प्रयोगों की जानकारी लेनी चाहिए।

सवाल-जवाब

सरसों की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त महीना कौन सा माना जाता है?
सितंबर का महीना राजस्थान में सरसों की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
पूसा बोल्ड किस प्रकार की सरसों की किस्म है?
पूसा बोल्ड एक मोटे दाने वाली और समय पर बोई जाने वाली सिंचित क्षेत्र की प्रसिद्ध किस्म है।
आरएच-749 किस्म की क्या प्रमुख विशेषताएं हैं?
इस किस्म में बड़े दाने, लंबी फलियां और अच्छी उपज क्षमता दर्ज की गई है।
गिरिराज (DRMRIJ-31) किस्म को किसने विकसित किया है?
इस उन्नत किस्म को आईसीएआर, भरतपुर से जुड़े संस्थानों द्वारा विकसित किया गया है।
किसानों को बीज चयन के समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
किसानों को बुवाई का समय, खेत की नमी, सिंचाई के साधन और स्थानीय जलवायु को ध्यान में रखना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 दिन पहले

राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण राजनीति का गहरा नाता है। सरसों की यह बंपर पैदावार और उन्नत बीजों का मुद्दा सीधे तौर पर किसानों की आय, न्यूनतम समर्थन मूल्य और ग्रामीण समृद्धि से जुड़ा हुआ है। नीति निर्माताओं को यह समझना होगा कि जलवायु विविधता के बीच समय पर बीज उपलब्धता और कृषि नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन ही ग्रामीण भारत के राजनीतिक समीकरणों को तय करता है।

Ravikash Gupta@ravikash·7 दिन पहले

सरसों की यह बंपर पैदावार केवल कृषि का विषय नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत की वित्तीय स्थिति और commodity markets की आपूर्ति श्रृंखला को सीधे प्रभावित करती है। जब किसान जलवायु के अनुकूल बीजों का चयन करते हैं, तो इससे उत्पादन लागत कम होती है और खुले बाज़ार में तेल के दामों पर सीधा असर पड़ता है। आने वाले महीनों में वैश्विक खाद्य तेलों के रुझान और घरेलू पैदावार के आंकड़े यह तय करेंगे कि किसानों को उनकी उपज का कितना लाभ मिलता है।

Rohan Verma@rohan-verma·7 दिन पहले

राजस्थान की यह कृषि रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के तराई और पश्चिमी जिलों के किसानों के लिए भी एक अहम सीख है, जहाँ सितंबर के आखिरी सप्ताह से सरसों की बुवाई शुरू होती है। फसल चक्र में जलवायु परिवर्तन और बदलते तापमान के इस दौर में स्थानीय मिट्टी की नमी और प्रमाणित बीजों का चयन सीधे तौर पर किसानों की आय तय करेगा। उत्तर प्रदेश के कृषि मंडलों को भी इस दिशा में समय रहते पुख्ता एडवाइजरी जारी करनी चाहिए ताकि फसल की लागत नियंत्रित रहे और पैदावार अधिकतम मिल सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 दिन पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह ध्यान रखना आवश्यक है कि कृषि से जुड़े मामलों में कई बार बीज माफिया और नकली उर्वरक तस्कर सक्रिय हो जाते हैं जो किसानों को महंगे और अमानक उत्पाद बेचते हैं। जब सितंबर में बुवाई का चक्र शुरू होता है, तब प्रशासनिक और कृषि निगरानी तंत्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाजारों में बिकने वाले बीज और खाद पूरी तरह प्रमाणित हों। मिलावटखोरी या धोखाधड़ी से जुड़े आपराधिक मामलों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई से न केवल किसानों की आर्थिक सुरक्षा पुख्ता होगी, बल्कि उनकी मेहनत भी व्यर्थ नहीं जाएगी।

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