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राजस्थान निकाय चुनाव में BSP की 19 सीटों पर जीत, मायावती ने सरकारी मशीनरी पर लगाया धांधली का आरोपराजस्थान
15 सित॰ 2026, 5:47 pm (10 दिन पहले)· 2

राजस्थान निकाय चुनाव में BSP की 19 सीटों पर जीत, मायावती ने सरकारी मशीनरी पर लगाया धांधली का आरोप

राजस्थान निकाय चुनाव में बसपा ने 19 पार्षद सीटें जीती हैं, जिसके बाद पार्टी सुप्रीमो मायावती ने कार्यकर्ताओं को बधाई दी और प्रशासन पर मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगाया।

राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों में बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने अपनी जमीनी पकड़ का प्रदर्शन करते हुए 19 पार्षद सीटों पर कब्जा जमाया है। इन चुनावी नतीजों के सामने आने के बाद, बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी के इस प्रदर्शन पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने विजयी प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप भी लगाए। मायावती का कहना है कि अगर प्रशासनिक स्तर पर गड़बड़ी नहीं की गई होती, तो पार्टी को इन चुनावों में और भी बड़ी सफलता मिल सकती थी।

सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप

बसपा प्रमुख ने 15 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात जनता के सामने रखी। मायावती ने आरोप लगाया कि मतगणना के अंतिम चरणों में कई स्थानों पर बसपा उम्मीदवारों को बेहद कम वोटों के अंतर से जबरन हरा दिया गया। उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर सरकारी मशीनरी को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि दोबारा गिनती के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने निष्पक्षता से काम नहीं किया। उनके अनुसार, यदि प्रशासन की ओर से ऐसी पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और गड़बड़ी नहीं की गई होती, तो राजस्थान में बसपा का चुनावी गणित कहीं बेहतर होता। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने मतदाताओं के भरोसे के लिए उनका धन्यवाद किया।

इन इलाकों में मिली बसपा को सफलता

अगर चुनावी नतीजों के भौगोलिक विस्तार को देखें, तो बसपा ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। पार्टी के प्रत्याशियों ने कई महत्वपूर्ण नगर निकायों में जीत का परचम लहराया है। इसमें अलवर नगर निगम और भरतपुर नगर निगम जैसे बड़े शहरी क्षेत्र शामिल हैं, जहां बसपा उम्मीदवारों को सफलता मिली है। इसके अलावा, छबड़ा, लवाण, महवा, बृजनगर, बाड़ी, राजाखेड़ा और सैंपऊ जैसे कस्बों और नगरों में भी पार्टी ने पार्षद सीटों पर जीत हासिल की है। धौलपुर नगर परिषद, करौली नगर परिषद और भिवाड़ी नगर परिषद में भी बसपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जिससे राज्य भर में पार्टी के कुल पार्षदों की संख्या 19 हो गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर उम्मीदें

बसपा नेतृत्व इन निकाय चुनाव परिणामों को भविष्य की बड़ी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार मान रहा है। मायावती ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि पार्टी का यह बेहतर प्रदर्शन केवल राजस्थान तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि पंजाब समेत देश के अन्य राज्यों में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भी बसपा का प्रदर्शन पिछले चुनावों के मुकाबले सुधरा है। उन्होंने इन राज्यों के सभी पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं को इस सफलता के लिए बधाई दी। पार्टी को पूरा भरोसा है कि स्थानीय स्तर पर मिले इस नए उत्साह और संगठनात्मक मजबूती का सीधा लाभ आने वाले समय में होने वाले विधानसभा चुनावों और लोकसभा के महामुकाबले में देखने को मिलेगा।

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सवाल-जवाब

राजस्थान निकाय चुनाव में BSP ने कितनी सीटें जीती हैं?
BSP ने राजस्थान के विभिन्न नगर निकायों में कुल 19 पार्षद सीटों पर जीत दर्ज की है।
मायावती ने चुनाव परिणामों को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
मायावती ने आरोप लगाया है कि दोबारा मतगणना के दौरान सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया गया, जिससे उनके कई उम्मीदवार बेहद कम अंतर से हार गए।
BSP ने किन मुख्य शहरों के नगर निगमों में जीत हासिल की है?
BSP ने अलवर नगर निगम और भरतपुर नगर निगम जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में पार्षद सीटों पर जीत हासिल की है।
मायावती ने अपने बयान में और किन राज्यों का उल्लेख किया है?
मायावती ने पंजाब और देश के कुछ अन्य राज्यों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के स्थानीय निकाय चुनावों में भी पार्टी का प्रदर्शन बेहतर हुआ है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

पूर्वी राजस्थान—विशेषकर धौलपुर, भरतपुर और अलवर—में बसपा का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि पार्टी का पारंपरिक कैडर स्थानीय स्तर पर अब भी प्रभावी है। निकाय चुनावों में मिली यह सफलता कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरेगी, जो आने वाले बड़े चुनावी मुकाबलों में संगठनात्मक मजबूती के लिए जरूरी है। वहीं, प्रशासनिक धांधली के आरोप लगाना एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है—इससे न केवल नजदीकी हार के बावजूद कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहता है, बल्कि भविष्य के चुनावों के लिए सतर्कता का माहौल भी बनता है।

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·8 दिन पहले

अर्जुन की बात से आगे बढ़ते हुए, उत्तर भारत की क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज़ से यह रुझान काफी अहम है। राजस्थान के साथ-साथ पंजाब जैसे राज्यों के निकाय चुनावों में बसपा की यह मौजूदगी साबित करती है कि बुनियादी मुद्दों पर जमीनी कैडर आज भी जीवित है। हालांकि, केवल धांधली के आरोप लगाने से आगे बढ़कर पार्टी को इन स्थानीय जीतों को स्थायी संगठनात्मक बढ़त में बदलना होगा। चुनौती यह होगी कि क्या बसपा इन 19 पार्षदों के जरिए स्थानीय शासन में असरदार उपस्थिति दर्ज करा पाएगी और कार्यकर्ताओं को बड़ी राजनीतिक लड़ाइयों तक जोड़े रख पाएगी।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

पूर्वी राजस्थान जैसे अलवर, भरतपुर और धौलपुर में बसपा की 19 सीटों पर जीत यह दर्शाती है कि क्षेत्र विशेष में पार्टी का पारंपरिक कैडर और जनाधार अब भी सक्रिय है। हालांकि, मतगणना में गड़बड़ी के प्रशासनिक आरोप अक्सर चुनावी पराजय के बाद कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की एक राजनीतिक रणनीति भी होते हैं। निकाय स्तर की यह सीमित सफलता पंजाब के साथ मिलकर बसपा को आगामी बड़े चुनावों से पहले खुद को प्रासंगिक बनाए रखने का एक मौका देती है, बशर्ते पार्टी इस जमीनी समर्थन को स्थायी संगठनात्मक ढाँचे में बदल पाए।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

पूर्वी राजस्थान और शहरी-कस्बाई क्षेत्रों जैसे भरतपुर, अलवर और धौलपुर में 19 सीटें जीतना यह दर्शाता है कि बसपा का स्थानीय कैडर धरातल पर अभी भी सक्रिय है। मायावती द्वारा एक तरफ कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाना और दूसरी तरफ मतगणना में प्रशासनिक पक्षपात का आरोप लगाना, कम अंतर से हारी सीटों पर कैडर के मनोबल को टूटने से बचाने की एक सोची-समझी रणनीतिक पहल है। राजस्थान के साथ पंजाब का जिक्र कर पार्टी नेतृत्व यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उसका आधार केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, जिसका इस्तेमाल वह आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपने सांगठनिक पुनरुत्थान के लिए करना चाहती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

प्रशासनिक पक्षपात और मतगणना में गड़बड़ी के आरोपों को अगर कानूनी और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से देखें, तो केवल राजनीतिक बयानबाजी से परे प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो जाता है। यदि प्रक्रियागत अनियमितताओं के दावों में तथ्य हैं, तो प्रभावित उम्मीदवारों को चुनाव याचिकाओं के ज़रिए अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए। कानूनी तौर पर बिना ठोस साक्ष्यों के अधिकारियों पर आरोप लगाना जहाँ चुनाव प्रणाली की साख को प्रभावित करता है, वहीं निष्पक्ष जाँच न होना जन-विश्वास को ठेस पहुँचाता है। आगामी चुनावों में ऐसी शिकायतों से बचने के लिए प्रशासन को मतगणना सुरक्षा और पारदर्शी प्रक्रियाओं के सख्त मानक लागू करने होंगे।

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