फिलीपींस के सेबू शहर में होने जा रही आसियान रक्षा मंत्रियों की 13वीं बैठक (एडीएमएम-प्लस) में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचेंगे। यह महत्वपूर्ण कूटनीतिक आयोजन 28 और 29 अक्टूबर को निर्धारित किया गया है, जहां भारत वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा। इस मंच पर केवल एक सामान्य भागीदार के तौर पर शिरकत करने के बजाय, भारत आतंकवाद के खात्मा और उससे जुड़े सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने में एक केंद्रीय और सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जो इसे कूटनीतिक रूप से बेहद खास बनाता है।
आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता
भारत और मलेशिया संयुक्त रूप से वर्ष 2024 से 2027 के कार्यकाल के लिए आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता संभाल रहे हैं। इस आगामी बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े तमाम संवेदनशील और गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। राजनाथ सिंह इस दौरान मंच पर भारत के सुरक्षा दृष्टिकोण को मजबूती के साथ रखेंगे और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर देंगे। इसके साथ ही, उनका विभिन्न देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकों का भी कार्यक्रम है, जिसके जरिए आपसी रक्षा संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के नए रास्ते तलाशे जाएंगे।
वैश्विक शक्तियों की मौजूदगी और रणनीतिक एजेंडा
इस उच्चस्तरीय बैठक का रणनीतिक महत्व इसलिए भी काफी अधिक है क्योंकि इसमें दक्षिण-पूर्व एशिया के 11 आसियान सदस्य देशों के साथ-साथ भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे प्रभावशाली देश भी हिस्सा लेंगे। यह मंच इन तमाम राष्ट्रों को रक्षा और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सीधे तौर पर संवाद स्थापित करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। इस कार्यक्रम के मुख्य सत्र के दौरान राजनाथ सिंह ‘क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान’ विषय पर अपना संबोधन देंगे, जिसमें भारत की प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय स्थिरता के दृष्टिकोण को रेखांकित किया जाएगा।
सहयोग की समीक्षा और रणनीतिक साझेदारी
संबोधन के अलावा, भारतीय रक्षा मंत्री भाग लेने वाले देशों के अपने समकक्षों के साथ अलग से द्विपक्षीय मुलाकातें भी करेंगे। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य मौजूदा रक्षा सहयोग की व्यापक समीक्षा करना और रणनीतिक साझेदारी को भविष्य के लिए और अधिक मजबूत बनाने के ठोस उपायों पर सहमति बनाना है। इस तरह की उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत से भारत और अन्य भाग लेने वाले देशों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में विश्वास और आपसी तालमेल को नई गति मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
एडीएमएम-प्लस का इतिहास और भारत की एक्ट ईस्ट नीति
आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक का यह विस्तारित स्वरूप (एडीएमएम-प्लस) क्षेत्रीय रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने वाला दुनिया का एक प्रमुख मंच माना जाता है। इस विशिष्ट मंच की ऐतिहासिक पहली बैठक 12 अक्टूबर 2010 को वियतनाम की राजधानी हनोई में आयोजित की गई थी। ऐतिहासिक रूप से देखें तो भारत वर्ष 1992 में आसियान का आधिकारिक संवाद साझेदार बना था। वर्ष 2017 से इस मंच के रक्षा मंत्री नियमित रूप से हर साल बैठकें कर रहे हैं, ताकि सदस्य देशों और उनके रणनीतिक साझेदारों के बीच रक्षा सहयोग को निरंतर आगे बढ़ाया जा सके और आपसी सुरक्षा चिंताओं का मिलकर सामना किया जा सके। फिलीपींस वर्ष 2026 में इस प्रतिष्ठित बैठक की अध्यक्षता कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस बैठक में भारत की सक्रिय भागीदारी दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ अपने रक्षा संबंधों को लगातार सुदृढ़ करने की उसकी व्यापक ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का एक अनिवार्य हिस्सा है। इस नीति के तहत भारत इस क्षेत्र के सभी मित्र देशों के साथ आपसी सहयोग को गहरा करने, शांति बनाए रखने, स्थिरता सुनिश्चित करने और साझा विकास को प्रोत्साहित करने पर विशेष रूप से जोर देता है। सेबू में होने वाली यह बैठक भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा के तमाम जटिल मुद्दों पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखने और विभिन्न देशों के साथ मिलकर मजबूत रक्षा साझेदारियों को आकार देने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करेगी।





















