घरेलू इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में तेजी से पैर पसार रही वाहन विनिर्माता कंपनी एथर एनर्जी के शेयरों में सोमवार, 26 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित होने के तुरंत बाद निवेशकों की मजबूत खरीदारी से कंपनी के शेयर लगभग 19 फीसदी तक चढ़ गए। लंबे समय से घाटे का सामना कर रही इस प्रमुख ईवी कंपनी का शुद्ध मुनाफे में आना न केवल कंपनी के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रिक स्कूटर उद्योग में एक बड़ा बदलाव भी दर्शाता है।
बाजार में शेयरों का शानदार प्रदर्शन
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन एथर एनर्जी का शेयर 1,365.60 रुपये के भाव पर खुला था। कारोबार के दौरान इसने 1,345.70 रुपये का निचला स्तर छुआ, लेकिन तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद खरीदारी का जबरदस्त दौर शुरू हुआ। कंपनी का शेयर पिछले बंद भाव की तुलना में 18.85 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाकर 1,623 रुपये के इंट्राडे उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। दोपहर बाद करीब 3:14 बजे यह शेयर अपने शुरुआती भाव से लगभग 15.2 फीसदी की बढ़त बनाकर 1,572.60 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा।
घाटे से मुनाफे में पलटा कारोबार
कंपनी के वित्तीय आंकड़े बताते हैं कि दूसरी तिमाही में एथर एनर्जी ने जोरदार वापसी की है। कंपनी ने आलोच्य तिमाही में 1.26 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है, जबकि ठीक एक साल पहले समान तिमाही में कंपनी को 154 करोड़ रुपये का भारी शुद्ध घाटा हुआ था। इसके साथ ही परिचालन से प्राप्त राजस्व में भी जबरदस्त इजाफा देखा गया। कंपनी का कुल राजस्व सालाना आधार पर 62.8 प्रतिशत उछलकर 1,464 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 899 करोड़ रुपये रहा था। उच्च बिक्री और कारोबारी आधार में लगातार विस्तार ने राजस्व की इस छलांग में मुख्य भूमिका निभाई।
वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री से बढ़ा ऑपरेटिंग लेवरेज
वित्तीय आंकड़ों में यह तीव्र सुधार मुख्य रूप से बिक्री की संख्या में हुई ठोस वृद्धि के कारण संभव हुआ है। एथर एनर्जी ने दूसरी तिमाही के दौरान कुल 93,000 इलेक्ट्रिक स्कूटर बेचे, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 42 प्रतिशत अधिक है। भारी संख्या में वाहनों की आपूर्ति से न केवल कंपनी का राजस्व बढ़ा, बल्कि विनिर्माण, तकनीकी विकास, वितरण और बिक्री के बाद की सेवाओं से जुड़ी स्थिर लागतों का बेहतर प्रबंधन करने में भी मदद मिली। इलेक्ट्रिक दोपहिया विनिर्माताओं के लिए वाहनों की अधिक बिक्री ऑपरेटिंग लेवरेज को बेहतर बनाने का काम करती है। उत्पादन और बिक्री बढ़ने से निर्धारित खर्च बड़ी संख्या में तैयार वाहनों पर बंट जाते हैं, जिससे अगर अन्य खर्चे नियंत्रण में रहें तो मुनाफा मार्जिन मजबूत होने लगता है।
उद्योग के लिए इस बदलाव के मायने और आगे की राह
इलेक्ट्रिक दोपहिया क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां वर्तमान समय में नए उत्पादों के विकास, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के नेटवर्क विस्तार, खुदरा शोरूमों की स्थापना और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाने के लिए भारी पूंजी निवेश कर रही हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में भारी घाटे से उबरकर मामूली शुद्ध लाभ दर्ज करना एक उल्लेखनीय घटना मानी जा रही है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुनाफे की निरंतरता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपनी बिक्री की रफ्तार को किस तरह कायम रखती है। भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों, बैटरी रेंज, तकनीकी प्रदर्शन और ग्राहकों की कुल स्वामित्व लागत के मोर्चे पर कड़ा मुकाबला जारी रहने की संभावना है।



















