झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ में बेसहारा, बीमार और सड़क हादसों में घायल होने वाले गोवंश के लिए गोरक्षा सेवा समिति के कार्यकर्ता एक बड़ा सहारा बन चुके हैं। किसी भी बेजुबान पशु के दर्द में होने की सूचना मिलते ही ये कार्यकर्ता अपने निजी कार्यों को छोड़कर तुरंत राहत पहुंचाने के लिए निकल पड़ते हैं। घायल पशुओं को सुरक्षित तरीके से अस्पताल तक लाना, पशु चिकित्सकों के माध्यम से उनका समुचित इलाज करवाना और उनके पूरी तरह स्वस्थ होने तक लगातार देखभाल करना इन कार्यकर्ताओं की दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन चुका है। पिछले लगभग 10 वर्षों से लगातार जारी इस सेवा कार्य ने न केवल संकट में फंसे मवेशियों को नया जीवन दिया है, बल्कि आम नागरिकों को भी इस नेक और मानवीय पहल से जोड़ने का काम किया है। कार्यकर्ताओं के इस निष्काम समर्पण को देखकर क्षेत्र के कई बड़े भामाशाह और दानी सज्जन भी आगे आए हैं, जिन्होंने इस गौ अस्पताल में लाखों रुपये का आर्थिक योगदान देकर चिकित्सा, चारा, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभूतपूर्व विस्तार किया है।
चाणक्यपुरी में संचालित हो रहा आधुनिक सुविधाओं से लैस गौ अस्पताल
सूरजगढ़ के चाणक्यपुरी इलाके में गोरक्षा सेवा समिति द्वारा संचालित यह गौ अस्पताल आज के समय में बीमार और दुर्घटना का शिकार हुए गोवंश की देखभाल का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस संस्थान का पूरा संचालन आमजन के स्वैच्छिक सहयोग और भामाशाहों की उदार सहायता से किया जाता है। अस्पताल परिसर में लाए जाने वाले बीमार और जख्मी पशुओं का अनुभवी पशु चिकित्सकों की देखरेख में इलाज किया जाता है। उपचार प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो मवेशी पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं, उन्हें वापस सुरक्षित खुले वातावरण में छोड़ दिया जाता है, जबकि जिन गंभीर और असमर्थ पशुओं के लिए तुरंत चलना-फिरना संभव नहीं होता, उन्हें अस्पताल में ही रखकर विशेष निगरानी में रखा जाता है। वर्तमान समय में इस अस्पताल के भीतर करीब 25 से 30 गोवंश चिकित्सीय उपचार और नियमित देखरेख के दायरे में रह रहे हैं।
लम्पी संक्रमण के कठिन दौर में निभाई थी ऐतिहासिक भूमिका
गौ सेवा के प्रति समिति के सदस्यों की अटूट प्रतिबद्धता उस चुनौतीपूर्ण समय में भी स्पष्ट रूप से सामने आई थी, जब खतरनाक लम्पी संक्रमण ने पूरे इलाके के गोवंश को अपनी गंभीर चपेट में ले लिया था। उस महामारी के दौरान संक्रमित और बीमार पशुओं को सुरक्षित रखने तथा उनका सही इलाज करने के लिए समिति ने त्वरित कदम उठाते हुए एक अलग क्वारेंटाइन सेंटर की स्थापना की थी। इस विशेष केंद्र पर संक्रमित मवेशियों को स्वस्थ पशुओं से पूरी तरह अलग रखकर उनका इलाज और पोषण सुनिश्चित किया गया था। समिति के इन समर्पित प्रयासों के परिणामस्वरूप ही महामारी की चपेट में आए कई मवेशियों की जान बचाने में बड़ी सफलता हासिल हुई थी। उस आपदा के दौर में कार्यकर्ताओं ने दिन-रात जिस सेवाभाव का परिचय दिया, उससे आम जनता का संस्था के प्रति भरोसा और अधिक मजबूत हो गया। गोवंश की इस अनथक सेवा को देखकर क्षेत्र के कई प्रमुख दानदाता मदद के लिए स्वतः आगे आए। किसी ने भवन के निर्माण में आर्थिक मदद पहुंचाई, किसी ने भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए बड़े कूलर उपलब्ध कराए, तो किसी ने नियमित चारे और चिकित्सा उपकरणों के लिए दिल खोलकर वित्तीय सहायता दी। इस तरह धीरे-धीरे जनसहयोग ही इस गौ अस्पताल की व्यवस्थाओं को मजबूती प्रदान करने का मुख्य आधार बन गया।
दानदाताओं के सहयोग से खड़े हुए मेडिकल रूम और चारा गृह
आज इस गौ अस्पताल के परिसर में जो उन्नत और आधुनिक सुविधाएं नजर आती हैं, उनके मूल में वर्षों से मिल रहा जनसहयोग और भामाशाहों की सक्रिय भागीदारी है। गोपाल बरासिया ने दो लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक मेडिकल रूम और एक लाख रुपये की लागत से शौचालय का निर्माण करवाया है। इसके अलावा, हादसे में घायल या बीमार गोवंश को घटनास्थल से उठाकर आसानी से अस्पताल तक लाने के लिए एक पिकअप गाड़ी में दो लाख रुपये खर्च करके विशेष लिफ्ट सिस्टम लगवाया गया है। बुरहानपुर के प्रवासी रामधारी मित्तल ने तीन लाख रुपये के आर्थिक योगदान से एक विशाल चारा गृह का निर्माण करवाया, जिससे मवेशियों के लिए पौष्टिक चारे का भंडारण और वितरण बेहतर तरीके से हो सके। झुंझुनूं के महेश राणासरिया ने चार लाख रुपये की लागत से श्रीकृष्ण गौ मंदिर की स्थापना की है। कोलकाता से ताल्लुक रखने वाले प्रवासी मांगेलाल मित्तल ने ढाई लाख रुपये की राशि देकर सोलर सिस्टम से चलने वाले बोरिंग का निर्माण कराया। इसके अलावा दिल्ली के प्रवासी महेश शाह, सुरेश झुंझुनूंवाला और संजय डीडवाणिया के संयुक्त सहयोग से अस्पताल परिसर में एक सुसज्जित ऑपरेशन थियेटर का निर्माण किया गया है। समिति के संरक्षक सज्जन अग्रवाल ने एक लाख रुपये की लागत से वाटर कूलर युक्त अत्याधुनिक प्याऊ का निर्माण कराया है। इसके साथ ही जनसहयोग के माध्यम से एक सुरक्षित स्टोर रूम भी बनाया गया है, जिससे अस्पताल के रोजमर्रा के सामान और प्रबंधन को संभालने में काफी सुविधा मिलती है.
लगातार जारी है गोवंश के लिए सुविधाओं के विस्तार का कार्य
गौ अस्पताल के भीतर मवेशियों की देखभाल और उनकी सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को और अधिक उन्नत बनाने का सिलसिला लगातार जारी है। हाल ही में स्थानीय नागरिकों और दानदाताओं के सामूहिक सहयोग से अस्पताल की सुरक्षा दीवार यानी चारदीवारी की ऊंचाई बढ़ाई गई है, साथ ही गोवंश को धूप और बरसात से बचाने के लिए टिन शेड की लंबाई में भी विस्तार किया गया है। इन तमाम निर्माण कार्यों का मुख्य उद्देश्य अस्पताल में शरण लेने वाले हर एक मवेशी के लिए अधिक से अधिक आरामदायक और सुविधाजनक माहौल तैयार करना है। क्षेत्र के भामाशाहों ने अपनी सहायता को केवल वित्तीय अनुदान तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि समय की आवश्यकता को समझते हुए भवन निर्माण सामग्री, जरूरी चिकित्सीय उपकरण और अन्य तमाम आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाकर इस संस्था का संबल बढ़ाया है। इन सभी समन्वित प्रयासों के जरिए ही आज अस्पताल के भीतर इलाज, चारा, पानी और समग्र देखभाल के प्रबंध अत्यंत मजबूत हो चुके हैं।
सूचना मिलते ही हर वक्त मैदान में डटे रहते हैं कार्यकर्ता
समिति से जुड़े सदस्यों के लिए मवेशियों की सेवा करना किसी निश्चित समय या विशेष अवसर तक सीमित नहीं है। दिन हो या रात, किसी भी समय यदि किसी बीमार या सड़क दुर्घटना में घायल गोवंश के बारे में सूचना मिलती है, तो कार्यकर्ता अपने सारे जरूरी काम छोड़कर तुरंत घटनास्थल की ओर रवाना हो जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर विशेष रूप से तैयार पिकअप वाहन की मदद से घायल पशु को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाता है, जहां डॉक्टर उसकी जांच कर इलाज शुरू करते हैं। इस पूरे सेवा कार्य में समिति से जुड़े लोग पूरी निष्ठा से अपना योगदान दे रहे हैं। इन समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी मानसिक संतुष्टि किसी तड़पते या बीमार गोवंश को पुनः स्वस्थ होते हुए देखना है। समिति के सदस्यों का मानना है कि आम जनता और उदार भामाशाहों से मिलने वाला लगातार सहयोग उन्हें बिना थके सेवा कार्य करते रहने की प्रेरणा देता है। जब समाज का हर वर्ग ऐसे आयोजनों के लिए कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ा होता है, तो बेसहारा मवेशियों के उपचार और उनकी दैनिक जरूरतों के लिए संसाधन जुटाना बहुत आसान हो जाता है.
समाज की भागीदारी से खड़ी हुई मानवीय सेवा की अनूठी मिसाल
सूरजगढ़ का यह गौ अस्पताल इस बात का जीवंत प्रमाण प्रस्तुत करता है कि यदि समाज के लोग एकजुट होकर प्रयास करें, तो बड़े से बड़े कल्याणकारी कार्यों को कितनी सफलता के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। पिछले लगभग 10 वर्षों से लगातार गोरक्षा सेवा समिति के कार्यकर्ता बेसहारा गोवंश के जीवन की रक्षा और उनकी देखभाल के पवित्र कार्य में पूरी तन्मयता से जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर, क्षेत्र के भामाशाहों ने भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक और भौतिक सहयोग देकर इस महाअभियान को एक नई मजबूती प्रदान की है। किसी ने पक्के भवनों का निर्माण कराया, किसी ने मवेशियों के लिए ठंडी हवा के वास्ते कूलर लगवाए, किसी ने भव्य चारा गृह तैयार कराया, तो किसी ने गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए जरूरी जीवनरक्षक सुविधाएं जुटाने में मदद की। इन सभी अलग-अलग प्रयासों का मूल उद्देश्य और गंतव्य केवल एक ही रहा है, और वह यह है कि किसी भी बीमार, घायल या बेसहारा गोवंश को समय पर उचित सहायता मिल सके और उनका जीवन सुरक्षित हो सके।


















