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रक्षा मंत्रालय 1 लाख करोड़ रुपये में खरीदेगा 60 आधुनिक परिवहन विमान, पुराने एएन-32 की होगी छुट्टीकर्नाटक
21 सित॰ 2026, 5:38 pm (10 दिन पहले)· 1

रक्षा मंत्रालय 1 लाख करोड़ रुपये में खरीदेगा 60 आधुनिक परिवहन विमान, पुराने एएन-32 की होगी छुट्टी

भारतीय वायुसेना के पुराने परिवहन बेड़े को बदलने के लिए 60 नए विमान खरीदने की योजना तैयार की गई है, जिनमें से 48 विमान देश में ही तैयार होंगे।

सैन्य रसद और अग्रिम चौकियों तक भारी तोपों की आपूर्ति को निर्बाध बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार एक विशाल रक्षा सौदे पर अंतिम सहमति देने की दिशा में बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान तय किया गया है। इसके जरिए सोवियत संघ के जमाने से सेवा दे रहे पुराने पड़ चुके एएन-32 विमानों के संपूर्ण बेड़े को सेवामुक्त किया जाएगा। उनकी जगह 60 अत्यंत आधुनिक मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (एमटीए) को बेड़े में शामिल करने की रूपरेखा बनाई गई है, जिससे सीमाओं पर रणनीतिक मोर्चेबंदी मजबूत होगी और घरेलू एयरोस्पेस क्षेत्र में उत्पादन के नए आयाम खुलेंगे।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, शुरुआती 12 विमान सीधे निर्माता द्वारा उड़ान भरने योग्य स्थिति में सौंपे जाएंगे। इसके बाद बाकी बचे 48 विशाल विमानों का निर्माण पूर्णतः 'मेक इन इंडिया' पहल के अंतर्गत भारतीय कारखानों में किया जाना निर्धारित है। इस कदम से विदेशी निर्भरता घटाने के साथ-साथ देश की रणनीतिक आत्मनिर्भरता को व्यापक संबल मिलेगा।

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सीमावर्ती इलाकों में भारी साजो-सामान उतारने की नई रणनीति

उत्तरी सीमाओं पर स्थित लद्दाख के ऊंचे बर्फीले पहाड़ों से लेकर पश्चिमी छोर के रेतीले विस्तार तक रसद पहुंचाने के लिए वायुसेना को अत्यधिक मजबूत प्लेटफॉर्म की दरकार है। ये नए विमान 18 से लेकर 30 टन तक का युद्धक भार और भारी आर्टिलरी गन आसानी से अग्रिम इलाकों तक पहुंचाने की ताकत रखते हैं। पूर्ववर्ती एएन-32 के मुकाबले इस नए वर्ग के विमानों की उड़ान गति काफी तेज होगी, इनका दायरा अधिक दूर तक फैला होगा और इनके भीतर डिजिटल कॉकपिट तकनीक के साथ उन्नत एवियोनिक्स लगे होंगे।

इस समय भारतीय वायुसेना द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा सी-130जे सुपर हरक्यूलिस करीब 20 टन तक का भार ढोने में सक्षम है। प्रस्तावित नए मध्यम परिवहन विमान इस भार सीमा को पार करते हुए और अधिक भारी उपकरणों को युद्धक्षेत्र में पहुंचाने का सामर्थ्य प्रदान करेंगे।

घरेलू विनिर्माण और एम्ब्रेयर सी-390 की दावेदारी

भारत में तैयार होने वाले 48 विमानों में स्थानीय स्तर पर विकसित कलपुर्जों की हिस्सेदारी बहुत अधिक रखी जाएगी। इससे देश का आंतरिक विमानन तंत्र किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत तकनीकी सहायता और मरम्मत उपलब्ध कराने के काबिल बन सकेगा।

इस विशाल परियोजना के प्रमुख दावेदारों में ब्राजील की जानी-मानी विमानन कंपनी एम्ब्रेयर का सी-390 मिलेनियम प्रमुखता से उभर रहा है। जेट प्रणोदन तकनीक पर आधारित यह आधुनिक मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट अधिकतम 26 टन तक वजन उठाने की क्षमता रखता है। यह विमान मात्र सैन्य रसद पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सैनिकों को युद्धक्षेत्र में उतारने, आपातकालीन चिकित्सा निकासी, आग बुझाने, तलाशी एवं बचाव अभियानों तथा संकट के समय मानवीय राहत कार्यों में भी व्यापक रूप से काम आता है। इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि यह कच्चे, ऊबड़-खाबड़ या अस्थायी एयरस्ट्रिप पर भी सुरक्षित उतर और उड़ान भर सकता है।

वैश्विक स्वीकृति और महिंद्रा डिफेंस के साथ औद्योगिक गठबंधन

सी-390 मिलेनियम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई नाटो देशों की वायुसेनाओं में अपनी जगह बना चुका है, जिससे मध्यम वजन वर्ग के परिवहन विमानों में इसकी साख मजबूत हुई है। इस कार्यक्रम को घरेलू धरती पर लागू करने के लिए एम्ब्रेयर ने महिंद्रा डिफेंस के साथ रणनीतिक भागीदारी की है। इस साझा उपक्रम के माध्यम से देश में ही विमान असेंबली लाइन और नियमित रख-रखाव के केंद्र स्थापित करने की तैयारी है।

भारत के उत्तरी और पूर्वोत्तर सीमांत इलाके अत्यंत जटिल और कठिन भौगोलिक बनावट वाले हैं। ऐसे संवेदनशील भूभागों में त्वरित गति से जवानों की तैनाती, हथियारों का परिवहन और गोला-बारूद की निरंतर खेप पहुंचाना रक्षा सुरक्षा के लिहाज से बहुत निर्णायक माना जाता है।

आपदा प्रबंधन और विदेशी राहत अभियानों में उपयोगिता

सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ ये विशाल परिवहन विमान वैश्विक स्तर पर मानवीय अभियानों में भी देश की क्षमता साबित करेंगे। जून 2026 में जब वेनेजुएला में भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी, तब भारत ने 'ऑपरेशन अमिस्ताद' के तहत राहत सामग्री भेजने में अपने विशाल विमानों का सहारा लिया था। उस समय भारतीय वायुसेना के दो सी-17 ग्लोबमास्टर III विमान सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल के 41 सदस्यीय मेडिकल दल, कई जीवनरक्षक उपकरण, राहत सामग्री और दो भीष्म क्यूब पोर्टेबल अस्पतालों को सुरक्षित वेनेजुएला लेकर पहुंचे थे। भविष्य में नए मध्यम परिवहन विमान ऐसे कई अंतरराष्ट्रीय अभियानों में देश के रिस्पॉन्स समय को और घटाएंगे।

सवाल-जवाब

भारतीय वायुसेना कितने नए मध्यम परिवहन विमान खरीदने की तैयारी कर रही है?
वायुसेना के लिए 60 नए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (एमटीए) खरीदे जाएंगे।
इस मेगा रक्षा सौदे की अनुमानित लागत कितनी है?
इस पूरे रक्षा सौदे पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इन 60 विमानों में से कितने भारत में बनाए जाएंगे?
शुरुआती 12 विमान तैयार स्थिति में मिलेंगे, जबकि बाकी 48 विमान 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में निर्मित होंगे।
ये नए विमान किन पुराने विमानों की जगह लेंगे?
ये नए विमान सोवियत दौर के पुराने पड़ चुके एएन-32 विमानों के बेड़े की जगह लेंगे।
नए परिवहन विमानों की वजन ढोने की क्षमता कितनी होगी?
ये नए विमान 18 से 30 टन तक का भारी सैन्य साजो-सामान और तोपें ले जाने में सक्षम होंगे।
ब्राजील के सी-390 विमान की अधिकतम पेलोड क्षमता क्या है?
एम्ब्रेयर द्वारा निर्मित सी-390 मिलेनियम विमान की अधिकतम भार वहन क्षमता 26 टन है।
एम्ब्रेयर ने भारत में इस परियोजना के लिए किस भारतीय कंपनी से साझेदारी की है?
एम्ब्रेयर ने इस कार्यक्रम के लिए महिंद्रा डिफेंस के साथ औद्योगिक साझेदारी की है।
जून 2026 में वेनेजुएला भूकंप के दौरान भारत ने कौन सा अभियान चलाया था?
भारत ने 'ऑपरेशन अमिस्ताद' चलाकर सी-17 ग्लोबमास्टर III विमानों से राहत सामग्री और फील्ड अस्पताल भेजा था।
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टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·9 दिन पहले

भारतीय वायुसेना द्वारा पुराने एएन-32 विमानों को हटाने और साठ आधुनिक मध्यम परिवहन विमानों को शामिल करने की यह योजना दक्षिण एशिया में सैन्य संतुलन और रसद आपूर्ति के लिहाज से एक बड़ा रणनीतिक कदम है। इस विशाल सौदे से न केवल सीमावर्ती इलाकों में भारी तोपों और साजो-सामान की त्वरित तैनाती सुनिश्चित होगी, बल्कि भारत की घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता भी मजबूत होगी। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और सामरिक मोर्चेबंदी पर सीधा असर पड़ेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

यह रक्षा सौदा केवल पुराने विमान बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू एयरोस्पेस इकोसिस्टम को स्थापित करने की एक बड़ी रणनीतिक छलांग है। 60 में से 48 विमानों का देश में निर्माण होना और स्थानीय कलपुर्जों की अनिवार्यता भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम है। हालांकि, इतने बड़े बजट की परियोजना के लिए समयबद्ध आपूर्ति और कड़े गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी।

Tanvi Desai@tanvi-desai·9 दिन पहले

यह रक्षा सौदा केवल सैन्य आधुनिकीकरण नहीं, बल्कि भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के लिए एक गेम-चेंजर है। 48 विमानों का घरेलू विनिर्माण और स्थानीय कलपुर्जों का उपयोग हमारी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर तकनीक के हस्तांतरण और समयबद्ध उत्पादन को बनाए रखना एक जटिल प्रशासनिक चुनौती होगी, जिस पर पूरी प्रक्रिया के दौरान कड़ी निगरानी की आवश्यकता होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

एक लाख करोड़ रुपये के इस रक्षा सौदे में घरेलू विनिर्माण पर जोर देना राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ रणनीतिक स्वावलंबन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 'मेक इन इंडिया' के तहत 48 विमानों का देश में निर्माण न केवल विदेशी निर्भरता को कम करेगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रसद आपूर्ति और सैन्य साजो-सामान के त्वरित परिवहन को भी अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

इस एक लाख करोड़ रुपये के मेगा रक्षा सौदे का प्रभाव केवल सामरिक मोर्चेबंदी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के वित्तीय और औद्योगिक परिदृश्य पर भी दूरगामी असर डालेगा। रक्षा क्षेत्र में इतनी बड़ी पूंजी के घरेलू निवेश से भारत के एयरोस्पेस इकोसिस्टम, एमएसएमई व हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अभूतपूर्व गति मिलेगी। स्थानीय स्तर पर कलपुर्जों के उत्पादन और रखरखाव की सुविधा विकसित होने से न केवल विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी, बल्कि भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत निर्यातक के रूप में भी उभर सकता है।

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