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रक्षाबंधन 2026: सरहद पर डटे सैनिकों तक पहुंचेगा बहनों का प्यार, बागेश्वर रेडक्रॉस सोसाइटी ने शुरू की खास पहलउत्तराखंड
25 अग॰ 2026, 5:59 pm (28 दिन पहले)· 2

रक्षाबंधन 2026: सरहद पर डटे सैनिकों तक पहुंचेगा बहनों का प्यार, बागेश्वर रेडक्रॉस सोसाइटी ने शुरू की खास पहल

बागेश्वर रेडक्रॉस सोसाइटी ने रक्षाबंधन 2026 के पावन अवसर पर एक अनूठी मुहिम शुरू की है, जिसके तहत जिले के नागरिक सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए राखियां भेज सकेंगे।

बागेश्वर में रक्षाबंधन के पावन पर्व को लेकर एक बेहद संवेदनशील और अनूठी मुहिम की शुरुआत की गई है। भाई-बहन के प्रेम और अटूट विश्वास का यह त्योहार देश के उन वीर सैनिकों के लिए इस बार और भी खास होने जा रहा है, जो अपने परिवार से कोसों दूर दिन-रात सरहद की सुरक्षा में डटे रहते हैं। इसी भावना को सम्मान देते हुए बागेश्वर रेडक्रॉस सोसाइटी ने एक भावनात्मक पहल का आगाज किया है, जिसके तहत जिले के हर घर से सैनिकों के नाम एक राखी भेजने की अपील की गई है।

इस अभियान के पीछे का मुख्य उद्देश्य उन जवानों के भीतर अपनापन और आत्मीयता जगाना है, जो त्योहारों के मौके पर भी अपने घर नहीं लौट पाते हैं और देश सेवा को सर्वोपरि रखते हैं। रेडक्रॉस सोसाइटी की वरिष्ठ सदस्य राजेश्वरी कार्की का कहना है कि संस्था की ओर से हर साल रक्षाबंधन पर सैनिकों के लिए राखियां एकत्रित करके भेजी जाती हैं, लेकिन इस बार इस नेक काम को और भी बड़े पैमाने पर विस्तार देने का प्रयास किया जा रहा है।

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देशभक्ति की अनूठी भावना

सोसाइटी का मानना है कि जिस प्रकार देश के प्रधानमंत्री के आह्वान पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर घर तिरंगा फहराकर नागरिकों ने देशभक्ति का परिचय दिया था, ठीक उसी जज्बे के साथ अब हर परिवार देश के रक्षकों के लिए एक राखी भेज सकता है। जब देश के अलग-अलग कोनों से सरहद पर तैनात जवानों तक ये राखियां पहुंचती हैं, तो उन्हें यह अहसास होता है कि पूरा देश उनके साथ मजबूती से खड़ा है। एक छोटी सी राखी इन जांबाज सैनिकों के लिए बहुत बड़ी भावनात्मक खुशी और संबल का जरिया बन जाती है।

अभियान में ऐसे हो सकते हैं शामिल

इस अनूठे अभियान का हिस्सा बनने के लिए स्थानीय नागरिकों को अपने घर से एक राखी तैयार करनी होगी। यह राखी बेहद साधारण या फिर अपने हाथों से बनाई हुई भी हो सकती है। इसके साथ ही, सैनिक भाइयों के नाम एक छोटा सा प्यार भरा शुभकामना संदेश भी साथ जोड़ा जा सकता है। लोग इन राखियों को सुरक्षित रूप से पैक करके बागेश्वर रेडक्रॉस सोसाइटी के जरिए सैनिकों तक पहुंचाने के इस सफर में अपना योगदान दे सकते हैं। राखी जमा करने के लिए निर्धारित स्थान और अंतिम तिथि की विस्तृत जानकारी के वास्ते लोग सीधे रेडक्रॉस सोसाइटी से संपर्क कर सकते हैं।

हजारों राखियां बनेंगी सम्मान का बड़ा संदेश

बागेश्वर रेडक्रॉस सोसाइटी ने जिले के सभी नागरिकों से यह पुरजोर अपील की है कि वे बढ़-चढ़कर इस मुहिम का हिस्सा बनें और अपनी सहभागिता दर्ज कराएं। सोसाइटी का कहना है कि एक परिवार के लिए एक राखी भेजना कोई कठिन कार्य नहीं है, लेकिन जब ऐसे हजारों घरों से राखियां एकत्र होकर जवानों तक पहुंचेंगी, तो यह देशवासियों के अगाध प्रेम और सम्मान का एक बहुत बड़ा संदेश बन जाएगा। रक्षाबंधन के दिन जब घर से दूर रहकर देश की हिफाजत कर रहे जवानों की कलाई पर बागेश्वर के किसी परिवार की भेजी हुई राखी सजेगी, तो वह पल उनके लिए किसी अपने के साथ होने जैसा अहसास कराएगा।

सवाल-जवाब

बागेश्वर में सैनिकों के लिए राखी भेजने की पहल किसने शुरू की है?
यह पहल बागेश्वर रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा शुरू की गई है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का उद्देश्य रक्षाबंधन पर अपने घरों से दूर सीमा पर तैनात जवानों तक अपनापन और भाई-बहन के प्रेम की भावना पहुंचाना है।
इस मुहिम में कौन शामिल हो सकता है?
जिले का कोई भी आम नागरिक या परिवार अपने घर पर एक साधारण या हाथ से बनी राखी तैयार कर इस अभियान का हिस्सा बन सकता है।
राखी के साथ और क्या भेजा जा सकता है?
राखी के साथ सैनिकों के लिए एक छोटा सा शुभकामना संदेश भी लिखकर भेजा जा सकता है।
राखी जमा करने की जानकारी कहां मिलेगी?
राखी जमा करने की जगह और अंतिम तिथि की जानकारी के लिए बागेश्वर रेडक्रॉस सोसाइटी से संपर्क किया जा सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 दिन पहले

यह पहल सराहनीय है, किंतु राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में डाक और पार्सल की आवाजाही के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालन बेहद जरूरी है। जिला प्रशासन और रेडक्रॉस सोसाइटी को यह सुनिश्चित करना होगा कि भेजी जाने वाली सामग्री की पूरी जांच हो, ताकि सीमाओं पर तैनात जवानों की सुरक्षा और व्यवस्था पर कोई असर न पड़े।

Rohan Verma@rohan-verma·27 दिन पहले

करण मल्होत्रा द्वारा उठाए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल के बिंदु को ज़मीनी हकीकत के साथ जोड़ना आवश्यक है। उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों में नागरिक स्तर से भेजी जाने वाली सामग्री के लिए लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक समन्वय की एक स्पष्ट कार्ययोजना होनी चाहिए। यदि जिला प्रशासन और रेडक्रॉस सोसाइटी शुरुआती चरण से ही सैन्य अधिकारियों के साथ मिलकर एक पारदर्शी कलेक्शन और स्क्रीनिंग मेकैनिज्म तैयार कर लें, तो इस जन-अभियान की सफलता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकेंगी।

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