अजय देवगन की दृश्यम 3 के कलाकारों का मेहनताना आया सामने, मुख्य अभिनेता से तब्बू को मिली सात गुना कम रकमसर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा घर, अक्टूबर के महीने में गमलों में लगाएं ये सात खास किस्मेंतुला राशिफल 1 अक्टूबर 2026: जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचें, वित्तीय और कार्यक्षेत्र के फैसलों में रखें सजगताकन्या राशिफल 1 अक्टूबर 2026: आत्मविश्वास से बनेंगे काम, रिश्तों में संवाद और आराम पर दें ध्यानबिना फ्राई किए ओवन में बनाएं सुपर क्रिस्पी चिकन श्नाइटल, रसदार स्वाद और कम तेल का आसान तरीकानवजात को दूध पिलाने में थोड़ी सी लापरवाही भी बन सकती है जानलेवा, बाल रोग विशेषज्ञ ने बताए जरूरी नियमअमेरिका ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को देश छोड़ने का दिया आदेश, कच्चे तेल और वैश्विक बाजारों में हलचलअमेरिकी सीनेट में क्लैरिटी एक्ट अटकने से डिजिटल एसेट बाजार को मिली नई ऊर्जा, मैट हॉगन ने गिनाए फायदेराजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई अंतिम चरण में, जानिए कब से सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभजिमीकंद और सूरन काटने पर नहीं होगी हाथों में खुजली, शेफ रणवीर बरार ने बताए पकाने के आसान नुस्खे
राष्ट्रपति और राज्यपाल के एडीसी पद से जुड़े नियम, जानिए किन रैंक के अफसरों को मिलता है यह मौकाभारत
20 सित॰ 2026, 1:36 pm (11 दिन पहले)· 0

राष्ट्रपति और राज्यपाल के एडीसी पद से जुड़े नियम, जानिए किन रैंक के अफसरों को मिलता है यह मौका

सशस्त्र बलों में एडीसी बनने के लिए केवल मेजर रैंक होना अनिवार्य नहीं है, बल्कि कैप्टन और लेफ्टिनेंट कर्नल स्तर के अधिकारी भी कड़े चयन के बाद इस पद पर तैनात होते हैं।

गणतंत्र दिवस समारोह, स्वतंत्रता दिवस या किसी राजकीय आयोजन में जब देश के राष्ट्रपति या राज्यों के राज्यपाल मंच पर उपस्थित होते हैं, तो उनके साथ हमेशा एक या दो बेहद अनुशासित, स्मार्ट वर्दीधारी सैन्य अधिकारी साए की तरह तैनात दिखाई देते हैं। इन सैन्य अधिकारियों को औपचारिक रूप से एडीसी यानी एड-डे-कैंप (Aide-de-Camp) कहा जाता है। आम जनमानस में अक्सर यह आम धारणा बन चुकी है कि एडीसी की यह अत्यंत संवेदनशील और प्रतिष्ठा से भरी जिम्मेदारी सिर्फ मेजर रैंक के अधिकारियों के लिए ही तय की गई है। हालांकि, सैन्य नियमों और ऐतिहासिक परंपराओं का बारीकी से अध्ययन करें तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है।

क्या एडीसी बनने के लिए सिर्फ मेजर रैंक होना जरूरी है?

सशस्त्र बलों के स्थापित नियमों के मुताबिक, एडीसी बनने के लिए मेजर होना कोई एकमात्र या अनिवार्य शर्त नहीं है। आधिकारिक परंपराओं और सेवा नियमों के तहत आमतौर पर सेना में कैप्टन, मेजर या लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के सैन्य अधिकारियों को इस भूमिका के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है। यही व्यवस्था भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना में भी लागू होती है, जहाँ इन सेनाओं के समकक्ष रैंक वाले प्रतिभाशाली अफसरों को अवसर मिलता है।

ये भी पढ़ें

नियुक्ति का प्राथमिक पैमाना कोई एक बंधी-बंधाई रैंक नहीं होता, बल्कि संबंधित अधिकारी का अब तक का असाधारण सर्विस रिकॉर्ड देखा जाता है। इसके अलावा उनका अनुशासित कार्य व्यवहार, शारीरिक फिटनेस, मानसिक सजगता, संकट के पलों में त्वरित निर्णय क्षमता और उच्च पदस्थ महानुभावों के साथ सहज समन्वय कौशल जैसे गुण देखे जाते हैं। राष्ट्रपति के एडीसी और किसी राज्य के राज्यपाल के एडीसी के चयन मानकों में जरूरत के आधार पर विविधता हो सकती है, जिसके चलते कैप्टन अथवा लेफ्टिनेंट स्तर के युवा अधिकारी भी इस भूमिका में चुने जा सकते हैं।

मेजर ऋषभ सिंह संब्याल और नव्या शेखावत के उदाहरण

इस प्रतिष्ठित जिम्मेदारी को समझने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ तैनात रहे अधिकारियों के उदाहरण को देखा जा सकता है। राष्ट्रपति के पूर्व एडीसी मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने अपनी कार्यकुशलता और अनुकरणीय सैन्य अनुशासन के बल पर इस पद पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी इसी तैनाती के चलते कई लोगों के मन में यह ख्याल बैठ गया कि यह दायित्व केवल मेजर स्तर पर ही सीमित है।

वहीं दूसरी ओर, मौजूदा एडीसी नव्या शेखावत की जिम्मेदारी यह साफ करती है कि भारतीय सेना में अब जेंडर की कोई सीमा इस भूमिका के आड़े नहीं आती। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समारोहों, आधिकारिक कार्यक्रमों और वीवीआईपी दौरों में महिला सैन्य अधिकारियों, चाहे वे कैप्टन हों या अन्य युवा रैंक की अधिकारी, उन्होंने एडीसी के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ किया है। इससे स्पष्ट होता है कि योग्यता और दक्षता के सामने रैंक अथवा जेंडर की कोई दीवार नहीं ठहरती।

कड़ी चयन प्रक्रिया और एडीसी की प्रमुख जिम्मेदारियां

एडीसी का पद सिर्फ एक औपचारिक रुतबा या आकर्षक पोशाक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेहद भारी प्रशासनिक जिम्मेदारी, निरंतर सतर्कता और अटूट निष्ठा का प्रतीक माना जाता है।

चयन प्रक्रिया का प्रारूप: इस भूमिका के लिए सशस्त्र बलों के भीतर से ही सबसे बेहतरीन, निष्ठावान और अनुशासित अफसरों की पहचान की जाती है। यह चयन प्रक्रिया काफी लंबी और कठोर कसौटियों से होकर गुजरती है। इसमें अधिकारी के पिछले पूरे सेवा रिकॉर्ड, ड्रिल और टर्नआउट का स्तर, यूनिट के कमांडिंग अफसर की गोपनीय सिफारिशें और गहन व्यक्तिगत साक्षात्कार शामिल होते हैं। सभी पहलुओं पर खरा उतरने के बाद ही अंतिम चयन सूची तैयार होती है।

दैनिक कार्य और दायित्व: एडीसी का मुख्य कार्य राष्ट्रपति, राज्यपाल अथवा सैन्य बलों के शीर्ष कमांडरों को उनके आधिकारिक कार्यक्रमों, सुरक्षा व्यवस्था और उच्चस्तरीय बैठकों में सहायता प्रदान करना होता है। वे हर क्षण अपने वीवीआईपी के साथ रहते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि निर्धारित प्रोटोकॉल, समय सारिणी और सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन हो।

ऐतिहासिक सैन्य परंपरा और डेपुटेशन की व्यवस्था

ऐतिहासिक संदर्भों पर नजर डालें तो एडीसी की परंपरा ब्रिटिश काल के दौरान सैन्य ढांचे में विकसित हुई थी। आजादी के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने इस गौरवशाली परंपरा को अपने सर्वोच्च सम्मान, गरिमा और उच्च पेशेवर मूल्यों के साथ सहेज कर रखा है।

सैन्य नियमों के तहत चुने गए अधिकारी अपनी मूल पेरेंट यूनिट से कुछ वर्षों के लिए डेपुटेशन पर वीवीआईपी सुरक्षा और प्रोटोकॉल प्रबंधन के लिए भेजे जाते हैं। इस प्रतिनियुक्ति के दौरान इन युवा अफसरों को देश के सर्वोच्च नेतृत्व के साथ सीधे तौर पर काम करने, शीर्ष प्रशासनिक निर्णयों की कार्यशैली देखने और राष्ट्रीय स्तर के प्रोटोकॉल को समझने का अनूठा अनुभव प्राप्त होता है। यह पद इस वास्तविकता को रेखांकित करता है कि भारतीय सेना में प्रतिष्ठा का आधार केवल सेवा के वर्ष या उम्र नहीं, बल्कि व्यक्तिगत योग्यता, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र सेवा का जज्बा है।

सवाल-जवाब

एडीसी (Aide-de-Camp) का क्या अर्थ होता है?
एडीसी सशस्त्र बलों का एक विशेष अधिकारी होता है, जो राष्ट्रपति, राज्यपाल या वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के साथ सुरक्षा, प्रशासनिक बैठकों और प्रोटोकॉल समन्वय में सहायता करता है।
क्या एडीसी बनने के लिए मेजर रैंक होना अनिवार्य है?
नहीं, मेजर होना अनिवार्य नहीं है। सेवा नियमों के तहत सेना के कैप्टन, मेजर या लेफ्टिनेंट कर्नल और नौसेना व वायुसेना के समकक्ष अधिकारी भी इस पद के लिए चुने जा सकते हैं।
एडीसी के चयन का मुख्य आधार क्या होता है?
अधिकारी का पिछला सेवा रिकॉर्ड, ड्रिल दक्षता, टर्नआउट, कमांडिंग अफसर की सिफारिश और साक्षात्कार में प्रदर्शन इसके चयन का प्रमुख आधार होता है।
क्या महिला सैन्य अधिकारी भी एडीसी बन सकती हैं?
हाँ, महिला सैन्य अधिकारी भी एडीसी के रूप में तैनात होती हैं, जैसा कि राष्ट्रपति की एडीसी नव्या शेखावत के मामले में देखा गया है।
एडीसी की नियुक्ति कितने समय के लिए होती है?
एडीसी अपनी मूल सैन्य यूनिट से वीवीआईपी सुरक्षा और प्रोटोकॉल के लिए कुछ वर्षों की सीमित अवधि के लिए डेपुटेशन पर आते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·10 दिन पहले

राष्ट्रपति भवन या राजभवनों में आयोजित होने वाले राजकीय भोजों, सांस्कृतिक आयोजनों और विदेशी मेहमानों के आतिथ्य में एडीसी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वीवीआईपी प्रोटोकॉल और भव्य राज्य समारोहों के सुचारू संचालन में इनकी मानसिक सतर्कता और समन्वय क्षमता की परीक्षा होती है। कैप्टन या मेजर स्तर के युवा अधिकारियों और महिला अफसरों का चयन यह दर्शाता है कि हमारी प्रशासनिक व्यवस्था अब रूढ़िवादी मानकों के बजाय कार्यकुशलता और आधुनिक समन्वय कौशल को प्राथमिकता दे रही है।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

संवैधानिक पदों पर एडीसी के चयन से जुड़े इस विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि भारतीय सैन्य प्रशासन में अब रूढ़िवादी धारणाओं के बजाय योग्यता, परिचालन क्षमता और समावेशिता को प्राथमिकता मिल रही है। कैप्टन से लेकर लेफ्टिनेंट कर्नल स्तर के अधिकारियों की तैनाती और महिला अधिकारियों का बढ़ता प्रतिनिधित्व यह दर्शाता है कि उच्च स्तरीय प्रोटोकॉल प्रबंधन में लैंगिक और रैंक संबंधी बाधाएं समाप्त हो रही हैं। रक्षा संस्थाओं का यह आधुनिक दृष्टिकोण आने वाले समय में सैन्य लीडरशिप और प्रशासनिक दक्षता को और सुदृढ़ करेगा।

Michael Anderson@michael-anderson·10 दिन पहले

रविकाश के विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि सैन्य और नागरिक प्रशासन में लचीलापन संस्थागत परिपक्वता का प्रतीक है। वैश्विक स्तर पर भी राष्ट्राध्यक्षों के सुरक्षा और प्रोटोकॉल तंत्र में योग्यता-आधारित चयन को प्राथमिकता दी जाती है। भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा केवल एक रैंक की बाध्यता से परे हटकर कैप्टन से लेफ्टिनेंट कर्नल तक के दक्ष अफसरों और महिला अधिकारियों को एडीसी जैसी ज़िम्मेदारी सौंपना यह दर्शाता है कि निर्णय क्षमता और पेशेवर रिकॉर्ड ही वास्तविक मानक हैं। यह दृष्टिकोण न केवल शीर्ष संवैधानिक कार्यालयों के समन्वय को अधिक कुशल बनाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर देश की सैन्य संरचना की आधुनिक और समावेशी छवि भी स्थापित करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

संवैधानिक प्रमुखों की सुरक्षा और आधिकारिक शिष्टाचार से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता होना बेहद जरूरी है। यह रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि एडीसी जैसे संवेदनशील पदों पर नियुक्ति केवल किसी खास रैंक तक सीमित न होकर अधिकारी की कार्यकुशलता, त्वरित निर्णय क्षमता और योग्यता पर आधारित होती है। लैंगिक तटस्थता और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया का यह पहलू वीवीआईपी प्रोटोकॉल और प्रशासनिक व्यवस्था में बढ़ते आधुनिकीकरण को दर्शाता है। इससे न केवल रक्षा सेवाओं के आंतरिक मानदंडों को समझने में मदद मिलती है, बल्कि संस्थागत निष्ठा के प्रति आम जनता का विश्वास भी मजबूत होता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 दिन पहले

संवैधानिक संस्थानों और सेना के बीच यह समन्वय प्रशासनिक परिपक्वता को दर्शाता है। एडीसी चयन प्रक्रिया में पदक्रम की कठोरता को हटाकर योग्यता और लैंगिक समानता को प्राथमिकता देना केवल सैन्य सुधार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के आधुनिक दृष्टिकोण का प्रतीक है। राष्ट्रपति और राज्यपाल जैसे शीर्ष पदों के साथ तैनात अधिकारियों की यह बहुमुखी भूमिका अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक शिष्टाचार और त्वरित नागरिक-सैन्य तालमेल को सुदृढ़ करती है। आने वाले समय में ऐसे प्रशासनिक लचीलेपन से शीर्ष संवैधानिक कार्यालयों की कार्यप्रणाली और अधिक कुशल तथा पारदर्शी बनेगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp