अजय देवगन की दृश्यम 3 के कलाकारों का मेहनताना आया सामने, मुख्य अभिनेता से तब्बू को मिली सात गुना कम रकमसर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा घर, अक्टूबर के महीने में गमलों में लगाएं ये सात खास किस्मेंअक्टूबर की शुरुआत में 19 किलो वाला कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा, जानिए प्रमुख शहरों में नए दामकिसान के बेटे डॉ. भागचंद बधाल का RAS से IAS कैडर में हुआ प्रमोशन, सरकारी स्कूल से शुरू हुआ था सफरगंगा किनारे बेहतरीन नजारों और शांत माहौल का अनुभव देने वाले ऋषिकेश के खास कैफेझारखंड के 22 वर्षीय अजय कुमार विश्वकर्मा ने स्केट्स पर तय किया 21 हजार किमी का सफर, 20 राज्यों में फैलाया नशामुक्ति का संदेशसिंह राशिफल 1 अक्टूबर 2026: कर्म क्षेत्र में चमक और कागजी मामलों में बरतें खास सतर्कताबिना फ्राई किए ओवन में बनाएं सुपर क्रिस्पी चिकन श्नाइटल, रसदार स्वाद और कम तेल का आसान तरीकातुला राशिफल 1 अक्टूबर 2026: जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचें, वित्तीय और कार्यक्षेत्र के फैसलों में रखें सजगताकन्या राशिफल 1 अक्टूबर 2026: आत्मविश्वास से बनेंगे काम, रिश्तों में संवाद और आराम पर दें ध्यान
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर नागालैंड में जुटेंगे आठ पूर्वोत्तर राज्य, क्रियान्वयन की चुनौतियों पर होगी चर्चानागालैंड
18 सित॰ 2026, 11:23 am (13 दिन पहले)· 2

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर नागालैंड में जुटेंगे आठ पूर्वोत्तर राज्य, क्रियान्वयन की चुनौतियों पर होगी चर्चा

नागालैंड में पहली बार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन को लेकर पूर्वोत्तर के आठ राज्यों का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू होने जा रहा है।

नागालैंड पहली बार पूर्वोत्तर क्षेत्र के राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है, जिसमें क्षेत्र के सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधि इस नीति के क्रियान्वयन, उसकी बाधाओं और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह महत्वपूर्ण दो दिवसीय आयोजन शुक्रवार से चुमौकेडिमा जिले के नागा यूनाइटेड विलेज स्थित जेपी पार्क में आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन का आयोजन नागालैंड सरकार द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है, जिसका मुख्य विषय 'पूर्वोत्तर राज्यों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन, विजन, चुनौतियां और अवसर' रखा गया है।

सम्मेलन का उद्देश्य और सामूहिक प्रयास

गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस आयोजन की घोषणा करते हुए नागालैंड के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने बताया कि इस सम्मेलन का मकसद एक ऐसा क्षेत्रीय दल तैयार करना है जो शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मिलकर काम कर सके। अलॉन्ग ने कहा कि हितधारकों को एक ऐसा व्यावहारिक खाका तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा जो लचीला, करने योग्य और परिणाम-उन्मुख हो ताकि क्षेत्र की शिक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पूर्वोत्तर राज्यों को इस नीति को जमीन पर उतारने में कई तरह की साझा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और यह सम्मेलन इन बाधाओं से पार पाने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करेगा।

ये भी पढ़ें

कार्य योजना और वित्तीय सहायता की जरूरत

इस दो दिवसीय मंथन के दौरान एक ठोस कार्यसूची और एक्शन प्लान तैयार करने पर भी ध्यान केंद्रित किए जाने की पूरी उम्मीद है, साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में इसके क्रियान्वयन को बेहतर बनाने के लिए जरूरी उपायों पर आम सहमति बनाई जाएगी। अलॉन्ग के अनुसार, नीति लागू करने वाले संस्थानों को मेंटरशिप देने और लक्षित हस्तक्षेपों तथा क्षमता निर्माण पहलों के जरिए उनकी प्रबंधन क्षमताओं को मजबूत करने की योजनाएं भी बनाई जाएंगी। मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विशेष रूप से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इस नीति को अमलीजामा पहनाने के लिए भारी मात्रा में फंड की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले बिना वित्तीय सहायता को बढ़ाने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने बेहद जरूरी हैं।

बुनियादी ढांचे का विस्तार और सभी राज्यों की भागीदारी

नागालैंड के संदर्भ में बात करते हुए अलॉन्ग ने नए कॉलेज और विश्वविद्यालय स्थापित करने के अलावा मौजूदा संस्थानों के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करके उच्च शिक्षा संस्थानों की क्षमता का विस्तार करने पर विशेष बल दिया। उच्च और तकनीकी शिक्षा सचिव सरिता यादव ने जानकारी दी कि पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों की सरकारों ने इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है। एसईएलसीओ फाउंडेशन और एनएसआरएलएम के हालिया ग्रामीण विकास समझौतों की तर्ज पर शिक्षा क्षेत्र में भी क्षेत्रीय समन्वय को मजबूत करने की तैयारी है।

सवाल-जवाब

यह सम्मेलन कहाँ आयोजित किया जा रहा है?
यह सम्मेलन नागालैंड के चुमौकेडिमा जिले के नागा यूनाइटेड विलेज स्थित जेपी पार्क में आयोजित किया जा रहा है।
इस सम्मेलन में कितने राज्य भाग ले रहे हैं?
इस दो दिवसीय सम्मेलन में पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी आठ राज्यों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
इस आयोजन का मुख्य विषय क्या है?
इस सम्मेलन का मुख्य विषय 'पूर्वोत्तर राज्यों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन, विजन, चुनौतियां और अवसर' है।
इस सम्मेलन के आयोजन में कौन-सी संस्थाएं शामिल हैं?
इस सम्मेलन का आयोजन नागालैंड सरकार द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है।
इस आयोजन की घोषणा किसने की?
इसकी घोषणा नागालैंड के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·12 दिन पहले

पूर्वोत्तर राज्यों का शिक्षा नीति पर एक मंच पर आना क्षेत्रीय सहकारी संघवाद की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भौगोलिक विषमताओं और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण इस क्षेत्र में नीतियां लागू करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में केंद्र और राज्यों के इस साझा प्रयास से वित्तीय अनुदान और संसाधनों के आवंटन पर एक सुदृढ़ सहमति बन सकती है। वास्तविक परीक्षा इस बात की होगी कि क्या यह सम्मेलन केंद्र सरकार से विशेष वित्तीय सहायता और पूर्वोत्तर-विशेष कार्य योजना हासिल करने में सफल होता है, जिससे छात्रों पर आर्थिक बोझ डाले बिना जमीनी स्तर पर सुधार संभव हो सकें।

Sophie Laurent@sophie-laurent·12 दिन पहले

अर्जुन की टिप्पणी क्षेत्रीय संघवाद के एक महत्वपूर्ण बिंदु को रेखांकित करती है। व्यापक नीतिगत ढाँचों के सफल क्रियान्वयन के लिए एक ही मानक सभी क्षेत्रों पर थपने के बजाय उप-क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को स्थान देना आवश्यक होता है। अंतर्राष्ट्रीय और बहु-स्तरीय शासन के अनुभवों से स्पष्ट है कि जब विविधतापूर्ण सीमाओं वाले राज्य साझा नीतियों पर एकजुट होते हैं, तो वित्तीय सहायता के साथ-साथ प्रशासनिक क्षमता और नीतिगत लचीलापन सबसे निर्णायक कारक बनते हैं। यदि यह सम्मेलन एक समन्वित कार्यान्वयन तंत्र विकसित कर पाता है, तो यह संरचनात्मक रूप से जटिल क्षेत्रों में सुधारों को लागू करने का एक स्थायी मॉडल बन सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 दिन पहले

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर पूर्वोत्तर के आठ राज्यों का यह संयुक्त सम्मेलन एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और नीतिगत कदम है। इस तरह के आयोजनों से न केवल क्षेत्रीय स्तर पर नीतिगत बाधाओं को दूर करने में मदद मिलती है, बल्कि बुनियादी ढांचे के विस्तार और वित्तीय सहायता जैसे गंभीर मुद्दों पर भी आपसी सहमति बनती है। चूंकि उच्च शिक्षा और संस्थानों की क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त फंड और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता रेखांकित की गई है, इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र और राज्य मिलकर किस प्रकार एक ठोस और परिणाम-उन्मुख कार्य योजना ज़मीन पर उतारते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·12 दिन पहले

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए केवल प्रशासनिक समन्वय ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके वित्तीय प्रबंधन पर भी गहरी नजर रखनी होगी। जैसा कि मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले बिना फंडिंग जुटाने पर जोर दिया है, आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या इस दिशा में कोई नया राजकोषीय मॉडल या सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) उभरती है। पूर्वोत्तर के दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे और संस्थानों के उन्नयन के लिए जिस भारी पूंजीगत व्यय की आवश्यकता है, उसके लिए एक पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख वित्तीय ढांचा ही इस नीति के दीर्घकालिक प्रभाव को तय करेगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp