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रायगढ़ के कोतरा रोड थाने में रातभर हंगामा, विधायक उमेश पटेल और ग्रामीण धरने पर बैठेछत्तीसगढ़
5 सित॰ 2026, 1:56 am (20 दिन पहले)· 2

रायगढ़ के कोतरा रोड थाने में रातभर हंगामा, विधायक उमेश पटेल और ग्रामीण धरने पर बैठे

रायगढ़ जिले के तारापुर गांव में उप सरपंच की गिरफ्तारी के विरोध में सैकड़ों ग्रामीण और विधायक उमेश पटेल कोतरा रोड थाने के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। आगामी 10 सितंबर को यहां सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होना है।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तारापुर गांव में उप सरपंच की अचानक हुई गिरफ्तारी के बाद सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ गया है। आधी रात को पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई से नाराज सैकड़ों ग्रामीण उग्र होकर सीधे कोतरा रोड थाने पहुंच गए और थाने को घेर लिया। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए खरसिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक उमेश पटेल करीब 10 घंटे से थाने के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं।

आधी रात की कार्रवाई से भड़के ग्रामीण

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पुलिस की एक टीम ने तारापुर गांव के उप सरपंच राजीव डनसेना को उनके घर से बिना किसी पूर्व सूचना के हिरासत में ले लिया। जैसे ही यह खबर स्थानीय लोगों को मिली, भारी संख्या में ग्रामीण रात के वक्त ही थाने के बाहर जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और देखते ही देखते यह पूरा परिसर राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। ग्रामीणों का मुख्य तर्क है कि राजीव डनसेना को एक पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठे मामले में जानबूझकर फंसाया जा रहा है।

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15 अगस्त के विवाद का हवाला

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई बीते 15 अगस्त को हुए एक विवादित घटनाक्रम के सिलसिले में की गई है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि जिस घटना का जिक्र पुलिस कर रही है, उस खास दिन उप सरपंच अपने गांव में मौजूद ही नहीं थे, जिससे इस पूरी कार्रवाई की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

अविश्वास प्रस्ताव और सियासी कनेक्शन

इस पूरे हंगामे के पीछे स्थानीय राजनीति का एक बड़ा कोण जुड़ा हुआ है। तारापुर गांव में वर्तमान सरपंच डिग्री लाल सिदार के खिलाफ गांव के लोग अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए हैं, जिस पर आगामी 10 सितंबर को मतदान होना है। मतदान से ठीक 6 दिन पहले उप सरपंच को इस तरह उठाए जाने को ग्रामीण और विपक्षी नेता एक सोची-समझी साजिश मान रहे हैं ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।

विधायक का कड़ा रुख

धरना स्थल पर मौजूद विधायक उमेश पटेल ने पुलिस और शासन प्रशासन पर तंत्र के खुलेआम दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पुलिस इस गिरफ्तारी के पीछे की ठोस और पारदर्शी वजह सामने नहीं लाती या फिर मामले में निष्पक्ष कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह विरोध प्रदर्शन किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगा।

प्रशासनिक हलचल और तनावपूर्ण माहौल

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह समेत भारी पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया है। अधिकारी लगातार नाराज ग्रामीणों और नेताओं को समझाने-बुझाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि हालात नियंत्रण में आ सकें। फिलहाल थाने के बाहर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में अगला क्या कदम उठाता है।

सवाल-जवाब

रायगढ़ के किस थाने का घेराव किया गया?
ग्रामीणों और विधायक ने रायगढ़ के कोतरा रोड थाने का घेराव किया।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कौन कर रहा है?
खरसिया से विधायक उमेश पटेल इस प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं।
तारापुर गांव में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कब होना है?
तारापुर गांव में सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 10 सितंबर को मतदान होना है।
पुलिस ने किसे हिरासत में लिया था?
पुलिस ने तारापुर गांव के उप सरपंच राजीव डनसेना को हिरासत में लिया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·20 दिन पहले

यह घटना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन और स्थानीय सांस्कृतिक आतिथ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इस तरह के राजनीतिक और प्रशासनिक तनावों से क्षेत्रों की छवि धूमिल होती है, जिससे भविष्य में होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन पहलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

तारापुर गांव के उप सरपंच की गिरफ्तारी का यह मामला महज एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि ग्रामीण सत्ता समीकरणों में पुलिस प्रशासन के इस्तेमाल का गंभीर संकेत है। 10 सितंबर को होने वाले अविश्वास प्रस्ताव से ठीक पहले हुई यह कार्रवाई लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा करती है। यदि प्रशासन ने समय रहते पारदर्शी रुख नहीं अपनाया, तो यह संघर्ष रायगढ़ की स्थानीय राजनीति को एक नया और आक्रामक मोड़ दे सकता है, जिसका असर आस-पास के विधानसभा क्षेत्रों की चुनावी गतिशीलता पर भी पड़ सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·20 दिन पहले

तारापुर मामले में पुलिसिया कार्रवाई का समय और अविश्वास प्रस्ताव की तिथि का यह टकराव केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि स्थानीय स्वशासन की स्वायत्तता पर सीधा आघात है। चुनाव से ठीक छह दिन पहले इस तरह की गिरफ्तारियां लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के भरोसे को कमजोर करती हैं। यदि इस मामले में उच्च स्तर पर जल्द ही न्यायिक या प्रशासनिक स्पष्टता नहीं आई, तो यह असंतोष क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक राजनीतिक लामबंदी का रूप ले सकता है, जिससे कॉर्पोरेट निवेश और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों में भी अस्थिरता का जोखिम पैदा हो सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

स्थानीय निकायों के चुनाव या अविश्वास प्रस्ताव से ठीक पहले इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग के गंभीर सवाल खड़े करती है। आगामी दस सितंबर को होने वाले मतदान से महज छह दिन पहले उप सरपंच की गिरफ्तारी ने ग्रामीण राजनीति में तनाव को और बढ़ा दिया है। यदि समय रहते पुलिस प्रशासन ने निष्पक्षता और पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो यह विरोध प्रदर्शन और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका सीधा असर क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

अविश्वास प्रस्ताव से ठीक पहले की गई यह अर्धरात्रि कार्रवाई पुलिस नियमावली और प्रक्रियात्मक पारदर्शिता पर सीधा प्रहार है। यदि विधिवत नोटिस और स्पष्ट धाराओं के बिना ऐसी गिरफ्तारियां होती रहेंगी, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं और स्थानीय निकायों पर जनता का विश्वास डगमगा जाएगा। आगामी दस सितंबर के मतदान से पहले यदि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर इस मामले में कानूनी स्पष्टता नहीं दी, तो यह जनाक्रोश कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

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