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ऋषिकेश के जानकी सेतु की रात्रिकालीन छटा बनी आकर्षण का केंद्र, गंगा किनारे सेल्फी लेते समय सावधानी जरूरीउत्तराखंड
20 सित॰ 2026, 4:36 pm (2 दिन पहले)· 0

ऋषिकेश के जानकी सेतु की रात्रिकालीन छटा बनी आकर्षण का केंद्र, गंगा किनारे सेल्फी लेते समय सावधानी जरूरी

ऋषिकेश स्थित जानकी सेतु की रंग-बिरंगी रोशनी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है, हालांकि अंधेरे में गंगा तट के पास लापरवाही और फिसलन भरे पत्थरों पर सेल्फी लेने से गंभीर हादसे का जोखिम बढ़ जाता है।

उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्र ऋषिकेश में शाम ढलते ही गंगा तटों की रौनक पूरी तरह बदल जाती है। इन दिनों जानकी सेतु पर की गई विशेष सजावटी लाइटिंग स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले सैलानियों के बीच जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जैसे ही रात का अंधेरा घिरता है, पुल की चमकदार रोशनी गंगा की बहती जलधारा पर एक मनमोहक प्रतिबिंब तैयार करती है, जिसे देखने के लिए बड़ी तादाद में लोग किनारों पर जुट रहे हैं। कई लोग शांत वातावरण में बैठकर कलकल बहती नदी की ध्वनि का आनंद लेते हैं, जबकि युवा और परिवार अपने मोबाइल फोन से वीडियो और तस्वीरें खींचते दिखाई देते हैं।

रात के वक्त पुल का बदलता रूप और सैलानियों की आवाजाही

दिन की तुलना में रात के समय जानकी सेतु और आसपास का इलाका बिल्कुल अलग एहसास कराता है। सेतु पर स्थापित चमकीली लाइटों का अक्स जब गंगाजल पर लहराता है, तो यह दृश्य दूर से ही लोगों को अपनी ओर खींच लेता है। कामकाज से मुक्त होकर स्थानीय नागरिक यहां कुछ सुकून भरे पल बिताने आते हैं, वहीं देश भर से पहुंचे पर्यटक भी इस खास रात के नजारे को अपने कैमरों में कैद करने के लिए रुकते हैं। ठंडी हवा और घाटों का शांत माहौल लोगों को घंटों एक ही जगह बांधे रखता है, लेकिन इसी आकर्षण के बीच कई लोग जाने-अनजाने में खतरनाक स्थानों की तरफ बढ़ जाते हैं।

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नदी तट का अंधेरा और फिसलन भरे पत्थरों से जुड़ा जोखिम

गंगा की खूबसूरती का दीदार करने की चाहत में अक्सर सैलानी सुरक्षित किनारों को छोड़कर जलधारा के अत्यधिक निकट पहुंच जाते हैं। रात के पहर में घाटों और किनारों के कई हिस्सों में पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था नहीं होती, जिससे पानी और सूखी जमीन के बीच का अंतर साफ नजर नहीं आता। नदी से सटे पत्थरों और मिट्टी में लगातार नमी रहने के कारण वहां तेज फिसलन पैदा हो जाती है। जरा सी चूक या पैर का संतुलन बिगड़ने पर कोई भी व्यक्ति सीधे तेज बहाव वाली धारा में समा सकता है, जिससे जान पर सीधा खतरा बन जाता है।

तस्वीरों और वीडियो के चक्कर में ध्यान भटकने की समस्या

गंगा तट पर होने वाली लापरवाहियों में सबसे बड़ी वजह सोशल मीडिया के लिए बेहतरीन तस्वीरें और रील बनाने की होड़ है। मोबाइल की स्क्रीन पर सही एंगल तलाशने के चक्कर में लोग अपने कदमों और आसपास की सतह से नजरें हटा लेते हैं। बेहतर रोशनी या बैकग्राउंड पाने के लिए कुछ लोग पानी के बिल्कुल छोर पर बने पत्थरों पर जा बैठते हैं, तो कुछ लोग खतरनाक ढलानों पर कदम रख देते हैं। गंगा का प्रवाह स्वभाविक रूप से काफी तेज रहता है, ऐसे में अचानक गिरने पर संभलने या बाहर निकलने का मौका बेहद कम मिलता है।

स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने साझा किए सुरक्षा से जुड़े अनुभव

ऋषिकेश के स्थानीय निवासी अंकित का कहना है कि जानकी सेतु की छटा का दीदार करना हर किसी के लिए बेहतरीन अनुभव है, लेकिन लोगों को अपनी सुरक्षा की प्राथमिकता कभी नहीं भूलनी चाहिए। उनका मानना है कि नदी किनारे समय बिताते वक्त तट से उचित दूरी बनाए रखना और अंधेरे वाले रास्तों पर बिना सोचे-समझे आगे न बढ़ना बेहद आवश्यक है। वहीं घूमने पहुंचे पर्यटक सुरेश ने बताया कि रात में पुल की रोशनी पानी पर तैरती दिखती है और यहां का माहौल बहुत सुखद है, लेकिन नदी के बेहद पास जाने से भय भी लगता है। सुरेश ने सलाह दी कि सभी को खूबसूरती देखने जरूर आना चाहिए, परंतु किसी तस्वीर या वीडियो के लिए अपनी जिंदगी को दांव पर लगाना कतई समझदारी नहीं है।

सवाल-जवाब

ऋषिकेश में रात के समय कौन सा पुल पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है?
ऋषिकेश में जानकी सेतु पर की गई विशेष सजावटी लाइटिंग और उसका गंगा के पानी पर पड़ता प्रतिबिंब रात के समय पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहा है।
रात के समय गंगा किनारे जाने पर सबसे बड़ा खतरा क्या है?
रात में कई जगहों पर अंधेरा होने के कारण किनारा साफ दिखाई नहीं देता और पत्थरों पर नमी के चलते तेज फिसलन रहती है, जिससे पैर फिसलकर नदी में गिरने का खतरा रहता है।
पर्यटक नदी किनारे किस वजह से ज्यादा लापरवाह हो जाते हैं?
मोबाइल से सेल्फी, रील या बेहतर एंगल से तस्वीरें लेने के चक्कर में लोग आसपास के खतरों और जमीन की फिसलन से अपना ध्यान हटा लेते हैं।
स्थानीय निवासियों और पर्यटकों ने यहां आने वालों को क्या सलाह दी है?
स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने सलाह दी है कि पुल की खूबसूरती का आनंद जरूर लें, लेकिन नदी से सुरक्षित दूरी बनाकर रखें और अंधेरे में आगे न बढ़ें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·1 दिन पहले

सौंदर्यकरण और बुनियादी ढांचे का विकास तब तक अधूरा है जब तक कि उसमें जन सुरक्षा के कड़े इंतजाम शामिल न हों। अक्सर हमारे नीति निर्माता आकर्षण बढ़ाने वाली लाइटिंग और सौंदर्यीकरण पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन भीड़ नियंत्रण और सुरक्षात्मक घेराबंदी को नजरअंदाज कर देते हैं। इस रिपोर्ट से साफ है कि पर्यटकों को केवल जागरूक करना काफी नहीं है; प्रशासन को यहां तुरंत सीसीटीवी, चेतावनी बोर्ड और नाइट गार्ड्स की तैनाती जैसे कड़े कदम उठाने होंगे, ताकि पर्यटन का यह नया केंद्र किसी हादसे का सबब न बने।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे का सौंदर्यीकरण स्वागत योग्य है, लेकिन स्थानीय प्रशासन को इसके साथ ही सार्वजनिक सुरक्षा नीतियों को भी सुदृढ़ करना होगा। जानकी सेतु पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आपदा प्रबंधन और नगर निकाय को सक्रिय होना पड़ेगा। नदी तटों पर पर्याप्त रोशनी, स्पष्ट चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा गार्डों की तैनाती जैसे नीतिगत कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है। पर्यटन विकास और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन ही सुशासन की पहचान है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

अवसंरचना का सौंदर्यीकरण स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा उत्प्रेरक है, लेकिन सुरक्षा से जुड़े हादसे किसी भी पर्यटन स्थल की ब्रांड वैल्यू को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऋषिकेश जैसे वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के लिए, सौंदर्यशास्त्र के साथ 'स्मार्ट सुरक्षा तकनीक' (जैसे मोशन सेंसर और जियोफेंसिंग) का एकीकरण आवश्यक है। हमें यह समझना होगा कि सुरक्षित और प्रबंधित पर्यटन ही दीर्घकालिक आर्थिक लाभ और निवेशकों के विश्वास को सुनिश्चित करता है। केवल बुनियादी ढांचा चमकाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आगंतुकों की सुरक्षा के साथ जोखिम का प्रबंधन करना ही इस आर्थिक विकास मॉडल को टिकाऊ बनाएगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के नजरिए से देखें तो जानकी सेतु के आसपास रात में बढ़ती भीड़ और खतरनाक किनारों पर सेल्फी का बढ़ता चलन गंभीर हादसों को न्योता दे रहा है। अंधेरे घाटों पर सुरक्षा रेलिंग, स्पष्ट चेतावनी बोर्ड और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था का अभाव सीधे तौर पर प्रशासनिक निगरानी की कमी को उजागर करता है। नदी की तेज धारा और फिसलन भरी चट्टानों के पास पुलिस गश्त और जल पुलिस या आपदा प्रबंधन दल की सक्रिय तैनाती अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय डूबने की घटना या जानलेवा लापरवाही को समय रहते रोका जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

बुनियादी ढांचे के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ 'स्मार्ट सुरक्षा' ढांचा तैयार करना बेहद जरूरी है। पर्यटन स्थलों पर सिर्फ सजावटी लाइटें लगाना काफी नहीं है, जब तक कि वहां भीड़ नियंत्रण, पीए सिस्टम और वास्तविक समय की निगरानी प्रणाली स्थापित न हो। स्थानीय प्रशासन को राज्य आपदा प्रबंधन बलों के समन्वय से एक एकीकृत सुरक्षा ग्रिड बनाना चाहिए। लोक नीति और शासन में सुरक्षा-प्रथम का दृष्टिकोण ही ऐसे पर्यटन स्थलों को सुरक्षित और टिकाऊ बनाएगा।

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