दूसरे देशों में रोजगार के आकर्षक अवसरों की आड़ में खतरनाक सैन्य मोर्चों पर धकेल दिए जाने के मामलों को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने देश के युवाओं को बेहद सतर्क रहने का परामर्श दिया है। सरकार की तरफ से बीते दो वर्षों के दौरान बार-बार यह आगाह किया जाता रहा है कि विदेश में काम करने के किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी हर स्तर पर पड़ताल की जानी चाहिए। खासतौर से ऐसे किसी भी प्रलोभन या माध्यम से पूरी तरह दूरी बनाए रखने की ताकीद की गई है, जिसकी सीधी या परोक्ष परिणति रूसी सशस्त्र बलों में तैनाती के तौर पर हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि इस तरह के जोखिम भरे रास्तों को किसी भी सूरत में बढ़ावा नहीं दिया जा सकता और नागरिकों को इस गंभीर खतरे से पूरी तरह दूर रहना होगा।
मोटी तनख्वाह और सुरक्षित वापसी की गलतफहमी बनी बड़ी वजह
अधिकारियों के संज्ञान में यह चिंताजनक पहलू आया है कि कुछ नागरिक भारी आर्थिक लाभ की उम्मीद में जानबूझकर इस किस्म के रास्ते तलाश रहे हैं। कई मामलों में लोगों ने आकर्षक पारिश्रमिक, भारी बोनस और बेहतर जीवन के झांसे में आकर विदेशी सैन्य संरचनाओं का हिस्सा बनना स्वीकार किया। इन लोगों के मन में यह गलत धारणा घर कर गई थी कि जब हालात बिगड़ेंगे या खतरा सामने आएगा, तो वे नई दिल्ली से संपर्क साधकर सरकारी हस्तक्षेप के जरिए आसानी से वतन वापस लौट आएंगे। सरकार ने इस पूरी सोच को अत्यंत घातक और अवास्तविक करार दिया है।
मंत्रालय का कहना है कि किसी दूसरे मुल्क की फौज में एक बार भर्ती हो जाने के बाद वहां की कानूनी और मैदानी परिस्थितियां पूरी तरह बदल जाती हैं। युद्धक्षेत्र की अनिश्चितताओं और जटिल सैन्य नियमों के बीच केवल आर्थिक फायदे को आगे रखकर बाद में सरकारी हस्तक्षेप के भरोसे जान दांव पर लगाना भारी भूल साबित हो सकता है। ऐसे संवेदनशील हालात में प्रशासनिक मदद पर निर्भर रहने की उम्मीद पालना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है, इसलिए नागरिकों को केवल वैध, प्रमाणित और भरोसेमंद रास्तों से ही रोजगार खोजना चाहिए।
नागरिकता छोड़ने और रूसी पासपोर्ट की चाहत पर कड़ी चेतावनी
इस पूरे मामले में सामने आया एक दूसरा पहलू और भी गंभीर और पेचीदा है, जहां कुछ नागरिकों ने कथित तौर पर भारतीय नागरिकता त्यागने और रूसी पासपोर्ट हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। आर्थिक लाभ और विदेशी पहचान की लालसा में कई लोगों ने भारतीय राजनयिकों या संबंधित अधिकारियों से किसी तरह की सलाह लिए बिना ही यह कदम उठा लिया, ताकि वे वहां की सेना का नियमित हिस्सा बन सकें। सरकार ने इस गैर-जिम्मेदाराना प्रवृत्ति पर गहरा ऐतराज जताते हुए सभी से इस निर्णय के कानूनी और व्यक्तिगत परिणामों को गंभीरता से समझने का आह्वान किया है।
विदेश मंत्रालय ने आगाह किया है कि विदेशी सेना की वर्दी पहनने के बाद व्यक्ति खुद को सीधे तौर पर ऐसे जानलेवा खतरों के बीच झोंक देता है, जहां से सामान्य नागरिक अधिकारों की सुरक्षा कर पाना बेहद कठिन हो जाता है। युद्ध के मोर्चे पर खड़े किसी लड़ाके के लिए पासपोर्ट या नागरिकता के नए दस्तावेज किसी भी तरह की सुरक्षा ढाल नहीं बन सकते। लिहाजा, नागरिकों को साफ शब्दों में निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी भ्रम या क्षणिक आकर्षण में आकर ऐसा विनाशकारी फैसला न लें।
फर्जी भर्ती एजेंटों और अनौपचारिक सिंडिकेट पर नजर
नौकरी दिलाने के नाम पर सक्रिय अवैध तंत्र को लेकर भी सरकार ने चेतावनी के कड़े स्वर अपनाए हैं। जानकारी के अनुसार, कई गैर-पंजीकृत संस्थाएं, स्वैच्छिक समूह और अनौपचारिक संगठन युवाओं को गुमराह करके विदेश भेजने का नेटवर्क चला रहे हैं। ये एजेंट सामान्य हेल्पर, सुरक्षा गार्ड या सहायक कार्यों के नाम पर लोगों को रूस बुलाते हैं और फिर उन्हें सैन्य टुकड़ियों से जोड़ देते हैं। ऐसे बिचौलियों से सावधान रहने की सख्त जरूरत है जो विदेश मंत्रालय के अनिवार्य दिशा-निर्देशों और पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं।
किसी भी एजेंट द्वारा दिए गए अनुबंध को स्वीकार करने से पहले उसके स्रोत, नियोक्ता की पहचान और काम की वास्तविक प्रकृति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जानी चाहिए। केवल अधिक वेतन, बोनस या स्थायी निवास का लालच देखकर बिना सोचे-समझे हस्ताक्षर करना किसी बड़े संकट को बुलावा देना है। नागरिकों को यह समझना होगा कि सेना से जुड़ा कोई भी काम सामान्य कॉर्पोरेट या सिविलियन नौकरी जैसा नहीं होता, बल्कि उसमें सीधे तौर पर युद्ध और हथियार उठाने के कड़े सैन्य नियम लागू होते हैं।
मौजूदा कर्मियों की सुरक्षा और रिहाई के कूटनीतिक प्रयास
एक तरफ जहां सरकार नए लोगों को इस दलदल में फंसने से रोकने के लिए कड़े परामर्श जारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर पहले से वहां मौजूद नागरिकों को लेकर भी लगातार सक्रियता बरती जा रही है। भारत सरकार रूसी पक्ष के साथ कूटनीतिक स्तर पर निरंतर संपर्क साधे हुए है ताकि वहां के सशस्त्र बलों में सेवाएं दे रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, उनकी सेहत और कुशलक्षेम को सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही उन्हें जल्द से जल्द वहां की सेवाओं से मुक्त कराकर सुरक्षित स्वदेश वापस लाने के औपचारिक प्रयास भी किए जा रहे हैं। नई एडवाइजरी का दोहरा उद्देश्य यही है कि संकट में फंसे लोगों की सुरक्षित घर वापसी का मार्ग प्रशस्त हो और कोई अन्य नागरिक धोखे या लालच का शिकार न बने।












