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सलाखों के पीछे से 5 राज्यों में फैले मॉड्यूल और बिश्नोई सिंडिकेट की कार्यप्रणाली की पूरी पड़तालभारत
13 अग॰ 2026, 9:19 pm (29 दिन पहले)· 3

सलाखों के पीछे से 5 राज्यों में फैले मॉड्यूल और बिश्नोई सिंडिकेट की कार्यप्रणाली की पूरी पड़ताल

कई वर्षों से कारागार में बंद रहने के बावजूद लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क उत्तर भारत के कई राज्यों में सक्रिय है। जानिए कैसे छोटे-छोटे मॉड्यूल, डिजिटल तकनीक और विदेश में बैठे मुख्य चेहरे इस अपराध नेटवर्क को चला रहे हैं।

संगठित अपराध की दुनिया में किसी नेटवर्क का विस्तार सिर्फ एक व्यक्ति के दम पर संभव नहीं होता। कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जांच दलों के निष्कर्ष बताते हैं कि जब कोई अपराधी लंबे समय तक कारागार में रहता है, तो वहां अलग-अलग क्षेत्रों के अपराधियों से संपर्क स्थापित होना एक आम प्रक्रिया बन जाती है। पंजाब के एक ग्रामीण परिवेश से निकलकर छात्र राजनीति के रास्ते अपराध में कदम रखने वाले लॉरेंस बिश्नोई का आपराधिक दायरा भी इसी तरह फैला। कारागार के भीतर बने संपर्कों के माध्यम से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों तक इस गिरोह की पहुंच मजबूत हुई। समय के साथ यह तंत्र प्रांतीय सीमाओं को पार करते हुए एक सुगठित नेटवर्क में बदल गया।

मॉड्यूल आधारित व्यवस्था और विकेंद्रीकृत कार्यप्रणाली

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस आपराधिक गिरोह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मॉड्यूल आधारित संरचना है। पूरा संगठन किसी एक केंद्र या एक व्यक्ति द्वारा सीधे तौर पर संचालित होने के बजाय विभिन्न राज्यों में बांटे गए छोटे-छोटे समूहों के माध्यम से कार्य करता है। इन पृथक मॉड्यूल में शामिल कारिंदे एक-दूसरे की पहचान या गतिविधियों से पूरी तरह अनजान रहते हैं। इस विशेष रणनीतिक बनावट के कारण यदि पुलिस या सुरक्षा एजेंसियां किसी एक मॉड्यूल के सदस्यों को गिरफ्तार कर लेती हैं या उस पर कानूनी शिकंजा कसती हैं, तो भी शेष नेटवर्क का कामकाज प्रभावित नहीं होता और पूरा ढांचा ध्वस्त होने से बच जाता है।

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सिंडिकेट के प्रमुख चेहरे और उनकी भूमिकाएं

इस पूरे तंत्र को संचालित करने में कई मुख्य अपराधियों के नाम प्रमुखता से सामने आते आए हैं, जिनमें से प्रमुख चेहरों का विवरण इस प्रकार है

  • सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़: पंजाब के फरीदकोट जिले से ताल्लुक रखने वाले गोल्डी बराड़ को भारत सरकार द्वारा नामित आतंकवादी घोषित किया जा चुका है। वर्ष 2017 में वह छात्र वीजा के आधार पर कनाडा गया था और वर्तमान में अमेरिका में निवास कर रहा है। गोल्डी बराड़ ने मई 2022 में हुए सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड और वर्ष 2023 में कनाडा में हुई हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जिम्मेदारी सामाजिक माध्यमों के जरिए ली थी। उस पर दिल्ली के एक रेस्तरां संचालक से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने तथा ड्रोन के जरिए अवैध हथियारों की तस्करी करने के गंभीर आरोप दर्ज हैं। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने उस पर 50,000 डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है। लंबे समय तक बिश्नोई गिरोह का हिस्सा रहने के बाद वर्ष 2025 में उसने रोहित गोदारा और काला जठेरी नाम से एक अलग गुट का निर्माण कर लिया है।
  • अनमोल बिश्नोई: लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई अनमोल बिश्नोई हाल ही में अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। आपराधिक अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 2012 में पहली बार उस पर हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ था। उसकी पहली गिरफ्तारी वर्ष 2017 में जोधपुर के एक व्यापारी से रंगदारी वसूलने और गोलीबारी करने के मामले में हुई थी। मई 2022 में सिद्धू मूसेवाला की हत्या के उपरांत वह फर्जी पासपोर्ट के सहारे जयपुर से उड़ान भरकर दुबई भाग गया, जहां से केन्या होते हुए वह अमेरिका पहुंचा। भारत में उसके खिलाफ 31 से अधिक आपराधिक मुकदमे पंजीकृत हैं, जिनमें से 20 से अधिक मामले केवल राजस्थान में हैं। अक्टूबर 2024 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या में वह मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नामजद हुआ। इसके अतिरिक्त, मुंबई में अभिनेता सलमान खान के आवास के बाहर हुई गोलीबारी और सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में हथियार तथा लॉजिस्टिक्स प्रबंधित करने के आरोप भी उस पर हैं।
  • रोहित गोदारा: मूल रूप से राजस्थान के बीकानेर का निवासी रोहित गोदारा पूर्व में मोबाइल मरम्मत का कार्य करता था। वर्ष 2010 में अपराध की दुनिया में प्रवेश करने वाले रोहित के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती और जबरन वसूली जैसे 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह विदेश में बैठकर नेटवर्क का संचालन करता है। उसने पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला और करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या की जिम्मेदारी ली थी। अप्रैल 2024 में सलमान खान के निवास पर हुई गोलीबारी की घटना में भी उसका नाम मुख्य रूप से सामने आया था।

वित्तीय संसाधन, डिजिटल उपकरण और सामाजिक माध्यमों का उपयोग

किसी भी संगठित आपराधिक ढांचे को बनाए रखने के लिए निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। जांच से ज्ञात हुआ है कि इस गिरोह की आय का मुख्य स्रोत व्यापारियों, उद्यमियों और संपन्न व्यक्तियों से धमकियां देकर वसूली जाने वाली रंगदारी है। इसके अतिरिक्त, संपत्ति विवादों के निपटारे के नाम पर मोटी रकम वसूलना और अवैध हथियारों की तस्करी करना भी इनकी आय के प्रमुख माध्यम रहे हैं। इस गिरोह के काम करने का तरीका पारंपरिक अपराधियों से काफी भिन्न है। आम तौर पर फोन कॉल या सीधे मिलकर धमकी देने के बजाय यह गिरोह शुरुआत से ही एन्क्रिप्टेड संदेश ऐप, इंटरनेट कॉलिंग और विभिन्न डिजिटल माध्यमों का प्रयोग करता रहा है। सामाजिक माध्यमों का व्यापक उपयोग कर इस गिरोह ने अलग-अलग शहरों में अपनी पहचान बनाई और खौफ का माहौल तैयार किया।

कारागार के भीतर से बाहर संदेश पहुंचाने का तंत्र

कई वर्षों से मुख्य सरगना के कारागार में बंद होने के बाद भी नई वारदातों में नाम सामने आने के प्रश्न पर जांच अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि किसी संगठित नेटवर्क को चलाने के लिए मुख्य संचालक का बाहर रहना अनिवार्य नहीं होता। गिरोह के सहायक और निचले स्तर के कारिंदे अपनी-अपनी जिम्मेदारियां संभालते हैं। न्यायालय में पेशी के दौरान या पैरोल पर बाहर आने वाले बंदियों के माध्यम से कारागार के भीतर से निर्देश बाहर भेजे जाते हैं और बाहर की सूचनाएं अंदर पहुंचाई जाती हैं।

सवाल-जवाब

लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का मॉड्यूल सिस्टम किस प्रकार काम करता है?
यह गिरोह अलग-अलग राज्यों में छोटे स्वतंत्र समूहों के माध्यम से कार्य करता है। इन मॉड्यूल के सदस्य एक-दूसरे से अनजान रहते हैं, जिससे एक मॉड्यूल पर कार्रवाई का असर पूरे नेटवर्क पर नहीं पड़ता।
गोल्डी बराड़ कौन है और उसके खिलाफ क्या आरोप हैं?
सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पंजाब के फरीदकोट का निवासी है जिसे भारत सरकार ने आतंकवादी घोषित किया है। उस पर सिद्धू मूसेवाला और हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड, रंगदारी तथा हथियार तस्करी के आरोप हैं और एफबीआई ने उस पर 50,000 डॉलर का इनाम रखा है।
अनमोल बिश्नोई को भारत क्यों लाया गया?
अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। उस पर 31 से अधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें बाबा सिद्दीकी हत्याकांड, सिद्धू मूसेवाला केस में लॉजिस्टिक्स सहायता और सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग जैसे मामले शामिल हैं।
रोहित गोदारा की इस गिरोह में क्या भूमिका रही है?
बीकानेर का निवासी रोहित गोदारा विदेश से नेटवर्क ऑपरेट करता है। उसने सिद्धू मूसेवाला और सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या की जिम्मेदारी ली थी और उस पर 30 से अधिक मामले दर्ज हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Tanvi Desai@tanvi-desai·28 दिन पहले

लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट के इस संगठित अपराध नेटवर्क की कार्यप्रणाली किसी आधुनिक कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर या डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसी लगती है, जहाँ विकेंद्रीकृत मॉड्यूल और विदेशी सर्वर आधारित सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके प्रभाव पैदा किया जा रहा है। जिस तरह से यह गिरोह जेल के अंदर से सीमा पार तक अपने कारनामों और सेलिब्रिटी-स्तरीय कुख्याति को डिजिटल माध्यमों से प्रसारित कर रहा है, वह बताता है कि आने वाले समय में अपराध और मीडिया का यह अंतर्संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी डिजिटल और रणनीतिक चुनौती बनने वाला है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·28 दिन पहले

लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट की यह मॉड्यूलर संरचना स्पष्ट करती है कि पारंपरिक पुलिसिंग और जेलों के भीतर निगरानी प्रणाली में किस स्तर के सुधार की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार फैला यह अपराधी तंत्र आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है, जिससे निपटने के लिए कूटनीतिक दबाव और खुफिया तंत्र के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·28 दिन पहले

यह संगठित आपराधिक ढांचा सिर्फ कानून और व्यवस्था की समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने मनोरंजन और मीडिया जगत को भी सीधे तौर पर प्रभावित करना शुरू कर दिया है। फिल्म उद्योग से जुड़ी हस्तियों को मिलने वाली धमकियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने यह साबित कर दिया है कि ऐसे सिंडिकेट्स का प्रभाव अब डिजिटल युग की सोशल मीडिया रीच के जरिए ग्लैमर इंडस्ट्री तक गहरी पैठ बना चुका है, जिससे पूरी फिल्म बिरादरी में एक अलग तरह का डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा हो रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·28 दिन पहले

यह संगठित अपराध अब उत्तर प्रदेश की सीमा तक अपनी जड़ें फैला चुका है, खासकर पश्चिमी यूपी में इसके स्लीपर सेल और स्थानीय मॉड्यूल सक्रिय हुए हैं। कारागार के भीतर से इस तरह के सिंडिकेट का संचालन यह दर्शाता है कि जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी में अभी भी गंभीर खामियां हैं। यदि समय रहते इन विकेंद्रीकृत नेटवर्कों पर कड़ा प्रहार नहीं किया गया, तो यह राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·28 दिन पहले

रहन-सहन और अपराध का यह मॉडल अब पूरी तरह से आधुनिक कॉर्पोरेट सिंडिकेट जैसा काम कर रहा है, जहाँ वैश्विक स्तर पर वित्तीय लेन-देन, हवाला और डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल हो रहा है। जेल के अंदर से इस तरह के विकेंद्रीकृत नेटवर्क का संचालन सिर्फ सुरक्षा में सेंध नहीं, बल्कि वित्तीय और तकनीकी निगरानी प्रणालियों की गंभीर विफलता को उजागर करता है। यदि इन अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और डिजिटल संपर्कों को नहीं तोड़ा गया, तो यह बाज़ार और कॉर्पोरेट जगत के लिए भी सुरक्षा जोखिम बन सकता है।

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